Raksha Bandhan 2026: जिस भाई-बहन के रिश्ते को रक्षा और भरोसे का प्रतीक माना जाता है, उसी रिश्ते ने कभी मुंबई के अंडरवर्ल्ड का इतिहास बदल दिया था. गंगूबाई काठियावाड़ी की कहानी सिर्फ एक महिला के संघर्ष और उसके माफिया क्वीन बनने की नहीं है, बल्कि यह एक बेबस औरत के हिम्मत और एक डॉन से जुड़े रक्षाबंधन के अटूट धागे की दास्तान भी है. पति के दिए धोखे और कोठे पर बिकने के दर्द से टूटने के बाद, जब गंगूबाई ने मुंबई के खूंखार डॉन करीम लाला की कलाई पर राखी बांधी, तो उस रिश्ते ने उन्हें सुरक्षा देने के साथ कमाठीपुरा की 'माफिया क्वीन' बना दिया था.
निडर और बुलंद हौसलों वाली थीं गंगूबाई काठियावाड़ी
आलिया भट्ट स्टारर फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' के जरिए जिस निडर महिला का किरदार पर्दे पर दिखाया गया है, वो असल जिंदगी में मुंबई की सबसे दबंग और मशहूर महिलाओं में से एक गंगूबाई काठियावाड़ी थीं. गंगूबाई अपने दौर में माफिया क्वीन के नाम से जानी जाती थीं. वो मुंबई में कमाठीपुरा इलाके में कोठे चलाती थीं, बावजूद इसके उनकी मुंबई में काफी धाक थी. वो एक दबंग महिला माफिया थीं. उनका पूरा नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था. मगर वो गंगूबाई काठियावाड़ी की नाम से जानी जाती थीं.
लेखक हुसैन एस. जैदी की किताब 'माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई' में गंगूबाई के जीवन के उन पन्नों को खोला गया है, जो धोखे, दर्द और फिर वहां से उठकर सत्ता हासिल करने की कहानी बयां करते हैं. गुजरात के काठियावाड़ में साल 1940 में गंगा हरजीवनदास का जन्म हुआ था. वो कम उम्र में ही अपने पिता के अकाउंटेंट रमणिक लाल से प्यार कर बैठीं और शादी का सपना संजोकर घर से भागकर मुंबई चली गई थीं. लेकिन मुंबई पहुंचते ही रमणिक ने उन्हें धोखा दिया और महज 500 रुपये में कमाठीपुरा के एक कोठे पर उन्हें बेच दिया था. पति के इस धोखे ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था, लेकिन उन्होंने हालातों के आगे घुटने नहीं टेके, बल्कि वो फिर से खड़ी हुईं और गंगू बनकर अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर आगे बढ़ाया.
डॉन के दरबार में मांगा न्याय
मुंबई में उस दौरान करीम लाला के नाम की दहशत थी, जो शहर के तीन बड़े माफिया डोनों में से एक था. कमाठीपुरा में रहते हुए गंगूबाई का सामना अंडरवर्ल्ड की दुनिया से हुआ. बताया जाता है कि मुंबई के नामी माफिया डॉन करीम लाला के एक गुंडे ने उनका बलात्कार किया था. तब वो सीधे करीम लाला के दरबार में अपने लिए न्याय मांगने पहुंची थीं. करीम लाला से मुलाकात करके उन्होंने बेखौफ होकर अपनी आपबीती सुनाई. करीम लाला उनका साहस देख हैरान थे. इसके बाद करीम लाला ने न सिर्फ उस गुंडे को सजा दी, बल्कि गंगूबाई की हिफाजत की जिम्मेदारी लेने का वादा भी किया था.
'माफिया क्वीन' बन बदली जिंदगी
इसके बाद गंगूबाई ने करीम लाला को अपना भाई मान लिया और हर साल उसकी कलाई पर राखी बांधने लगीं. रक्षाबंधन का यह पवित्र धागा मुंबई के अंडरवर्ल्ड में एक बड़े बदलाव का जरिया बना. डॉन की बहन बनने के बाद कमाठीपुरा में गंगूबाई की धाक जम गई. करीम लाला ने उन्हें कमाठीपुरा के कोठों की जिम्मेदारी सौंप दीं, जिसके बाद वो मुंबई की 'माफिया क्वीन' के नाम से पहचानी जाने लगीं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क