रात में कमरे की रोशनी दिल पर डाल रही असर, बढ़ सकता है हार्ट फेलियर का खतरा, जानें कैसे

यूरोपियन हार्ट जर्नल में छपी स्टडी बताती है कि रात में आपके कमरे में कितनी रोशनी है इसका असर हार्ट की सेहत पर पड़ता है. इससे हार्ट का साइज बढ़ सकता है और हार्ट फेल्यिर का रिस्क भी होता है.

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रोशनी में सोने से हार्ट पर असर रोशनी में सोने से हार्ट पर असर

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:51 PM IST

रात में रोशनी में सोने का असर हार्ट के साइज पर पड़ सकता है. ये सुनने में भल ही अजीब लग रहा हो, लेकिन ये दावा वैज्ञानिकों ने अपनी एक रिसर्च के आधार पर किया है. 10 हजार लोगों के स्लीप पैटर्न पर की गई इस रिसर्च को यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित किया गया है. रिसर्च में बताया गया है कि जो लोग लगभग अंधेरे में सोते थे, उनकी तुलना में जो लोग थोड़ी सी भी रोशनी में सोते थे ,तो उनके दिल के चैंबर बड़े और दीवारें मोटी होने की संभावना ज्यादा थी. ये हार्ट फेल्यिर का भी कारण बन सकता है. 

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इस रिसर्च में सबसे ज़्यादा रोशनी के संपर्क में रहने वाले ग्रुप के लोगों को हर रात औसतन लगभग 34 मिनट तक 3 लक्स (Lux) की रोशनी में रखा गया. ये रोशनी बहुत कम होती है, जो लगभग एक तेज चांदनी या बहुत हल्की डिम लाइट के बराबर होती है. यूरोपियन हार्ट जर्नल' में छपे नए नतीजों के अनुसार, इतनी हल्की रोशनी भी दिल पर असर डाल सकती है. जो लोग रात में इतनी रोशनी में सबसे ज़्यादा समय तक सोए, उनके दिल की दीवारें उन लोगों के मुकाबले 1.5 % ज़्यादा मोटी थीं जो लगभग अंधेरे में सोए थे. उनके दिल के बाएं वेंट्रिकलका साइज़ भी 2.4 % अधिक था और दिल के सिकुड़ने की क्षमता 1.9 % कम थी.

हार्ट फेलियर की नौबत आ सकती है

अमेरिका की टुलेन यूनिवर्सिटी के महामारी-विज्ञानी लू ची कहते हैं कि यह अपनी तरह की पहली स्टडी है और इससे पता चलता है कि रात में अधिक रोशनी के संपर्क में रहने का संबंध दिल की बनावट में बदलाव से है.  इसमें दिल की बनावट और काम करने के तरीके में बदलाव आता है,और आम तौर पर ऐसा लंबे समय तक मानसिक तनाव के कारण होता है. इससे दिल कमजोर हो सकता है और हार्ट फेलियर की नौबत आ सकती है. 

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हार्ट फेल्यिर का रिस्क 20 फीसदी तक बढ़ गया

रिसर्च में बताया गया है कि रोशनी में सोने वाले लोगों में 8 से 10 वर्षों के दौरान हार्ट फेलियर का रिस्क 29 प्रतिशत, एट्रियल फाइब्रिलेशन का जोखिम 15 %, मायोकार्डियल इन्फार्क्शन का जोखिम 24 %, हालांकि दिन के समय तेज रोशनी में सोने से  कार्डियोवैस्कुलर मौत से कोई खास संबंध नहीं मिला था.

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रोशनी में सोने से हार्ट पर कैसे पड़ता है असर

बीएमजे जर्नल कि इस रिसर्च में बताया गया है कि रात में लाइट जलाकर या रोशनी में सोने से हार्ट के फंक्शन पर असर होता है. जिसे कार्डिएक रीमॉडलिंग कहा जाता है. रात में रोशनी जैसे मोबाइल स्क्रीन, नाइट लैंप या स्ट्रीट लाइट आंखों के जरिए दिमाग तक पहुंचती है, जिससे शरीर की आंतरिक सर्कैडियन रिदम बिगड़ जाती है. रोशनी के कारण दिमाग पूरी तरह से रिलैक्स नहीं हो पाता, जिससे सोते समय भी हार्ट रेट बढ़ सकता है. इन सबका सीधा असर हार्ट पर होता है. 
 

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