दिल्ली दंगा केस: उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली राहत, कोर्ट से जमानत याचिका खारिज

2020 के दिल्ली दंगा बड़ी साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को कड़कड़डूमा कोर्ट से राहत नहीं मिली. अदालत ने दोनों की ताजा जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. दोनों ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए नई बेल याचिकाएं दाखिल की थीं, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलें स्वीकार नहीं कीं.

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उमर खालिद (बाएं) और शरजील इमाम 2020 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में हैं. (File Photo- ITG) उमर खालिद (बाएं) और शरजील इमाम 2020 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में हैं. (File Photo- ITG)

सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

साल 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोनों की ओर से दायर ताजा जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है.

उमर खालिद और शरजील इमाम ने हाल ही में नई जमानत याचिकाएं दाखिल की थीं. इन याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला दिया गया था, जिसमें जमानत देने के संबंध में अपनाई गई कानूनी व्याख्या पर सवाल उठाए गए थे. इसी आधार पर दोनों आरोपियों ने अदालत से जमानत देने की मांग की थी.

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हालांकि, मामले की सुनवाई के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोनों की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. इसके साथ ही उमर खालिद और शरजील इमाम को 2020 के दिल्ली दंगा बड़ी साजिश मामले में फिलहाल जेल में ही रहना होगा.

क्या है पूरा मामला?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी. इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. बड़ी संख्या में मकान, दुकानें और धार्मिक स्थल भी क्षतिग्रस्त हुए थे.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में दावा किया कि हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी साजिश रची गई थी. इसी आधार पर सितंबर 2020 में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर संख्या 59/2020 दर्ज की गई. इस मामले में कई छात्र नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें उमर खालिद और शरजील इमाम भी शामिल हैं.

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अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध की आड़ में सुनियोजित तरीके से हिंसा की साजिश रची. वहीं, उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य सह-आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है और उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं.

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