युवराज हत्याकांड में पैसों के लेन-देन का एंगल, 2 गोलियां मारकर कार में रखा शव, कैंची धाम पहुंचे आरोपी

गुरुग्राम में युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के पीछे शुरुआती जांच में पैसों का लेन-देन सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, विवाद के बाद युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारी गईं. शव को कार में रखकर आरोपी करीब दो दिन तक गुरुग्राम में घूमते रहे. बाद में नाले में शव फेंककर उत्तराखंड के कैची धाम पहुंचे, जहां से दोनों गिरफ्तार हुए.

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युवराज सिंह की हत्या के आरोप में आन्या वत्स और उसका साथी गिरफ्तार. (Photo: ITG) युवराज सिंह की हत्या के आरोप में आन्या वत्स और उसका साथी गिरफ्तार. (Photo: ITG)

अंशुल सिंह

  • नई दिल्ली ,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

दिल्ली के सरिता विहार निवासी युवराज सिंह मनचंदा की गुरुग्राम में हत्या के मामले में पुलिस ने उसकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया है. पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या की वजह पैसों का लेन-देन सामने आ रहा है. पुलिस के मुताबिक, इसी विवाद के दौरान युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारी गईं. युवराज गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित अडानी रियल्टी कंपनी में मैनेजर था. 6 सितंबर को वह दिल्ली से गुरुग्राम गया था. इसी साल उसकी शादी होने वाली थी और वह उस दिन अपनी बहन के साथ शादी की शॉपिंग करने निकला था. लेकिन शाम होते-होते वह एक ऐसी मुलाकात के लिए गुरुग्राम पहुंचा, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई.

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6 सितंबर को युवराज अपनी बहन हरसिमरन मनचंदा के साथ लाजपत नगर के सेंट्रल मार्केट में शादी की शॉपिंग करने गया था. इसके बाद दोनों लाजपत नगर-2 के K-Block स्थित गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट पहुंचे. शाम करीब 4 बजे युवराज ने अपनी बहन से कहा कि उसकी गुरुग्राम में मीटिंग है. उसने बताया कि वह रात करीब 10 बजे तक वापस घर आ जाएगा. इसके बाद युवराज गुरुग्राम के लिए निकल गया. पुलिस की जांच में सामने आया कि वहां उसकी मुलाकात पूर्व ऑफिस सहकर्मी आन्या वत्स से हुई. दोनों एक मॉल के बाहर मिले. युवराज अपनी गाड़ी से उतरकर आन्या की क्रेटा में बैठ गया. इसके बाद दोनों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ

कहासुनी के बाद गर्दन में मारी दो गोलियां

पुलिस के मुताबिक, आन्या और युवराज के बीच पहले से कुछ वित्तीय लेन-देन का विवाद था. गुरुग्राम में मुलाकात के दौरान इसी मुद्दे पर दोनों के बीच कहासुनी हुई. विवाद बढ़ा तो युवराज की गर्दन में दो गोलियां मार दी गईं. गोली लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हत्या के बाद आन्या और संयम के सामने शव को ठिकाने लगाने की चुनौती थी. पुलिस के मुताबिक, दोनों ने युवराज के शव को कार में ही रखा. यहां से मामला सिर्फ हत्या तक सीमित नहीं रहा. पुलिस की जांच के मुताबिक, शव को कार में रखने के बाद आरोपी गुरुग्राम में ही घूमते रहे और ऐसी जगह तलाशते रहे जहां शव को फेंका जा सके.

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पुलिस के मुताबिक, युवराज का शव कम से कम दो दिन तक कार में रखा गया और आरोपी गुरुग्राम में घूमते रहे. जिस क्रेटा में युवराज बैठा था, वही गाड़ी बाद में पुलिस ने बरामद कर ली है. आखिरकार आरोपियों ने युवराज के शव को गुरुग्राम के सेक्टर-70 स्थित नाले में फेंक दिया. इसके बाद दोनों उत्तराखंड चले गए. उत्तराखंड पहुंचने के बाद आन्या और संयम कैंची धाम गए. पुलिस के मुताबिक, दोनों वहां एक पीजी गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे. इधर दिल्ली में युवराज के घरवाले उसकी तलाश कर रहे थे.

गुरुग्राम जाने के बाद युवराज रात में घर वापस नहीं लौटा. उसका मोबाइल फोन बंद आने लगा. परिवार ने उसकी तलाश शुरू की. पांच दिन तक कोई सुराग नहीं मिलने के बाद युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने 11 सितंबर को शाम करीब 4:15 बजे लाजपत नगर थाने में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने जांच शुरू की तो युवराज के मोबाइल की कॉल डिटेल और आईपीडीआर रिकॉर्ड खंगाले गए. जांच में सामने आया कि युवराज की बातचीत उसकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स से हुई थी. परिवार से पूछताछ में भी पुलिस को जानकारी मिली कि युवराज ने घर पर बताया था कि वह गुरुग्राम में आन्या से मिलने जा रहा है. इसके बाद पुलिस ने आन्या की तलाश शुरू की, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला.

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पुलिस ने युवराज और आन्या के पुराने ऑफिस से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई. जांच के दौरान पता चला कि आन्या ने नया सिम खरीदा था. पुलिस ने नए नंबर की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच शुरू की. इसी जांच के जरिए पुलिस को आन्या की लोकेशन उत्तराखंड में मिली. इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम उत्तराखंड पहुंची और आन्या वत्स तथा उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को पकड़ लिया. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने युवराज की हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की. दोनों को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.

पुलिस अब हत्या के पीछे पैसों के विवाद की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है. जांच में आन्या के बैंक खाते की जानकारी भी सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, आन्या के खाते में लगातार पैसों का लेन-देन होता था. खाते में जब भी कोई रकम आती थी, उसे तुरंत दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था. घटना के समय उसके बैंक खाते में लगभग कोई रकम नहीं थी. पुलिस अब इन ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है. यह भी देखा जा रहा है कि युवराज और आन्या के बीच कितने पैसों का लेन-देन था.

पुलिस दोनों के पुराने कामकाजी संबंधों की भी जांच कर रही है. आन्या और युवराज पहले एमार कंपनी में साथ काम करते थे. 2022 में वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों के चलते आन्या को कंपनी से निकाल दिया गया था. उस समय तक युवराज कंपनी छोड़ चुका था. बाद में युवराज को दूसरी नौकरी मिल गई, जबकि आन्या को नौकरी नहीं मिली. दोनों के बीच कुछ वित्तीय लेन-देन भी अनसुलझे बताए जा रहे हैं. दिल्ली पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या युवराज और आन्या के कुछ कॉमन क्लाइंट थे और क्या इन ग्राहकों से जुड़े पैसों के लेन-देन का इस विवाद से कोई संबंध था. युवराज के परिवार ने आरोप लगाया है कि आन्या लगातार उसे फोन करती थी और उससे झगड़ा करती थी. परिवार के मुताबिक, 6 सितंबर को आन्या ने ही युवराज को फोन करके गुरुग्राम बुलाया था.

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नाले में मिली तस्वीर से हुई युवराज की पहचान

उधर, गुरुग्राम सेक्टर-70 के नाले से एक युवक का शव मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क किया. युवराज की गुमशुदगी की जांच के दौरान पुलिस को इस शव की जानकारी मिली. गुरुग्राम पुलिस से शव की तस्वीरें लेने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें युवराज के परिवार को दिखाया. परिवार ने तस्वीर देखकर मृतक की पहचान युवराज सिंह मनचंदा के रूप में की. अब पुलिस हत्या की पूरी कड़ी की जांच कर रही है. शुरुआती जांच में पैसे का लेन-देन हत्या की वजह सामने आ रहा है. पुलिस के मुताबिक, आन्या पूछताछ में अपने बयान बदल रही है. ऐसे में बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड, क्रेटा कार, दोनों के पुराने कामकाजी संबंध और गुरुग्राम से उत्तराखंड तक की गतिविधियों की जांच की जा रही है.

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