सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि भीम आर्मी के कुछ समर्थकों ने किसी सरकारी अधिकारी के साथ मारपीट की, क्योंकि वो सवर्ण समाज से आते हैं.
वीडियो किसी दफ्तर का लगता है. इसमें नीले रंग का झंडा लिए कुछ लोग देखे जा सकते हैं. इन लोगों में से एक बुजुर्ग व्यक्ति हाथ में जूता लिए किसी दूसरे शख्स की पिटाई करता नजर आता है, और दोनों में तीखी नोकझोंक भी देखी जा सकती है.
वीडियो को एक्स और फेसबुक पर शेयर करते हुए कुछ लोगों ने दावा किया कि ये लोग भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद के एक कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति लेने गए थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि संबंधित अधिकारी सवर्ण समाज से आते हैं, तब उन्होंने अधिकारी की पिटाई कर दी.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये मामला कर्नाटक के बगलकोट जिले का है, जहां एक किसान ने सालों से मुआवजा न मिलने का आरोप लगाया और गुस्से में एक अधिकारी को पीट दिया.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वायरल वीडियो के फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें ये ‘न्यूज 18 कन्नड़’ के यूट्यूब चैनल पर मिला, जिसे 13 जून को अपलोड किया गया था.
‘न्यूज 18 कन्नड़’ की इस रिपोर्ट के मुताबिक, ये वीडियो कर्नाटक के बगलकोट टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी (BTDA) दफ्तर का है. 20 साल से ज्यादा समय से मुआवजे का इंतजार कर रहे एक किसान ने गुस्से में आकर दफ्तर के एक अधिकारी को चप्पल से मार दिया था.
इस जानकारी के साथ सर्च करने पर हमें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ , ‘एनडीटीवी’ और ‘डेक्कन हेराल्ड’ की कुछ रिपोर्ट्स मिलीं. इनके मुताबिक, कर्मचारी का नाम नीलकंठ अंकड़ है और उनके साथ मारपीट करने वाले किसान का नाम बसप्पा दोडामनी है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सालों पहले दोडामनी की करीब चार एकड़ खेती की जमीन कृष्णा नदी में डूब गई थी. इसके बाद वो लंबे समय से सरकारी मुआवजे के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे. उनका आरोप था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, और उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला.
इसी सिलसिले में 13 जून को जब दोडामनी, बगलकोट के नवनगर इलाके में स्थित BTDA कार्यालय पहुंचे, तब वहां पहले से दलित संघर्ष समिति (DSS) के कार्यकर्ता कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. वायरल वीडियो में इसी संगठन का नीले रंग का झंडा देखा जा सकता है. वहीं मुआवजे को लेकर नीलकंठ और दोडामनी के बीच बहस छिड़ गई, और उन्होंने अधिकारी पर चप्पल से हमला कर दिया.
इन रिपोर्ट्स में भीम आर्मी या चंद्रशेखर आजाद के किसी कार्यक्रम की अनुमति लेने का कोई जिक्र नहीं है. और न ही कर्मचारी को उसके कथित सवर्ण होने के कारण पीटे जाने की कोई बात है.
कुल मिलाकर साफ है कि वायरल वीडियो का भीम आर्मी या चंद्रशेखर आजाद से कोई लेना-देना नहीं है.
ऋद्धीश दत्ता