हर तीन में से एक महिला को ऑस्टियोपोरोसिस से हड्डी टूटने का खतरा, कैसे करें इस बीमारी से बचाव

50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में लगभग एक-तिहाई को ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डी टूटने का खतरा रहता है. मेनोपॉज के बाद हार्मोन में कमी, विटामिन डी की कमी, कम वजन और अन्य कारण इस बीमारी को बढ़ावा देते हैं.

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ऑस्टियोपोरोसिस से हड्डी टूटने का खतरा ऑस्टियोपोरोसिस से हड्डी टूटने का खतरा

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:45 PM IST

50 साल से अधिक उम्र की लगभग हर तीन में से एक महिला को ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डी टूटने का खतरा रहता है. इसके बावजूद, डॉक्टरों का कहना है कि भारत में हड्डियों की मजबूती की जांच बहुत कम कराई जाती है. बढ़ती उम्र में भी लोग इसका टेस्ट कराने से बचते हैं, जब किसी इंजरी में हड्डी टूट जाती है तब इलाज के लिए आते हैं, लेकिन इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है. 

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डॉक्टर बताते हैं कि महिलाओं में मेनोपॉज के बाद स्ट्रोजन हार्मोन का लेवल गिरने लगता है, जिससे हड्डियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं. इससे ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है जिससे हड्डी टूटने का खतरा काफी बढ़ जाता है. कम वजन, विटामिन डी की कमी, कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल और अन्य बीमारियां भी इस रिस्क को बढ़ा सकती हैं. इसलिए बचाव पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है.

धूप वाले देश में भी विटामिन डी की कमी

बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के आर्थ्रोस्कोपी एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन सेंटर के प्रिंसिपल डायरेक्टर और विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक चौधरी बताते हैं कि हड्डियों के कमजोर होने के पीछे सिर्फ मेनोपॉज ही जिम्मेदार नहीं है. वह कहते हैं कि भारत में भरपूर धूप होने के बावजूद विटामिन डी की कमी आम है. घर के अंदर ज्यादा समय बिताना, सीधे धूप में कम निकलना, वायु प्रदूषण विटामिन डी की कमी इसके प्रमुख कारण हैं.अगर शरीर में विटामिन डी कम है तो भी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा रहता है. लेकिन अधिकतर मामलों में महिलाओं को इस बीमारी का देरी से ही पता चलता है. 

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गिरने के बाद ही क्यों पता चलती है बीमारी?

ऑस्टियोपोरोसिस का समय पर पता नहीं चलने की एक बड़ी वजह इसके शुरुआती लक्षणों का दिखाई नहीं देना है. ऑस्टियोपोरोसिस में आमतौर पर कोई चेतावनी देने वाला लक्षण नहीं होता. हड्डियां कमजोर होने पर न दर्द होता है, न सूजन और न ही महिला को कुछ ऐसा महसूस होता है, जिससे उसे बीमारी का अंदाजा लग सके. इसलिए उसे डॉक्टर के पास जाने की जरूरत महसूस नहीं होती.

हड्डियों की जांच क्यों नहीं कराई जाती?

महिलाओं को हड्डियों की जांच कब करानी चाहिए और ऐसा कम क्यों होता है? इस सवाल पर डॉक्टर कहते हैं कि जांच का सही समय महिला की उम्र और उसके रिस्क पर निर्भर करता है.ज्यादातर महिलाओं को मेनोपॉज के आसपास हड्डियों की मजबूती के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए. अगर किसी महिला को समय से पहले मेनोपॉज हुआ है, परिवार में किसी को हड्डी टूटने की समस्या रही है, विटामिन डी की कमी है, लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं ले रही है, थायरॉइड की समस्या है या वजन कम है, तो उसे पहले भी जांच की जरूरत पड़ सकती है.

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कैसे करें इस बीमारी से बचाव

डॉक्टरों का कहना है कि हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए घंटों जिम में बिताना जरूरी नहीं है।.नियमित रूप से थोड़ी शारीरिक गतिविधि भी मददगार हो सकती हैयतेज कदमों से चलना, सीढ़ियां चढ़ना, डांस करना, हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वजन उठाने वाले व्यायाम हड्डियों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.
 

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