देशभर में आज दिवाली को धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस मौके पर बस्तर के उस इलाके में दिवाली मनाई गई है, जहां पहले कभी नक्सलियों के बंदूकों की गूंज और खौफ का माहौल रहा है.
बस्तर के हिड़मा के एक गांव पूवर्ती के अंदर सुरक्षाबलों ने दिवाली मनाई. साथ ही सुरक्षाबलों ने नक्सलमुक्त भारत का संदेश दिया. सुरक्षाबालों ने इस मौके पर बच्चों के साथ दिये जलाए, साथ ही पटाखे और फुलझड़ियां भी जलाई.
सुरक्षा बलों का संदेश है कि बस्तर में अब बंदूक नहीं, विश्वास; हिंसा नहीं, विकास और खुशहाली की नई शुरुआत. सुरक्षाबलों के साथ सुकमा पुलिस और ग्रामीण ने भी मिलकर का दिवाली का सेलिब्रेशन किया है.
कभी यहां था नक्सलियों का खौफ
खूंखार नक्सली कमांडर रहे हिड़मा के गांव पूवर्ती में इस बार दिवाली के जश्न में बच्चे भी शामिल रहे. कभी पूवर्ती की पहचान नक्सलियों का खौफ और बंदूकों की गूंज उनकी पहचान थी. अब यहां दीपों की रोशनी और खुशियों का पूरा माहौल है.
स्थानीय लोग बच्चे भी शामिल रहे
नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त होने के बाद पहली बार गांव में उत्साह और उमंग के साथ दिवाली का आयोजन किया गया है. साथ ही बच्चों और स्थानीय लोग भी आयोजन के दौरान खुश नजर आए.
आत्मसमर्पित नक्सली भी शामिल रहे
सुकमा पुलिस की सामुदायिक पहल 'निवा दुवड़ ते' के तहत विशेष दीपोत्सव आयोजित किया गया. पुलिस, DRG के जवान, ग्रामीण, महिलाएं, बच्चे और आत्मसमर्पित नक्सली भी एक साथ शामिल हुए हैं.
स्थानीय लोगों को गिफ्ट भी दिए
दिवाली आयोजन के दौरान गांव की महिलाओं को साड़ियां, पुरुषों को लुंगी और बच्चों को मिठाई के पैकेट बांटे गए. बच्चों के मनोरंजन के लिए मिकी माउस झूला लगाया गया और शाम को हुई आतिशबाजी का भी आयोजन किया गया.
SDOP प्रभात पटेल और थाना प्रभारी परशुराम पैकरा ने ग्रामीणों से बातचीत की और सुरक्षा और विकास का पूरा भरोसा दिलाया.
जितेंद्र बहादुर सिंह