दिल्ली में प्रदर्शन के बीच CAPF की अतिरिक्त तैनाती, दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान CAPF की बड़े पैमाने पर तैनाती और बार-बार किए गए विस्तार को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. याचिका में 301 कंपनियों की शुरुआती मंजूरी और बाद में 273 तथा 270 कंपनियों की तैनाती बढ़ाए जाने का हवाला दिया गया है.

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 CAPF की अतिरिक्त तैनाती को पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने दिल्ली हाईकोर्ट में दी चुनौती. (Photo: ITG) CAPF की अतिरिक्त तैनाती को पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने दिल्ली हाईकोर्ट में दी चुनौती. (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:45 PM IST

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से संबंधित कानून-व्यवस्था के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की बड़े पैमाने पर तैनाती और उसके बार-बार किए गए विस्तार को चुनौती देते हुए पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में इस तैनाती के कानूनी और प्रशासनिक आधार की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है.

याचिका में उन रिपोर्टों का हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार शुरू में CAPF की 301 कंपनियों की मंजूरी दी गई थी. इनमें से 273 कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई. इसके बाद 270 कंपनियों की तैनाती 16 नवंबर 2026 तक बढ़ाने का आदेश दिया गया.

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याचिका में कहा गया है कि CAPF की इस तरह बड़े पैमाने पर तैनाती और उसके बार-बार किए गए विस्तार से संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 से जुड़े सवाल उठते हैं. याचिका में तैनाती की जरूरत, उसकी अवधि, अनुपातिकता और समय-समय पर समीक्षा किए जाने के आधार की न्यायिक जांच की मांग की गई है. याचिका में यह भी कहा गया है कि CAPF की तैनाती का आदेश अपने आप में शांतिपूर्ण सभा को तितर-बितर करने, किसी व्यक्ति को केवल प्रदर्शन में शामिल होने के कारण हिरासत में लेने या बल प्रयोग करने की असीमित अनुमति नहीं दे सकता. किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई के लिए जरूरत, अनुपातिकता और जवाबदेही से जुड़ी संवैधानिक शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा.

गृह मंत्रालय के आदेश और पुलिस की मांग का ब्योरा मांगा

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आशीष जोशी ने याचिका में गृह मंत्रालय के मूल आदेशों, दिल्ली पुलिस की ओर से की गई मांग और तैनाती से जुड़े जोखिम आकलन का ब्योरा दिए जाने की मांग की है. इसके अलावा CAPF की स्वीकृत संख्या, दिल्ली में भेजे गए जवानों की संख्या और प्रदर्शन से संबंधित ड्यूटी में लगाए गए जवानों का विवरण भी मांगा गया है. याचिका में CAPF की तैनाती का आतंकवाद-रोधी अभियानों, सीमा सुरक्षा, चुनावी तैयारियों और आपदा प्रबंधन जैसे अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का आकलन करने की भी मांग की गई है.

तैनाती के लिए लिखित प्रोटोकॉल बनाने की मांग

याचिका में विरोध प्रदर्शनों से संबंधित CAPF की बड़े स्तर पर तैनाती के लिए एक लिखित प्रोटोकॉल बनाने की मांग की गई है. साथ ही कहा गया है कि 16 नवंबर के बाद CAPF की तैनाती को आगे जारी रखने या बढ़ाने का फैसला मौजूदा स्थिति और जरूरत के आकलन के आधार पर लिखित और कारणयुक्त आदेश के जरिए ही किया जाए.यह याचिका वकील अंबुज दीक्षित और अमरीश रंजन पांडे के जरिए दाखिल की गई है. आशीष जोशी ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर भी याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी दी.

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