आज भी कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज मुश्किल है. इस बीमारी की जल्द से जल्द पहचान होना जरूरी है. इसके लिए AIIMS दिल्ली ने iOncology.ai बनाया था. जिसकी मदद से कैंसर की रोकथाम,पहचान और इलाज को आसान बनाया जा रहा है. अब इसको BRICS हेल्थ जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है. BRICS देशों की बात करें 11 देशों में दुनिया की 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी रहती है और यहां हर साल करीब 90 लाख नए कैंसर मामले सामने आते हैं, जबकि लगभग 46.6 लाख लोगों की कैंसर से मौत होती है.
भारत की 2026 की BRICS समिट के संदर्भ में डिजिटल ऑन्कोलॉजी पर सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है. अलग-अलग देशों के अनुभव, तकनीक और स्वास्थ्य मॉडल साझा करके कैंसर की रोकथाम और इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है. एम्स से जुड़े इस काम का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह केवल कैंसर की समस्या को बताता नहीं, बल्कि AI, डिजिटल हेल्थ और विशेषज्ञ चिकित्सा को जोड़कर आगे का रास्ता तलाशता है.
क्या है iOncology.ai?
एम्स के बायोकैमिस्ट्री विभाग मेंं लंबे समय से iOncology और कैंसर के क्षेत्र में तकनीक के यूज पर काम किया जा रहा है. काम का फोकस यह समझना है कि आधुनिक तकनीक और AI की मदद से कैसे कैंसर की पहचान, उसकी रोकथाम और इलाज में मदद मिल सकती है.
विभाग में प्रोफेसर डॉ. अशोक शर्मा के मुताबिक, iOncology.ai कैंसर का जल्दी पता लगाने और इलाज में मदद करने वाला एक नया एआई आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसे AIIMS दिल्ली और C-DAC पुणे ने मिलकर विकसित किया है. इसका ट्रायल भी मरीजों पर किया गया है. प्लेटफ़ॉर्म फिलहाल पायलट-स्टेज क्लिनिकल स्टेज में है.
नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान The BRICS हेल्थ जर्नल में प्रकाशित इस समीक्षा ने दुनिया के सामने भारत की AI और डिजिटल हेल्थ की बढ़ती ताकत को सामने रखा है. खास तौर पर कैंसर की देखभाल के लिए भारत में तैयार किए जा रहे स्वदेशी प्लेटफॉर्म iOncology.ai को काफी अहम माना गया है.
भारत की डिजिटल हेल्थ व्यवस्था और iOncology.ai आने वाले समय में सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ और दूसरे विकासशील देशों में भी कैंसर से लड़ाई को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैंय. इससे कैंसर की समय पर पहचान, सही जांच, इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक मरीजों की पहुंच को आसान बनाने की दिशा में नई संभावनाएं बन सकती हैं
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महिलाओं के दो बड़े कैंसर पर भी जोर
BRICS देशों में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख कैंसरों में शामिल है और ज्यादातर देशों में यह महिलाओं में सबसे आम कैंसर है. दूसरी ओर, ओवेरियन कैंसर कम होता है, लेकिन अकसर बीमारी का पता देर से चलता है. देखा भी जाता है कि जब कैंसर के लक्षण बढ़ जाते हैं और ये एडवांस स्टेज में आ जाता है तब मरीज इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं.
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अभिषेक पांचाल