कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा,क्या CNG वाहनों से भी होता है प्रदूषण

एक सर्वे के अनुसार दिल्ली में प्रदूषण के बड़े कारणों में वाहनों में इस्तेमाल होने वाले डीजल-पेट्रोल को सबसे बड़ा कारण बताया गया है. एनजीटी के आदेश के बाद पहले ही 15 साल पुरानी गाड़ियों को राजधानी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है. लेकिन पेट्रोल और डीजल के इस्तेमाल के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सीएनजी वाहनों से भी प्रदूषण में वृद्धि होती है.

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दिल्ली हाई कोर्ट (फोटो-आजतक) दिल्ली हाई कोर्ट (फोटो-आजतक)

पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 12:12 AM IST

एक सर्वे के अनुसार दिल्ली में प्रदूषण के बड़े कारणों में वाहनों में इस्तेमाल होने वाले डीजल पेट्रोल को सबसे बड़ा कारण बताया गया है. एनजीटी के आदेश के बाद पहले ही 15 साल पुरानी गाड़ियों को राजधानी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है. लेकिन पेट्रोल और डीजल के इस्तेमाल के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सीएनजी वाहनों से भी प्रदूषण में वृद्धि होती है.

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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीएनजी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार से रिपोर्ट मांगी है. दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि क्या सीएनजी वाहनों से भी प्रदूषण में वृद्धि होती है. कोर्ट ने सरकार से इसपर अपनी विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है. साथ ही अन्य वाहनों से भी होने वाले प्रदूषण के बारे में भी चार हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस राजेन्द्र मेनन और जस्टिस अनूप जयराम भांभानी की पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा है कि वह रिपोर्ट दाखिल कर बताये कि किस वाहन से कितना प्रदूषण होता है और उसे दूर करने के लिये क्या कदम उठाये गये हैं. कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण के लिये सबसे ज्यादा कौन से ईधन जिम्मेवार है. यानी दिल्ली सरकार को अपनी रिपोर्ट में वाहनों से होने वाले प्रदूषण के कारणों का खुलासा करने के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि अब तक उन्हें रोकने के सरकार द्वारा क्या क्या प्रयास किए गए हैं.

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दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से यह निर्देश, लगाई गई याचिका पर सुनवाई के दौरान आई हैं. दरअसल कैंपेन फॉर पीपल पार्टिसिपेशन इन डेवलपमेंट प्लानिंग नाम की संस्था ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी कि मोटर वाहन कानून, 1988 के लागू नहीं किये जाने की वजह से वाहनों से होने वाले प्रदूषण में लगातार वृद्धि हुई है.

यह याचिका 2016 में उस वक्त दाखिल की गई थी जब दिल्ली में इवन ओड की स्कीम दिल्ली सरकार ने राजधानी में लागू की थी. कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को करेगा.

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