'जाओ, मां के पैर छूकर पापों की माफी मांगो', मकान पर कब्जे की कोशिश करने वाले कलयुगी बेटे को सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार

दिल्ली में एक बेटे और बहू ने जाली दस्तावेजों के जरिए माता-पिता के घर पर कब्जा करने की कोशिश की, जबकि माता-पिता ने उन्हें प्यार से बिना किराए के पहली मंजिल पर रहने दिया था. निचली अदालत और हाईकोर्ट दोनों ने माता-पिता के पक्ष में फैसला सुनाया था.

Advertisement
सुप्रीम कोर्ट ने बेटे की याचिका खारिज कर 60 दिन में घर खाली करने का दिया आदेश (Photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट ने बेटे की याचिका खारिज कर 60 दिन में घर खाली करने का दिया आदेश (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:36 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति विवाद मामले में एक बेटे को अपने ही माता-पिता के साथ धोखाधड़ी करने पर कड़ी फटकार लगाई है और उसे अपनी मां से माफी मांगने की नसीहत दी है. कोर्ट ने बेटे की याचिका खारिज कर दी और उसे 60 दिनों के अंदर घर खाली करने का आदेश दिया. साथ ही माता-पिता को हर्जाना देने के लिए भी कहा गया है.

Advertisement

यह पूरा मामला दिल्ली का है, जहां एक बुजुर्ग दंपती ने अपनी मेहनत की कमाई से अपना घर बनाया था. प्यार और स्नेह के चलते उन्होंने अपने बेटे और बहू को घर की पहली मंजिल पर बिना किसी किराए के रहने की इजाजत दी थी. लेकिन कुछ समय बाद बेटे और बहू ने जाली कागजातों के सहारे उसी घर पर अपना मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया.

जब यह मामला पहले निचली अदालत और फिर दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचा, तो दोनों अदालतों ने माता-पिता के पक्ष में ही फैसला सुनाया था. इससे संतुष्ट न होकर बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

यह भी पढ़ें: पत्नी को 'सेक्स स्लेव' बनाकर रखा? पति पर केस चलेगा या नहीं SC करेगा फैसला

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए बेटे की अपील को खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने बेटे से सीधे कहा कि उसे अपनी मां के पैर छूकर माफी मांगनी चाहिए और अपने सभी किए गए गलत कामों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए.

कोर्ट ने वहां मौजूद वकीलों से भी सवाल किया कि क्या इस लड़के का यह व्यवहार गलत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि वह चाहता है कि बेटा वापस अपनी मां के पास जाए, उन्हें महसूस करे और उनका आशीर्वाद ले.

Advertisement

कोर्ट ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म समेत सभी धर्मों में और भारतीय समाज में मां का स्थान बहुत ऊंचा और सम्मानजनक है. साथ ही यह साफ किया कि जो बच्चे संपत्ति के लालच में अपने माता-पिता को परेशान करते हैं या उनके साथ धोखा करते हैं, उन्हें कानून का कोई सहारा नहीं मिल सकता.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »