विदेशी चेहरे वाले हिंदुस्तानी एक्टर की आखिरी फिल्म रिलीज, मौत के 9 साल बाद इच्छा हुई पूरी

इस फिल्म को नवनीत बहल और विभू कश्यप ने डायरेक्ट किया है. यह 1975 की इमरजेंसी पर आधारित फिल्म है. इस फिल्म का पहले नाम सन 75 था, जिसे बाद में बदलकर डायल 1975 कर दिया गया.

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टॉम ऑल्टर की आखरी फिल्म रिलीज हो रही है. (Photo: ITG) टॉम ऑल्टर की आखरी फिल्म रिलीज हो रही है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:52 PM IST

टॉम ऑल्टर हिंदी सिनेमा के वह शानदार अभिनेता थे, जिन्होंने पर्दे पर अपने विदेशी चेहरे की पहचान को सबसे बड़ी ताकत बना लिया था. मूल रूप से अमेरिकी टॉम दिल से पूरे हिंदुस्तानी थे. उनका 2017 में निधन हुआ था. उनके निधन के नौ साल बाद अब उनकी आखिरी फिल्म रिलीज हो रही है.

टॉम ऑल्टर की आखिरी फिल्म डायल 1975 को यूं तो 2016 में रिलीज हो जाना था लेकिन कई कारणों से यह फिल्म वर्षों तक अटकी रही. यह फिल्म 1975 की इमरजेंसी पर आधारित है. टॉम के बेटे जेमी ऑल्टर बताते हैं कि इस फिल्म को लेकर उनके पिता काफी उत्साहित थे. इतने वर्षों तक लगभग एक जैसे ही किरदार निभाने के बाद उन्हें कुछ अलग करने का मौका मिला था. इस फिल्म में केके मेनन जैसे शानदार एक्टर भी हैं.

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जेमी बताते हैं कि 2023 में जब मैं केके मेनन के साथ कोई काम कर रहा था तो मेनन साहब भी काफी उदास थे कि यह फिल्म रिलीज क्यों नहीं हो रही है. 

इस फिल्म को नवनीत बहल और विभू कश्यप ने डायरेक्ट किया है. यह 1975 की इमरजेंसी पर आधारित फिल्म है. इस फिल्म का पहले नाम सन 75 था, जिसे बाद में बदलकर डायल 1975 कर दिया गया. इस फिल्म को वेव ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया है.

कहा जा रहा है कि सेंसर बोर्ड की आपत्तियों से लेकर पैसे की किल्लत और थिएटर रिलीज में दिक्कतों की वजह से फिल्म साल दर साल लटकती चली गई. 

बता दें कि उत्तराखंड के मसूरी में जन्मे टॉम ऑल्टर ने हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को इतना करीब से अपनाया कि देखते ही देखते वह हिंदी सिनेमा के सबसे विश्वसनीय चरित्र अभिनेताओं में शुमार हो गए. 1970 के दशक में फिल्मों में कदम रखने वाले ऑल्टर ने शतरंज के खिलाड़ी, क्रांति, राम तेरी गंगा मैली, गांधी और वीर-जारा जैसी फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाए. उनकी खासियत सिर्फ उनका अंग्रेजी लहजा या विदेशी चेहरा नहीं था, बल्कि संवाद अदायगी, आवाज और अभिनय में वह ठहराव था, जिसने छोटे से छोटे किरदार को भी यादगार बना दिया.

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थिएटर, सिनेमा और टेलीविजन तीनों माध्यमों में सक्रिय रहे टॉम ऑल्टर उन कलाकारों में थे, जिन्होंने यह साबित किया कि अभिनय की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती. किरदार में उतर जाने वाला कलाकार ही असल में दर्शकों का अपना बन जाता है. 37 साल के करियर में 100 से ज्यादा अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम करने वाले और थिएटर की दिग्गज कहे जाने वाले टॉम आल्टर 29 सितंबर, 2017 को कैंसर के चलते दुनिया छोड़कर चले गए थे. 

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