अगर आपके माता- पिता को डायबिटीज की बीमारी है तो क्या आपको भी होगी? इस सवाल का जवाब जानने से पहले आपको डायबिटीज के दो टाइप के बारे में समझना होगा. टाइप 1 डायबिटीज वह होती है जो बचपन में ही हो जाती है और इसमें पूरी उम्र इंसुलिन लेना पड़ता है. वहीं, टाइप- 2 डायबिटीज वह होती है जो खराब लाइफस्टाइल और खानपान की गलत आदतों के कारण होती है. इसको कंट्रोल करने के लिए दवाएं लेनी पड़ती हैं, कुछ मामलों में इंसुलिन की जरूरत पड़ जाती है.
डॉक्टर बताते हैं कि अगर माता-पिता में से किसी एक को टाइप 2 डायबिटीज है, तो आपके जीवन भर में इसके होने का जोखिम लगभग 30 से 40% तक बढ़ सकता है. अगर माता-पिता दोनों को यह बीमारी है, तो रिस्क और भी बढ़ जाता है. सिर्फ जीन ही इस बात की गारंटी नहीं देते कि आपको यह बीमारी होगी ही,अक्सर लाइफस्टाइल से जुड़ी गलत आदतें इसे शुरू करने का कारण बनती हैं.
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वही,टाइप 1 डायबिटीज की बात करें तो इससे पीड़ित अधिकतर लोगों के परिवार में पहले किसी को यह बीमारी नहीं रही होती है. सीधा मतलब ये है कि अगर माता- पिता को टाइप- 2 डायबिटीज है तो फिर आपको भी इसका रिस्क हो सकता है. हालांकि परिवार में डायबिटीज होने के बावजूद सही वजन, खान-पान और शारीरिक गतिविधि के जरिए इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
अगर परिवार में डायबिटीज है तो क्या करें?
दिल्ली एम्स में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ राजेश खड़गावत ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि अगर माता-पिता को डायबिटीज है तो इसे डर की वजह नहीं, बल्कि सतर्क रहें. रोज कम से कम 45 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें, वजन को कंट्रोल रखें और मानसिक तनाव न ले.
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समय - समय पर टेस्ट कराते रहें
डायबिटीज से बचाव का एक तरीका ये भी है कि हर कुछ महीनों में इसकी जांच कराते रहें. फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c की जांच से शुगर लेवल का पता चल जाता है, खासकर अगर वजन बढ़ रहा हो या दूसरे जोखिम मौजूद हों तो टेस्ट कराएं. इससे समय रहते बीमारी का पता चल सकता है.
आजतक हेल्थ डेस्क