सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति विवाद मामले में एक बेटे को अपने ही माता-पिता के साथ धोखाधड़ी करने पर कड़ी फटकार लगाई है और उसे अपनी मां से माफी मांगने की नसीहत दी है. कोर्ट ने बेटे की याचिका खारिज कर दी और उसे 60 दिनों के अंदर घर खाली करने का आदेश दिया. साथ ही माता-पिता को हर्जाना देने के लिए भी कहा गया है.
यह पूरा मामला दिल्ली का है, जहां एक बुजुर्ग दंपती ने अपनी मेहनत की कमाई से अपना घर बनाया था. प्यार और स्नेह के चलते उन्होंने अपने बेटे और बहू को घर की पहली मंजिल पर बिना किसी किराए के रहने की इजाजत दी थी. लेकिन कुछ समय बाद बेटे और बहू ने जाली कागजातों के सहारे उसी घर पर अपना मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया.
जब यह मामला पहले निचली अदालत और फिर दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचा, तो दोनों अदालतों ने माता-पिता के पक्ष में ही फैसला सुनाया था. इससे संतुष्ट न होकर बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
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जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए बेटे की अपील को खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने बेटे से सीधे कहा कि उसे अपनी मां के पैर छूकर माफी मांगनी चाहिए और अपने सभी किए गए गलत कामों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए.
कोर्ट ने वहां मौजूद वकीलों से भी सवाल किया कि क्या इस लड़के का यह व्यवहार गलत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि वह चाहता है कि बेटा वापस अपनी मां के पास जाए, उन्हें महसूस करे और उनका आशीर्वाद ले.
कोर्ट ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म समेत सभी धर्मों में और भारतीय समाज में मां का स्थान बहुत ऊंचा और सम्मानजनक है. साथ ही यह साफ किया कि जो बच्चे संपत्ति के लालच में अपने माता-पिता को परेशान करते हैं या उनके साथ धोखा करते हैं, उन्हें कानून का कोई सहारा नहीं मिल सकता.
संजय शर्मा