नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए गठित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले ही दिन सुनवाई नहीं हो सकी.मामले की सुनवाई अब 3 अगस्त को होगी.हालांकि सुनवाई टलने की वजह को लेकर याचिकाकर्ताओं के वकील और सीबीआई की ओर से अलग-अलग बातें सामने आई हैं.
याचिकाकर्ताओं के वकील का कहना है कि सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील और जांच अधिकारी कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए. इसी वजह से मामले की सुनवाई आगे बढ़ानी पड़ी. वहीं, सीबीआई ने इस दावे से अलग पक्ष रखा है. एजेंसी का कहना है कि उसकी लीगल टीम और जांच अधिकारी विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा की अदालत में मौजूद थे.
सीबीआई के मुताबिक, मामला पिछली अदालत से नई फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर हुआ है. इस दौरान मुकदमे से जुड़ी फाइलें, जांच सामग्री और अन्य रिकॉर्ड समय पर नई अदालत तक नहीं पहुंच सके. इसी प्रक्रियात्मक और प्रशासनिक तालमेल की कमी के कारण पहले दिन सुनवाई नहीं हो पाई. एजेंसी का कहना है कि यह जानबूझकर उठाया गया कोई कदम नहीं था और वह अगली तारीख पर अपना पक्ष रखने के लिए तैयार है.
सरकारी वकील की नियुक्ति का निर्देश
अदालत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण मामले में सीबीआई की ओर से दलील रखने के लिए अभी तक किसी अभियोजक की नियुक्ति भी नहीं हुई है. इसे देखते हुए कोर्ट ने अभियोजन निदेशालय के निदेशक को तुरंत एक सक्षम सरकारी वकील की नियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
सुनवाई टलने के कारण नीट पेपर लीक मामले के आरोपी विकास बिवाल और दिनेश बिवाल की जमानत याचिकाओं पर भी फैसला नहीं हो सका. अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई पर प्रभावी पैरवी के लिए आधिकारिक लोक अभियोजक की मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और मामले को वहां ट्रांसफर किए जाने के बाद पहले दिन ही प्रक्रियात्मक तालमेल पूरा नहीं हो पाया. इसी वजह से नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई अब 3 अगस्त तक टल गई है.
संजय शर्मा