Healthwealth summit: हेल्थकेयर में भारत ने की तरक्की, आयुष्मान योजना से गरीबों को इलाज में मदद: डॉ. महेश शर्मा

भारत में हार्ट बाईपास सर्जरी सहित कई गंभीर बीमारियों का इलाज पश्चिमी देशों की तुलना में कम खर्च में उपलब्ध है. सांसद डॉ. महेश शर्मा ने इंडिया टुडे हेल्थवेल्थ समिट में मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और आयुष्मान भारत योजना की सफलता पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि मेडिकल शिक्षा के विस्तार से डॉक्टरों की संख्या बढ़ी है.

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डॉ. महेश शर्मा डॉ. महेश शर्मा

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

भारत में हार्ट की बाईपास सर्जरी से लेकर कई दूसरी गंभीर बीमारियों का इलाज पश्चिमी देशों के मुकाबले कम खर्च में उपलब्ध है. मेडिकल कॉलेजों,अस्पतालों और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का भी विस्तार हुआ है. इंडिया टुडे के हेल्थवेल्थ समिट में गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट से सांसद डॉ. महेश शर्मा ने ये कहा. उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था पर चर्चा के दौरान मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और आयुष्मान भारत योजना को आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण बताया.

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उन्होंने ये भी कहा कि देश में मेडिकल शिक्षा का विस्तार होने से डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिली है. इसके साथ ही डॉक्टरों को अच्छी ट्रेनिंग देना और अस्पतालों में इलाज के तय मानकों का पालन भी किया जा रहा है. 

आयुष्मान भारत योजना: मरीजों को राहत

डॉ महेश शर्मा ने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. अब लोग अस्पतालों में जाकर अपना निशुल्क इलाज करा रहे हैं. भर्ती मरीजों को इलाज के लिए प्रति परिवार सालाना पांच लाख रुपये तक का कवर मिल रहा है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को महंगे इलाज में मदद मिल रही है. 

अब लाइफस्टाइल डिजीज बड़ी चुनौती

डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि भारत में बीमारियों का पैटर्न समय के साथ बदल रहा है. पहले मलेरिया, फूड पॉइजनिंग और पीलिया जैसी संक्रामक बीमारियां स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती थीं. अब डायबिटीज, मोटापा और हार्ट की बीमारियों जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है. इसके पीछे बदलती जीवनशैली, जरूरत से ज्यादा खाना, फिजिकल एक्टिविटी में कमी और खानपान की आदतों को अहम कारण माना जाता है.

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खानपान और बदलती जीवनशैली का असर

आज लोगों की दिनचर्या पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक हो गई है. पैदल चलने और शारीरिक मेहनत करने का समय घटा है, जबकि लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत बढ़ी है .इसके साथ ही ज्यादा कैलोरी वाला खाना, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है.

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