मणिपुर में डेंगू-HFMD के खतरे के बीच अलर्ट मोड में प्रशासन, चुराचांदपुर में बढ़ाई गई निगरानी, डॉक्टर तैनात

चुराचांदपुर में बुखार और संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है. स्कूलों में जागरूकता अभियान से लेकर मच्छरों के ठिकाने खत्म करने तक, प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारियां तेज कर दी हैं.

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डेंगू और HFMD के बढ़ते मामलों के बीच प्रशासन संवेदनशील इलाकों  में सुरक्षा इंतजाम तेज कर दिए हैं.(Photo-ITG) डेंगू और HFMD के बढ़ते मामलों के बीच प्रशासन संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा इंतजाम तेज कर दिए हैं.(Photo-ITG)

बेबी शिरीन

  • इंफाल,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:59 PM IST

बदलते मौसम के साथ इस समय मणिपुर में डेंगू के संदिग्ध मामले बढ़ रहे हैं. साथ ही टाइफाइड के केस भी सामने आ रहे हैं. इसी वजह से बच्चों में हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज (HFMD) की चिंता को लेकर प्रशासन काफी सतर्क हो चुका है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी की पहचान और समय पर इलाज के लिए निगरानी बढ़ा दी है. स्कूलों और गांवों में जागरूकता अभियान भी शुरू किया गया है.

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इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए डिप्टी कमिश्नर कृष्ण कुमार ने तुइबोंग स्थित मिनी सचिवालय में इमरजेंसी बैठक बुलाई. इसमें स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ डॉक्टर भी शामिल हुए. बैठक में बीमारियों की स्थिति, रोकथाम और अस्पतालों की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई.

स्कूलों में पहुंचेंगी स्वास्थ्य टीमें

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पी. हेनखोनेंग माते ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की 10 टीमें स्कूलों में जाकर छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को डेंगू और HFMD के लक्षण के बारे में बताएंगी. इन बीमारियों से बचाव की जानकारी देंगी.  HFMD को लेकर खास तौर पर बच्चों पर नजर रखी जा रही है.

अधिकारियों के मुताबिक, इसका असर खास तौर पर छोटे बच्चों (5 साल तक की उम्र के बच्चों) में देखा जा सकता है. जिसमें बुखार, त्वचा पर दाने और छाले जैसे लक्षण हो सकते हैं.  प्रभावित बच्चों को लक्षण के आधार पर इलाज दिया जा रहा है और अब तक किसी मौत की सूचना नहीं है.

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मच्छरों की रोकथाम के मिले आदेश

डेंगू को रोकने के लिए प्रशासन ने घरों के आसपास 50 से 100 मीटर के दायरे में मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने के निर्देश दिए हैं. राज्य सरकार ने चुराचांदपुर के लिए कीटनाशक और फॉगिंग मशीनें भी भेजी हैं. संवेदनशील इलाकों में फॉगिंग और साफ-सफाई का काम तेज किया गया है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों की हालत के हिसाब से इलाज की व्यवस्था तैयार है.

यह भी पढ़ें: क्या हर बुखार में डेंगू या स्वाइन फ्लू का टेस्ट करवाना चाहिए? AIIMS के डॉक्टर ने बताया कब है जरूरी

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. सानिया मोनिका ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, आराम करने और लगातार बुखार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेने की अपील की है. उन्होंने बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां और खासकर एंटीबायोटिक लेने से बचने को कहा है. 

TB की जांच तेज करने पर जोर

इसी बीच जिले में टीबी उन्मूलन अभियान की भी समीक्षा की गई. अधिकारियों के मुताबिक लक्ष्य वाले कुल 1,42,136 लोगों में से अभी तक 22,732 लोगों की जांच हुई है. वहीं, हाई-रिस्क ग्रुप में शामिल 1,10,008  लोगों में से 21,749 की जांच की गई है. इसके साथ ही अब तक 4138 लोगों की टीबी जांच से गुजरे, जिनमें 641 मामलों की पुष्टि हुई है.

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अधिकारियों ने स्कूलों, युवा संगठनों और NCC के जरिए टीबी जागरूकता बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच कराने पर जोर दिया. डिप्टी कमिश्नर ने स्वास्थ्य विभाग को एक हेल्पलाइन और विशेषज्ञों की टीम वाला विशेष सेल बनाने का निर्देश दिया है. फिलहाल प्रशासन का लक्ष्य यही है कि बीमारी फैलने का इंतजार करने के बजाय पहले ही उसकी पहचान हो, जिससे बचाव के कदम उठाएं जाएं.

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