फैटी लिवर से एक नहीं कई खतरे, किसी को हार्ट अटैक तो किसी को लिवर फेलियर का रिस्क

नई रिसर्च में फैटी लिवर के पांच अलग-अलग प्रकारों की पहचान की गई है, जो अलग-अलग हेल्थ रिस्क से जुड़ा है. अध्ययन में पाया गया कि कुछ प्रकारों में हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है, जबकि कुछ में लिवर फेलियर और किडनी फेलियर का रिस्क होता है.

Advertisement
 फैटी लिवर फैटी लिवर

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

अगर आप सोचते हैं कि फैटी लिवर सिर्फ लिवर की ही बीमारी है तो ऐसा नहीं है. इस बीमारी से जूझ रहे लोगों में अलग- अलग अंगों पर इसका असर हो सकता है. लिवर क फैटी होने के भी कई कारण हो सकते हैं. नई रिसर्च में इसके बारे में बताया गया है. अमेरिका के मेयो क्लिनिक और वर्जीनिया टेक के वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है. इसको नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित किया गया है. इसमें फैटी लिवर के होने के अलग-अलग कारण और उससे होने वाली समस्याओं के बारे मे बताया गया है. 

Advertisement

इसके लिए वैज्ञानिकों ने फैटी लिवर से पीड़ित 4,600 से अधिक मरीजों की जेनेटिक जानकारी और मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया है. इसमें लिवर एंजाइम, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी बीमारियों से जुड़े आंकड़े भी शामिल किए गए हैं. रिसर्च में पाया गया है कि लिवर की बीमारी वाले कुछ लोगों में मोटापा और डायबिटीज जैसी मेटाबॉलिक समस्याएं इसके होने का कारण थीं, जबकि कुछ में जेनेटिक कारणों की वजह से ये बीमारी हुई थी. 

किसी को लिवर तो किसी को दिल की बीमारी का खतरा क्यों?

रिसर्च में बीमारी के अलग-अलग कारण के साथ ही इससे होने वाली दूसरी हेल्थ प्रॉबल्म भी अलग ही पाई गई हैं. जैसे अगर किसी को जेनेटिक कारणों से फैटी लिवर हुआ था तो उनमें लिवर खराब होने से ट्रांसप्लांट की जरूरत ज्यादा थी. वहीं, मोटापे से होने वाले फैटी लिवर में फाइब्रोसिस और अचानक किडनी फेलियर का जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया. वहीं, कुछ में हार्ट अटैक का रिस्क भी मिला. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि फैटी लिवर के हर मरीज को हार्ट अटैक या लिवर फेलियर होगा. बल्कि यह खोज बताती है कि सभी मरीजों में बीमारी का खतरा एक जैसा नहीं होता.

Advertisement

यह भी पढ़ें: Fatty Liver Grade-1 : रिपोर्ट में आया है फैटी लिवर ग्रेड1? डॉक्टर से जानें इलाज, क्या सिर्फ दवा से ठीक होगा?

क्या अब हर मरीज का इलाज अलग होगा?

शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में इस तरह की जानकारी से ज्यादा रिस्क वाले मरीजों की पहचान पहले की जा सकती है. इससे डॉक्टर तय कर सकेंगे कि किस मरीज को लिवर की पूरी जांच, फाइब्रोसिस की जांच या मेटाबॉलिक हेल्थ पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

यह भी पढ़ें: फैटी लिवर की बीमारी हार्ट अटैक का बन सकती है कारण, ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर के पास जाएं

फैटी लिवर से बचाव कैसे करें

खानपान का ध्यान रखें

रोज एक्सरसाइज करें

मैदा, चीनी कम खाएं

वजन कंट्रोल में रखें.

 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »