बेटों के लिए प्रेशर बनी वीरेंद्र सहवाग की लीगेसी? हेटर्स से बच्चों को किया अलर्ट, दर्द में मां ने संभाला

सहवाग ने रियलिटी शो राइज एंड फॉल 2 की होस्टिंग स्वीकारने के पीछे की चुनौतियों और अनुभवों को साझा किया. शुरुआत में उन्होंने होस्टिंग से मना किया था. फिर वो कैसे मानें?

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वीरेंद्र सहवाग का छलका दर्द (Photo: ITGD) वीरेंद्र सहवाग का छलका दर्द (Photo: ITGD)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग रियलिटी शो राइज एंड फॉल 2 को होस्ट कर रहे हैं. अपनी नई पारी से उन्होंने सबको हैरान किया है. कभी क्रिकेट की पिच पर चौके-छक्के लगाने वाले सहवाग अब राइज एंड फॉल के पेंटहाउस में अपनी दमदार होस्टिंग से फैंस का दिल जीत रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं उनके लिए ये शो साइन करना आसान फैसला नहीं था. 

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होस्ट बनने का कैसा है एक्सपीरियंस?
सहवाग के मुताबिक, उन्होंने शुरुआत में इस शो की होस्टिंग से मना किया था. लेकिन जब टीम ने उन्हें कहा कि वो एक्टर वीरेंद्र सहवाग नहीं बल्कि वीरेंद्र सहवाग चाहते हैं, उन्हें अपनी रियल पर्सनैलिटी के साथ शो होस्ट करना होगा. मेकर्स ने उन्हें कंफर्ट दिया और अपने हिसाब से शो को होस्ट करने की लिबर्टी दी. जिसके बाद वो ये शो करने को माने.

ईटाइम्स को दिए इंटरव्यू में सहवाग ने कहा कि उनके बच्चों को होस्टिंग का आइडिया हैरान कर गया था. वो कहते हैं- मेरे बच्चों ने कहा था, नहीं पापा, आप ये कैसे कर सकते हैं? आपको नहीं पता रियलिटी शो कैसे काम करते हैं. आप तो इन्हें देखते भी नहीं हो. उन्हें इसी बात को लेकर चिंता थी, लेकिन अब मैं ये शो करके खुशी महसूस कर रहा हूं.

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सहवाग ने बताया कि राइज एंड फॉल जैसा शो उनके लिए नया है. वो कमेंट्री करते हैं. क्रिकेट शो होस्ट कर सकते हैं लेकिन राइज एंड फॉल जैसा शो करने को लेकर वो कंफ्यूज थे. फिर वो टीम के साथ बैठे. 2 घंटे उनकी बात चली. वहां उन्हें अपने सभी सवालों के जवाब मिले.

सहवाग के बेटे पर है प्रेशर?
सहवाग से पूछा गया कि उन्होंने मुश्किल वक्त को कैसे हैंडल किया है. इसके जवाब में उन्होंने बताया परिवार और करीबी दोस्त सबसे बड़े सपोर्ट होते हैं. वो हर वक्त आपके साथ खड़े रहते हैं. उन्होंने कहा- 2007 में इंग्लैंड दौरे के लिए मुझे टीम से बाहर कर दिया गया था. मैं करीब 10-11 टेस्ट मैच नहीं खेल पाया था. ये सब देखकर मैं दुखी था. मेरी मां कहती थीं- आपको जिंदगी में जो भी मिले, उसमें खुश रहो. मेहनत करते रहो. अगर दोबारा खेलने का मौका मिले तो खेलना और अगर नहीं मिले तो भी कोई बात नहीं, तुमने अच्छी जिंदगी के जीने के लिए काफी कुछ हासिल कर लिया है. मां की ये बात हमेशा मेरे दिमाग में रही. मैंने कड़ी मेहनत की, दौड़ना शुरू किया और फिटनेस पर ध्यान दिया. फिर 2008 में टीम में वापसी हुई .

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सहवाग के दोनों बेटे भी पेशे से क्रिकेटर हैं. बड़े बेटे आर्यवीर के ऊपर उनकी लीगेसी का प्रेशर रहता होगा? इस पर सहवाग ने कहा कि वो अपना खुद का नाम बनाएगा. वो मेहनती है. अपना बेस्ट देने की कोशिश कर रहा है. अगर वो अच्छा परफॉर्म करेगा तो उसे अपनी पहचान और सम्मान मिलेगा. मैंने उसे बोला है कि लोगों की तारीफों और आलोचनाओं पर ध्यान नहीं देना. अपने खेल से लोगों का मुंह बंद करो.

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