हंतावायरस, कोरोना से 20 गुना अधिक जानलेवा! डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने बताया, क्या बन सकता है नई महामारी?

क्रूज शिप पर एंडीज हंतावायरस (Andes Hantavirus) की दस्तक देते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है. पूर्व WHO वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का इस बारे में क्या कहना है, इस बारे में आर्टिकल में जानेंगे.

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हंतावायरस के कारण दुनिया भर की हेल्थ एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. (Photo: AI Generated) हंतावायरस के कारण दुनिया भर की हेल्थ एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. (Photo: AI Generated)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:58 PM IST

दुनिया अभी कोरोना की बुरी यादों से उभरी ही थी कि एक नए वायरस 'एंडीज हंतावायरस' ने फिर से दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं. क्रूज शिप पर इस वायरस के फैलने और इससे हुई मौतों की खबर ने ग्लोबल हेल्थ एक्सपर्ट्स को अलर्ट मोड पर डाल दिया है. हालांकि, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की पूर्व वैज्ञानिक और आईसीएमआर की डायरेक्ट जनरल डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने इस खतरे पर बात करते हुए कहा है कि यह कोई नई वैश्विक महामारी यानी पैनडेमिक नहीं बनने वाला. स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और इसके फैलने के तरीके कोरोना से काफी अलग हैं.

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क्या है हंतावायरस और यह कितना खतरनाक?

डॉ. स्वामीनाथन के अनुसार, हंतावायरस आमतौर पर चूहों और कुतरने वाले जीवों के द्वारा जरिए इंसानों में फैलता है. लेकिन एंडीज स्ट्रेन इसकी एक ऐसी किस्म है जो इंसान से इंसान में भी फैल सकती है. क्रूज शिप पर हुए आउटब्रेक में 11 लोग संक्रमित पाए गए हैं जिनमें से 3 की जान जा चुकी है.

इस वायरस की मृत्यु दर 20 से 40 प्रतिशत के बीच है जो इसे खतरनाक बनाती है. इस बात का ध्यान रखें कि कोरोना की मृत्यु दर 1 परसेंट से भी कम थी. 20 से 40 प्रतिशत की मृत्यु दर इसे इबोला जैसी कैटेगरी में रखती है.

पैनिक की जरूरत नहीं

डॉ. स्वामीनाथन का कहना है, क्रूज शिप को वायरस के फैलने के लिए एक आदर्श जगह माना जाता है क्योंकि वहां लोग सीमित दायरे में एक साथ रहते हैं. भले ही यह वायरस जानलेवा है लेकिन इसके फैलने की क्षमता कोरोना या इन्फ्लुएंजा के मुकाबले काफी कम है. यह केवल बहुत नजदीकी संपर्क से ही फैलता है. राहत की खबर यह है कि वायरस में अब तक कोई बड़ा म्यूटेशन नहीं देखा गया है जिससे इसके और अधिक संक्रामक होने का खतरा फिलहाल नहीं है.

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आसान शब्दों में कहें तो यह वायरस खसरे की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता इसलिए यह उतना बड़ा खतरा नहीं है. बस इसकी दिक्कत यह है कि शरीर में घुसने के बाद इसके लक्षण दिखने में 6 से 8 हफ्ते का वक्त लग जाता है इसलिए संदिग्धों को इतने समय तक निगरानी में रखना जरूरी है. फिलहाल यह एक सीमित दायरे में है और आम लोगों के लिए कोई खतरे वाली बात नहीं है. मामला पूरी तरह कंट्रोल में है.

जहाज पर सवार कुल लोगों की तुलना में बहुत कम लोग संक्रमित हुए हैं और उनमें से अधिकांश वे लोग हैं जिन्होंने केबिन शेयर किया था या लंबे समय तक एक-दूसरे के पास फिजिकल कॉन्टैक्ट में रहे थे. यह कोविड-19 की तरह तेजी से फैलने वाला संक्रमण नहीं है.

महामारी बनने का कितना जोखिम है?

सीधी बात यह है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह वायरस कोरोना की तरह महामारी नहीं बनेगा. लेकिन, वैज्ञानिकों के लिए यह एक 'अलार्म' जैसा है. यह हमें याद दिलाता है कि भले ही हम आज सुरक्षित हैं, पर हमें अगली किसी भी चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए. राहत की बात यह है कि भारत का सर्विलांस सिस्टम (निगरानी तंत्र) अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है, जो किसी भी खतरे को समय रहते पकड़ने में सक्षम है. कुल मिलाकर, पैनिक करने के बजाय अलर्ट रहना ही सही ऑप्शंस है.

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भविष्य के लिए तैयारी पूरी

डॉ. स्वामीनाथन का कहना है कि भले ही यह वायरस पैनडेमिक न बने लेकिन यह दुनिया के लिए एक वेक-अप कॉल है. यह हमें याद दिलाता है कि हेल्थ सिस्टम को हमेशा तैयार रहना चाहिए. भारत में अब सर्विलांस सिस्टम काफी मजबूत है जिससे किसी भी संदिग्ध मामले को तुरंत पकड़ा जा सकता है. फिलहाल आम जनता को घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह एक सीमित दायरे वाला आउटब्रेक है जो जल्द ही पूरी तरह कंट्रोल कर लिया जाएगा.

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