शिकारियों ने टाइगर को मारा, फिर पूरी खाल उतार ली... अफसरों को पता चला तो ग्राहक बनकर पहुंच गए, तस्करों का खेल खत्म

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. मध्य प्रदेश वाइल्ड क्राइम ब्यूरो की सूचना पर वन विभाग ने खरीदार बनकर जाल बिछाया और तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों के पास से बाघ की खाल, पैंगोलिन के शेल और शिकार में इस्तेमाल होने वाले हथियार बरामद किए गए हैं.

Advertisement
करीब 6 महीने पुरानी है बाघ की खाल. (Photo: Screengrab) करीब 6 महीने पुरानी है बाघ की खाल. (Photo: Screengrab)

सुमित सिंह

  • अंबिकापुर,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:14 PM IST

जंगल से निकला बाघ... कुछ महीनों बाद उसकी खाल तस्करों के हाथ में थी. अब बारी थी उसे ऊंची कीमत पर बेचने की. खरीदार की तलाश पूरी हो चुकी थी. मिलने का वक्त भी तय था. लेकिन तस्करों को यह नहीं पता था कि जिस ग्राहक से वे सौदा करने जा रहे हैं, वह असली खरीदार नहीं, बल्कि वन विभाग की टीम है.

यहीं से पूरी कहानी का पर्दाफाश हुआ. मामला छत्तीसगढ़ के सूरजपुर का है, जहां वन विभाग ने मध्य प्रदेश वाइल्ड क्राइम ब्यूरो की सूचना पर कार्रवाई करते हुए तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है. विभाग को सूचना मिली थी कि इलाके में बाघ की खाल और दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों का सौदा होने वाला है. इसके बाद वन विभाग ने दो टीमों का गठन किया. प्लानिंग ऐसी बनाई गई कि टीम के कुछ सदस्य खुद खरीदार बनकर तस्करों के संपर्क में पहुंचे.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 8000 फीट की ऊंचाई पर रहने वाले हिरण का शिकार... मांस पकाने की तैयारी में थे आरोपी, 14 गिरफ्तार

जैसे ही सौदा तय हुआ और तस्कर कथित तौर पर बाघ की खाल लेकर पहुंचे, वन विभाग की टीम ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया. तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से बाघ की खाल, दुर्लभ पैंगोलिन के शेल और शिकार में इस्तेमाल होने वाले हथियार बरामद किए गए. अधिकारियों के मुताबिक, बरामद बाघ की खाल करीब 5 से 6 महीने पुरानी है. आशंका है कि इसे ऊंची कीमत पर बेचने की तैयारी थी.

वन विभाग का कहना है कि इसके पीछे वन्यजीव तस्करी का बड़ा नेटवर्क हो सकता है. अब जांच इस बात की हो रही है कि बाघ का शिकार कहां हुआ, खाल किन रास्तों से यहां तक पहुंची और इसे आखिर किसे बेचा जाना था. साथ ही तस्करों के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि पूरे सिंडिकेट तक पहुंचा जा सके.

Advertisement

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश वाइल्ड क्राइम ब्यूरो और स्थानीय वन विभाग के संयुक्त अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है. उनका दावा है कि क्षेत्र में वन्यजीवों के शिकार और तस्करी पर रोक लगाने के लिए आगे भी इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे. बाघ और पैंगोलिन जैसे वन्यजीव भारत में कानूनी संरक्षण प्राप्त प्रजातियां हैं. इनके शिकार, अंगों की खरीद-फरोख्त या तस्करी से जुड़े मामलों में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »