शिखर धवन को पत्नी आयशा से जिस आधार पर मिला तलाक, वो 'क्रूरता' क्या है? जानें- क्या कहता है कानून

टीम इंडिया के क्रिकेटर शिखर धवन का तलाक हो गया है. दिल्ली की फैमिली कोर्ट ने शिखर धवन और आयशा मुखर्जी के तलाक को मंजूरी दे दी है. शिखर और आयशा ने 2012 में शादी की थी. इस साल मार्च में धवन ने क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था.

Advertisement
शिखर धवन और आयशा मुखर्जी की 2012 में शादी हुई थी. (फाइल फोटो) शिखर धवन और आयशा मुखर्जी की 2012 में शादी हुई थी. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 5:21 PM IST

शिखर धवन और आयशा मुखर्जी अब पति-पत्नी नहीं रहे. दिल्ली की फैमिली कोर्ट ने उनके तलाक को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने माना कि आयशा की वजह से धवन को 'मानसिक यातना' से गुजरना पड़ा.

फैमिली कोर्ट के जज हरीश कुमार ने धवन की ओर से पत्नी आयशा पर लगाए सभी आरोपों को भी मान लिया है. कोर्ट ने कहा कि आयशा ने या तो इन आरोपों का विरोध नहीं किया या फिर अपना बचाव करने में नाकाम रहीं.

Advertisement

धवन से 10 साल बड़ी आयशा किक बॉक्सर हैं. साल 2012 में शिखर धवन ने आयशा से शादी की थी. सितंबर 2021 में आयशा ने धवन से अलग होने की जानकारी दी थी. आखिरकार इस साल मार्च में शिखर धवन ने 'क्रूरता' के आधार पर तलाक का केस दायर कर दिया.

धवन और आयशा के तलाक से 'क्रूरता' चर्चा में आ गई है. ऐसे में जानते हैं कि क्रूरता का मतलब क्या है? और कानून इस पर क्या कहता है?

क्या है क्रूरता?

- 1955 के हिंदू मैरिज एक्ट और 1954 के स्पेशल मैरिज एक्ट, दोनों में ही 'क्रूरता' का जिक्र है. हिंदू मैरिज एक्ट से हिंदू धर्म को मानने वालों की शादी और तलाक होता है. जबकि, स्पेशल मैरिज एक्ट दो अलग-अलग धर्मों को मानने वालों पर लागू होता है.

- हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13 में 'तलाक' का प्रावधान किया गया है. इसमें तलाक के कुछ आधार दिए गए हैं. इन्हीं में से एक 'क्रूरता' को भी तलाक का आधार माना गया है.

Advertisement

- क्रूरता तलाक लेने का एक मजबूत आधार है, लेकिन कानून में कहीं इसका जिक्र नहीं है कि क्रूरता किसे माना जाएगा? 

कैसे साबित होगी क्रूरता?

- कानून में इसकी परिभाषा तो नहीं दी गई है, लेकिन आमतौर पर क्रूरता तब मानी जाती है, जब जीवन, स्वास्थ्य, शरीर या फिर मानसिक शांति को खतरा हो. ऐसी स्थिति में उसे क्रूरता के दायरे में रखा जाता है.

- किसी मामले में क्रूरता क्या होगी? इसका आखिरी फैसला कोर्ट ही करेगी. कोर्ट ने अपने अलग-अलग फैसलों में क्रूरता के बारे में बताया है.

- पति या पत्नी अपने साथ होने वाली शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना को क्रूरता के तौर पर पेश कर सकता है. लेकिन इसके लिए उसे साबित भी करना होगा.

- क्रूरता के आधार पर तलाक मांगने वाले अगर इसे साबित नहीं कर पाते हैं तो फिर उनके तलाक का आवेदन खारिज हो सकता है. 1998 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक के आवेदन को इसलिए खारिज कर दिया था, क्योंकि पति अपनी पत्नी के खिलाफ क्रूरता साबित नहीं कर पाया था.

लग सकता है क्रूरता है, लेकिन...

- शादी के बाद पति या पत्नी को लग सकता है कि उनका पार्टनर क्रूरता कर रहा है, लेकिन तलाक के आवेदन के दौरान सबूत और परिस्थितियां भी बतानी होती हैं. ताकि अदालत मान सके कि क्रूरता हुई है.

Advertisement

- 1999 में एस हनुमंत राव बनाम एस रमानी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक क्रूरता पर अहम फैसला दिया था. इस मामले में पत्नी ने मंगलसूत्र गले से उतार दिया तो पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की. इस पर कोर्ट ने कहा कि मंगलसूत्र उतारना मानसिक क्रूरता के दायरे में नहीं आता.

- ये समझना जरूरी है कि क्रूरता का न तो कोई दायरा है और न ही कोई परिभाषा. ये हर मामले में परिस्थितियां और सबूत के आधार पर तय होती है. जरूरी नहीं कि आप जिसे क्रूरता मान रहे हों, वो अदालत की नजर में भी क्रूरता हो.

तलाक लेने के आधार क्या हैं?

- पति या पत्नी में से कोई भी शादी के बाद अपनी इच्छा से किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाता हो. 

- शादी के बाद अपने साथी के साथ मानसिक या शारीरिक क्रूरता का बर्ताव करता हो. 

- बिना किसी ठोस कारण के ही दो साल या उससे लंबे समय से अलग रह रहे हों.

- दोनों पक्षों में से कोई एक हिंदू धर्म को छोड़कर दूसरा धर्म अपना लेता हो. 

- दोनों में से कोई एक पक्ष मानसिक रूप से बीमार हो और उसके साथ वैवाहिक जीवन जीना संभव न हो. 

Advertisement

- अगर दोनों में से कोई एक कुष्ठ रोग से पीड़ित हो. 

- पति या पत्नी में से कोई एक संक्रामक यौन रोग से पीड़ित हो. 

- अगर पति या पत्नी में से कोई घर-परिवार छोड़कर संन्यास ले ले. 

- अगर पति या पत्नी में से किसी एक के जीवित रहने की कोई भी खबर सात साल तक न मिली हो. 

- अगर शादी के बाद पति बलात्कार का दोषी पाया जाता हो. 

- अगर शादी के समय पत्नी की उम्र 15 साल से कम रही हो तो वो 18 साल की होने से पहले तलाक ले सकती है.

सहमति से भी लिया जा सकता है तलाक

- हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13B में आपसी सहमति से तलाक का जिक्र है. हालांकि, इस धारा के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए तभी आवेदन किया जा सकता है जब शादी को कम से कम एक साल हो गए हैं.

- इसके अलावा, इस धारा में ये भी प्रावधान है कि फैमिली कोर्ट दोनों पक्षों को सुलह के लिए कम से कम 6 महीने का समय देता है और अगर फिर भी सुलह नहीं होती है तो तलाक हो जाता है.

- हालांकि, इसी साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में साफ कर दिया था कि अगर पति-पत्नी के बीच रिश्ते इस कदर टूट चुके हैं कि ठीक होने की गुंजाइश न बची हो तो इस आधार पर वो तलाक की मंजूरी दे सकता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »