'डीपफेक और AI ग्लोबल प्रॉब्लम, इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत', दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगे सुझाव

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव से पहले डीपफेक के खिलाफ कई याचिकाएं कोर्ट में दायर की गई थीं. लेकिन अब कोई भी याचिकाकर्ता वापस नहीं आया है. कोर्ट ने कहा कि डीपफेक वीडियोज का उपयोग दवाओं की बिक्री या धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है और ऐसे वीडियोज में डिस्क्लेमर नहीं होता है.

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दिल्ली HC ने AI और डीपफेक वीडियो के मामले में सुनवाई की. दिल्ली HC ने AI और डीपफेक वीडियो के मामले में सुनवाई की.

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 28 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 7:38 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक वीडियो पर नियम बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि ये एक वैश्विक समस्या है. जिस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 3 सप्ताह के भीतर विस्तृत सुझाव देने के लिए कहा है, जिसमें अन्य देशों द्वारा अपनाए गए तरीके और उदाहरण शामिल हों. कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी इस पर सुझाव देने को कहा है. दिल्ली हाईकोर्ट मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को करेगा.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव से पहले डीपफेक के खिलाफ कई याचिकाएं कोर्ट में दायर की गई थीं. लेकिन अब कोई भी याचिकाकर्ता वापस नहीं आया है. कोर्ट ने कहा कि डीपफेक वीडियोज का उपयोग दवाओं की बिक्री या धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है और ऐसे वीडियोज में डिस्क्लेमर नहीं होता है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये समस्या वैश्विक है. अगर एक बार ऐसा डीपफेक वीडियो पोस्ट हो जाए और इससे नुकसान हो जाए तो हम शिकायत करते हैं. इतना ही नहीं, 72 घंटे में कार्रवाई होती है, लेकिन तब तक यह वीडियो कई बार शेयर हो चुका होता है.

कोर्ट ने व्यक्ति को दिए जाने वाले मुआवजे की गणना करने में देरी और मामले में बेहतर दृष्टिकोण न अपनाने के लिए फटकार लगाई. इस मामले में कोर्ट ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश कुमार को 9 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब राज्य ने मुआवजे की पुनर्गणना के उद्देश्य से समय मांगा है, तो ऐसा किया जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य टालमटोल की रणनीति अपना रहा है.

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कोर्ट ने कहा कि हलफनामे से ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार मुआवजा देने के प्रति गंभीर नहीं है. कोर्ट ने राज्य सरकार को इस तरह का हलफनामा दाखिल करने और अधिकारी को दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए फटकार लगाई है.

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर महाराष्ट्र सरकार आवेदक को देय मुआवजे की पुनर्गणना नहीं करती है, तो वह राज्य में हाल ही में शुरू की गई लाडली बहन योजना को रोक देगी. कोर्ट ने कहा कि कानून का पालन करना और मुआवजे के भुगतान के उचित निष्कर्ष पर पहुंचना राज्य सरकार का कर्तव्य है.

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