आरक्षण विरोधी प्रदर्शन का बताकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें कुछ पुलिसवाले, कुछ लोगों को पकड़कर अपने साथ ले जाते हुए नजर आ रहे हैं. इस दौरान एक प्रदर्शनकारी की पैंट भी फट जाती है. कुछ लोगों का कहना है कि ये लोग एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन करने पहुंचे थे, जहां पुलिसवालों ने इनकी ये हालत कर दी.
वीडियो को फेसबुक पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “ओबीसी, SC, ST समाज के आरक्षण का विरोध कर रहे थे ब्राह्मणवादी लोग. कच्चा भी फाड़ कर उठा लिया. बेचारा 500 रुपये लेकर आरक्षण हटाओ आंदोलन में आया था और तुम सब ने उसकी ही गुत्थी लाल करदी. देखकर बहुत दुख हुआ खुशी मन से!”
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो फीस बढ़ोत्तरी और छात्र संघ चुनाव बहाली समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर लखनऊ में हुए समाजवादी छात्र सभा के प्रदर्शन का है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वीडियो को गौर से देखने पर इस पर “@SunilRaidas” नाम का एक वाटरमार्क नजर आता है. ये अकाउंट सुनील कुमार रैदास नाम के शख्स का है. उनके बायो के मुताबिक वो एक फोटो जर्नलिस्ट हैं. उन्होंने ये वीडियो 30 जुलाई को अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स पर शेयर किया था. डिस्क्रिप्शन के मुताबिक ये वीडियो लखनऊ के 1090 चौराहे पर हुए समाजवादी छात्र सभा के विरोध प्रदर्शन का है.
उन्होंने इस प्रदर्शन के कई और वीडियो भी पोस्ट किए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारी ‘अखिलेश यादव जिंदाबाद’ के नारे लगाते देखे जा सकते हैं. इसके अलावा ये लोग समाजवादी पार्टी के झंडे और बैनर लिए हुए भी नजर आ रहे हैं.
दैनिक भास्कर की 30 जुलाई की रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र संघ चुनावों की बहाली समेत कई मुद्दों को लेकर समाजवादी पार्टी की छात्र इकाई ने लखनऊ में प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तीखी नोकझोंक हो गई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाया.
समाजवादी पार्टी ने भी 30 जुलाई को एक प्रेस रिलीज जारी कर इस प्रदर्शन की कई तस्वीरें शेयर कीं. प्रेस रिलीज के मुताबिक इस प्रदर्शन के जरिए फीस बढ़ोत्तरी वापस लेने, छात्र संघ चुनाव की बहाली और जौहर यूनिवर्सिटी के डिमोलिशन के आदेश को वापस लेने की मांग की गई.
जहां तक सवाल आरक्षण का है, तो समाजवादी पार्टी का रुख साफ है कि वो इसके साथ खड़े हैं. अखिलेश यादव ने 22 अगस्त को एक्स पर लिखा , “आरक्षण सुधार के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के खिलाफ एक और गहरी साजिश है. आरक्षण पीडीए का अधिकार है किसी की इच्छा का विषय नहीं.”
साफ है कि वीडियो के साथ किए जा रहे दावे एकदम बेबुनियाद हैं.
फैक्ट चेक ब्यूरो