छत्तीसगढ़ की दुर्ग केंद्रीय जेल में शारदीय नवरात्र के दौरान आस्था की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है. यहां सलाखों के पीछे सजा काट रहे 362 बंदियों ने माता की भक्ति में उपवास रखा है. इनमें 332 पुरुष और 30 महिला बंदी शामिल हैं. कोई नौ दिनों का व्रत कर रहा है तो कुछ बंदियों ने तीन दिन तक उपवास रखने का संकल्प लिया है. जेल परिसर में कलश स्थापना, सुबह-शाम आरती और भजन-कीर्तन के बीच भक्तिमय माहौल बना हुआ है.
नवरात्र के दौरान जेल में बंद बंदी ढोलक, झांझ और मंजीरे की धुन पर छत्तीसगढ़ी जसगीत गाकर माता की आराधना कर रहे हैं. सुबह से ही परिसर में धूप-कपूर की सुगंध और देवी के जयकारे सुनाई देते हैं. बंदियों ने जेल के भीतर माता की प्रतिमा स्थापित की है. पुरुष बंदियों के साथ महिला बंदी भी पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो रही हैं.
इस धार्मिक आयोजन के जरिए जेल की चारदीवारी के भीतर आस्था और सकारात्मकता का माहौल तैयार हुआ है. नवरात्र में बंदियों की भागीदारी उनके मानसिक और भावनात्मक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. धार्मिक गतिविधियों से तनाव कम करने और बेहतर जीवन की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. यह आयोजन सजा काट रहे लोगों के जीवन में आत्मचिंतन और सुधार की उम्मीद भी जगाता है.
नौ दिन का व्रत, सुबह-शाम आरती और माता के जसगीत
दुर्ग केंद्रीय जेल के अधीक्षक मनीष संभाकर ने बताया कि जेल में नवरात्र का पर्व पूरी आस्था के साथ मनाया जा रहा है. बंदी भाई-बहन श्रद्धापूर्वक उपवास रख रहे हैं. कुछ लोग नौ दिन का व्रत कर रहे हैं, जबकि कुछ ने तीन दिन तक उपवास रखने का निर्णय लिया है. इस साल कुल 362 बंदियों ने व्रत रखा है, जिनमें 332 पुरुष और 30 महिलाएं शामिल हैं.
जेल अधीक्षक मनीष संभाकर के मुताबिक, बंदियों ने जेल के अंदर माता की प्रतिमा स्थापित की है. यहां सुबह और शाम आरती की जाती है. पुरुष बंदियों की ओर से माता की सेवा में जसगीत और भजन गाए जाते हैं. महिला बंदियों के परिसर में भी इसी तरह पूजा-पाठ और आराधना की जा रही है. इन गतिविधियों में बंदी पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा ले रहे हैं.
नवरात्र के इन नौ दिनों में जेल परिसर में धार्मिक गीतों और माता के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है. ढोलक और मंजीरे की धुन पर गाए जाने वाले पारंपरिक जसगीत इस आयोजन को खास बना रहे हैं. अपराध के मामलों में सजा काट रहे बंदियों के बीच यह धार्मिक गतिविधि आत्मिक शांति और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का माध्यम बन रही है.
व्रत रखने वालों के लिए फलाहार की व्यवस्था
जेल प्रशासन ने उपवास रखने वाले बंदियों के लिए फलाहार की व्यवस्था भी की है. जेल अधीक्षक मनीष संभाकर ने बताया कि व्रत करने वाले पुरुष और महिला बंदियों को फल, दूध, साबूदाना, मूंगफली और शक्कर उपलब्ध कराई जा रही है. इसका उद्देश्य उपवास के दौरान उनकी खान-पान संबंधी जरूरतों का ध्यान रखना है.
नवरात्र के दौरान बंदियों को धार्मिक नियमों के अनुसार पूजा-पाठ करने का अवसर दिया जा रहा है. सामूहिक आरती, भजन और जसगीत के जरिए जेल के भीतर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है. प्रशासन की ओर से बंदियों की आस्था का सम्मान करते हुए इस आयोजन में सहयोग किया जा रहा है.
जेल में इस तरह के धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच से भी जुड़े हैं. सामूहिक भक्ति से तनाव कम करने, मन को शांत रखने और आत्मचिंतन का अवसर मिलता है. दुर्ग केंद्रीय जेल में नवरात्र के दौरान दिखाई दे रही यह तस्वीर बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था लोगों को उम्मीद और बेहतर जीवन की प्रेरणा दे सकती है.
रघुनंदन पंडा