गुजरात के भावनगर में सोशल मीडिया पर सस्ते सोलर पैनल का विज्ञापन देखकर खरीदारी करने की कोशिश एक व्यापारी को महंगी पड़ गई. सौर छत का कारोबार करने वाले भगीरथभाई कथित साइबर ठगी का शिकार हो गए. मुंबई की एक कथित कंपनी के प्रतिनिधि ने सस्ते दाम पर अडानी सोलर पैनल देने का भरोसा दिलाकर उनसे 19.35 लाख रुपये ले लिए.
मामला 1 सितंबर से शुरू हुआ. भगीरथभाई ने इंस्टाग्राम पर अडानी टॉप-कॉन सोलर पीवी मॉड्यूल बेचने से जुड़ी एक रील देखी थी. गुजरात में इन सौर पैनलों की कमी होने की वजह से उन्होंने विज्ञापन में दिलचस्पी दिखाई. इसके बाद 4 सितंबर को रील में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया.
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वहां से अमन सिंह नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और 'सनरूफ एनर्जी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से 49.60 लाख रुपये का मूल्य प्रस्ताव भेजा. उसने बताया कि 40 फीसदी अग्रिम रकम देने पर 15 दिन में सोलर पैनल पहुंचा दिए जाएंगे. भरोसा करके व्यापारी ने 7 सितंबर को 19.35 लाख रुपये ऑनलाइन भेज दिए.
पैसे पहुंचे, लेकिन सामान नहीं आया
अग्रिम भुगतान करने के बाद व्यापारी सोलर पैनल की डिलीवरी का इंतजार करते रहे. तय समय बीतने के बावजूद सामान नहीं पहुंचा. इसी दौरान 14 सितंबर को व्यापारियों के एक समूह में आए संदेश और अखबार की कतरनों से उन्हें इस कंपनी को लेकर दूसरी शिकायतों की जानकारी मिली.
पता चला कि राजकोट के भावेशभाई, डीसा के रोहितकुमार और धार्मिकभाई समेत कई अन्य विक्रेताओं से भी अग्रिम रकम ली गई थी. आरोप है कि भुगतान लेने के बाद उन्हें सौर पैनलों की आपूर्ति नहीं की गई. इसके बाद भगीरथभाई ने अमन सिंह से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसने फोन उठाना बंद कर दिया.
तब व्यापारी को अपने साथ हुई कथित ठगी का अंदाजा हुआ. उन्होंने भावनगर साइबर अपराध थाने में शिकायत दी. शिकायत के आधार पर पुलिस ने अमन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया केस
भावनगर साइबर अपराध पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस अब पैसों के लेनदेन और आरोपी से जुड़े दूसरे पहलुओं की पड़ताल कर रही है.
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर सौर पैनलों का विज्ञापन किस तरह प्रसारित किया गया और व्यापारियों से ली गई रकम कहां-कहां भेजी गई. दूसरे कारोबारियों से सामने आई शिकायतों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है.
फिलहाल भावनगर साइबर अपराध पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है. पुलिस आरोपी की भूमिका, कंपनी से जुड़े विवरण और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है. व्यापारी से 19.35 लाख रुपये की कथित ठगी के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर सस्ते सामान के विज्ञापनों के जरिए होने वाली धोखाधड़ी का एक और उदाहरण सामने लाता है.
ब्रिजेश दोशी