EXCLUSIVE: आरोपी ने पूर्व RAW चीफ को बताया अंकल, करोड़ों की ठगी... अडानी रियल्टी मैनेजर युवराज हत्याकांड में नया खुलासा

युवराज हत्याकांड की जांच के बीच एक पुरानी FIR सामने आई है. इसमें पूर्व RAW चीफ को अंकल बताने, फर्जी सरकारी नोटिस भेजने और करोड़ों रुपये की ठगी के आरोप लगाए गए हैं. अब पुलिस इस मामले की कड़ियों को युवराज हत्याकांड की जांच से जोड़कर देख रही है.

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युवराज मर्डर केस में फर्जी सरकारी नोटिस भेजकर की गई थी ठगी. (File Photo: India Today) युवराज मर्डर केस में फर्जी सरकारी नोटिस भेजकर की गई थी ठगी. (File Photo: India Today)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:40 PM IST

अडानी रियल्टी के मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में आजतक के पास एक एक्सक्लूसिव FIR है. इसमें आरोप है कि अन्या वत्स ने रिटायर्ड RAW चीफ सामंत गोयल को अपना अंकल बताया था. शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसने अनिल गुप्ता को अपना लोकल गार्जियन बताया, जो ज्वाइंट सेक्रेटरी हैं. इन कथित संपर्कों का नाम लेकर शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाए जाने का आरोप है कि सरकारी एजेंसियों से जुड़ी कार्रवाई खत्म कराई जा सकती है.

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यह FIR 16 अगस्त 2026 को दर्ज हुई थी. यानी युवराज की मौत की पुष्टि से करीब एक महीने पहले ही अन्या वत्स और संयम सचदेव के खिलाफ धोखाधड़ी का एक अलग मामला दर्ज हो चुका था. FIR में BNS की धारा 318(4) और 61(2) लगाई गई हैं.

शिकायतकर्ता का आरोप है कि अन्या वत्स खुद को गृह मंत्रालय, NIA, ED और RAW जैसी एजेंसियों के बड़े अधिकारियों तक पहुंच रखने वाली बताती थीं. इसी  पहचान के सहारे शिकायतकर्ता को यह भरोसा दिलाने का आरोप है कि उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई को रुकवाया या खत्म कराया जा सकता है.

शिकायत के मुताबिक, WhatsApp के जरिए कुछ फर्जी सरकारी नोटिस भेजे गए. इससे शिकायतकर्ता को लगा कि उसके खिलाफ ED की जांच चल रही है. इसके बाद सरकारी पेनल्टी और सेटलमेंट फीस के नाम पर रकम मांगे जाने का आरोप है.

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सवा करोड़ रुपये लेने का आरोप

शिकायतकर्ता के मुताबिक, अक्टूबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच करीब 1.25 करोड़ रुपये अन्या वत्स के HDFC बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए गए. आरोप है कि यह रकम सरकारी पेनल्टी और सेटलमेंट फीस के नाम पर ली गई. शिकायत में 29 नवंबर 2024 की एक घटना का भी जिक्र है. आरोप है कि उस दिन सभी मामले बंद होने की बात कही गई. इसके बाद 96,89,700 रुपये मांगे गए. 1 लाख रुपये अलग से लेने का भी आरोप है.

फिर 4 अगस्त 2025 को कहा गया कि शिकायतकर्ता की ओर से सरकारी एजेंसियों को 13.85 करोड़ रुपये दिए गए हैं. इसके बाद रकम वापस मांगने का आरोप है. शिकायतकर्ता का दावा है कि उस पर कुल 26 करोड़ रुपये बकाया होने की बात भी कही गई.

पैसे मांगने के साथ धमकी का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रकम वापस करने के लिए धमकी भरे संदेश भेजे गए. दावा है कि उसे और उसके परिवार को भी परिणाम भुगतने की बात कही गई. संयम सचदेव का नाम भी इसी FIR में है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि वह उस समूह का हिस्सा था, जिसने कथित तौर पर फर्जी सरकारी संदेशों का इस्तेमाल किया. अधिकारियों और एजेंसियों की पहचान का सहारा लेकर पैसों की मांग को असली दिखाने की कोशिश किए जाने का आरोप है.

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अब युवराज हत्याकांड की जांच से कैसे जुड़ी यह FIR?

युवराज 6 सितंबर को अपनी बहन के साथ दिल्ली के लाजपत नगर में शादी की खरीदारी करने गए थे. शाम करीब 4 बजे उन्होंने परिवार को बताया कि गुरुग्राम में एक मीटिंग है. इसके बाद वह गुरुग्राम चले गए. पुलिस की जांच के मुताबिक, वहां उनकी मुलाकात पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स से हुई. दोनों एक मॉल के बाहर मिले. युवराज अपनी कार से उतरकर अन्या की कार में बैठे. इसके बाद पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद होने की बात सामने आई.

कहासुनी के बाद दो गोलियां मारने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारी गईं. पूछताछ में अन्या वत्स ने युवराज को गोली मारने की बात कही है. हालांकि, यह बयान जांच का हिस्सा है और पुलिस दूसरे सबूतों से इसकी पुष्टि कर रही है. हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई. रिपोर्ट के मुताबिक, युवराज का शव कुछ समय तक कार में रखा गया. बाद में उसे गुरुग्राम के सेक्टर-70 के एक नाले में फेंक दिया गया.

उत्तराखंड में पकड़े गए दोनों आरोपी

जांच के मुताबिक, इसके बाद अन्या वत्स और संयम सचदेव उत्तराखंड चले गए. पुलिस को उनकी लोकेशन वहीं मिली. इसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया.

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इधर युवराज के घर नहीं लौटने पर उनकी बहन ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड और दूसरे सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई. नाले से मिले शव की तस्वीर परिवार को दिखाई गई, जिसके बाद युवराज की पहचान हुई. अब पुलिस युवराज और अन्या के पुराने कामकाजी संबंध, बैंक लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और दूसरे सबूतों की जांच कर रही है. साथ ही 16 अगस्त को दर्ज पुरानी FIR का युवराज हत्याकांड से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.
 

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