बच्चों को क्यों होती है टाइप-2 डायबिटीज, नई वजह का चला पता, ये चीज बढ़ा देती है तीन गुना खतरा

नई रिसर्च में पाया गया है कि बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज का मुख्य कारण गट माइक्रोबायोम का असंतुलन है, जिससे इस बीमारी का खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है. गट माइक्रोबायोम आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया और वायरस का ग्रुप जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करता है.

Advertisement
इस वजह से बच्चों को होती है टाइप-2  डायबिटीज इस वजह से बच्चों को होती है टाइप-2 डायबिटीज

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:02 PM IST

अब तक वैज्ञानिक और डॉक्टर मानते थे कि बच्चों में टाइप- 1 डायबिटीज फैमिली हिस्ट्री या जीन्स की वजह से होती है, लेकिन एक ताजा मेडिकल रिसर्च ने इसके होने का एक और प्रमुख कारण बताया है, जिससे बचपन में इस डायबिटीज का रिस्क तीन गुना तक बढ़ जाता है. खासबात यह है कि जो कारण बताया है वह आंतों में मौजूद बैक्टीरिया की खराबी से संबंधित है.   

Advertisement

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के आंकड़ों के अनुसार  भारत में 14 वर्ष से कम उम्र के लगभग 95,600 से 1 लाख बच्चे टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं. नई रिसर्च में बताया गया है कि गट माइक्रोबायोम' का बैलेंस खराब होने से टाइप-1 डायबिटीज का खतरा सीधे 3 गुना तक बढ़ जाता है. इस रिसर्च को 'नेचर मेटाबॉलिज़्म' में प्रकाशित किया गया है रिसर्चर्स ने पाया कि जिन बच्चों के गट माइक्रोबायोम का विकास जल्दी रुक गया, उनमें टाइप 1 डायबिटीज का ख़तरा उन बच्चों की तुलना में लगभग तीन गुना ज़्यादा था, जिनके माइक्रोबायोम का विकास जारी रहा था.

गट माइक्रोबायोम क्या है और यह क्यों जरूरी है? 

गट माइक्रोबायोम हमारी आंतों में रहने वाले  बैक्टीरिया,वायरस  का एक ग्रुप है जो शरीर में खुद न पचने वाले फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट को पचाने में मदद करता है.यह विटामिन K और कुछ बी-विटामिन (B Vitamins) को भी बनाता है. ये शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे शरीर की लगभग 70% इम्यूनिटी हमारे पेट में ही तय होती है. जब बच्चा पैदा होता है और बड़ा होता है, तो ये बैक्टीरिया उसके इम्यून सिस्टम को ट्रेनिंग देते हैं कि बाहर से आने वाले वायरस-बैक्टीरिया से कैसे लड़ना है और शरीर के अपने अंगों की रक्षा कैसे करनी है.लेकिन अगर किसी वजह से अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाएं और हानिकारक बैक्टीरिया बढ़ जाएं, तो इम्यून सिस्टम की यह पूरी ट्रेनिंग गड़बड़ा जाती है. इससे टाइप- 2 डायबिटीज का रिस्क भी बढ़ जाता है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: डायबिटीज से बचना है तो सिर्फ रोज टहलना काफी नहीं! ये एक्सरसाइज भी जरूरी, रिसर्च में दावा

गट माइक्रोबायोम बिगड़ने से कैसी हो जाती है टाइप-2 डायबिटीज

रिसर्च में बताया गया है कि  जब अच्छे बैक्टीरिया घटते हैं, तो आंतों की अंदर दीवार कमजोर हो जाती है. इसे मेडिकल की भाषा में 'लीकी गट' कहते हैं. आंतों से कुछ ऐसे टॉक्सिन्स और अधूरे पचे हुए प्रोटीन्स खून में लीक होकर बाहर आ जाते हैं, जिन्हें देखकर शरीर का डिफेंस सिस्टम अलर्ट हो जाता है. यहीं इम्यून सिस्टम उन टॉक्सिन्स से लड़ने के चक्कर में कन्फ्यूज हो जाता हैऔर वह दुश्मन की पहचान भूलकर गलती से बच्चे के अपने पैंक्रियाज की 'बीटा सेल्स' को दुश्मन समझकर उन पर हमला कर देता है और उन्हें खत्म कर देता है. नतीजा यह होता है कि पैंक्रियाज से इंसुलिन बनना पूरी तरह बंद हो जाता है. जब ये नहीं बनता है तो इसस टाइप- 2 डायबिटीज हो जाती है. 

यह भी पढ़ें: डायबिटीज का पुरुषों और महिलाओं में अलग- अलग असर, होता है इन बीमारियों का भी खतरा

गट माइक्रोबायोम क्यों खराब हो रहा है? 

एंटीबायोटिक्स का बहुत ज्यादा इस्तेमाल

ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाना

नेचर से दूरी 

बचपन में मां का दूध न मिलना

Advertisement

पेरेंट्स को क्या कदम उठाने चाहिए?  

हालांकि टाइप-1 डायबिटीज के पीछे जेनेटिक्स का रोल भी होता है, लेकिन गट हेल्थ को सुधारकर इसके रिस्क को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है इसलिए बच्चों को घर का बना ताजा छाछ, इडली और मौसम के हिसाब से हरी सब्जियां खिलाएं, ये आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं. बिना डॉक्टर के एंटीबायोटिक कभी न दें.अगर बच्चा अचानक बहुत ज्यादा पानी पीने लगे, रात में बार-बार पेशाब जाने लगे, भूख लगने के बावजूद उसका वजन घटने लगे या बहुत सुस्त रहने लगे तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »