सऊदी अरब अब सिर्फ तेल, टूरिज्म और खेल के जरिए दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश नहीं कर रहा, उसकी नजर ग्लोबल सिनेमा पर भी है. इसी कड़ी में 'बैड बॉयज' जैसी इंटरनेशनल फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर्स आदिल अल अरबी और बिलाल फल्लाह की नई अरबी एक्शन थ्रिलर 7 Dogs भारत में रिलीज हो गई है. भारत में 7 Dogs की चर्चा की वजह सिर्फ इसका इंटरनेशनल कद नहीं है. फिल्म में सलमान खान और संजय दत्त की मौजूदगी ने इसे भारतीय दर्शकों के लिए खास बना दिया है लेकिन फिल्म देखने के बड़ा सवाल उठता है कि इतने बड़े नाम, इतना बड़ा स्केल और इतने बड़े एक्शन के बावजूद 7 Dogs आखिर वह असर क्यों नहीं छोड़ पाई, जिसकी उम्मीद इससे की गई थी?
फिल्म की कहानी की बात करें, तो इस इंटरनेशनल थ्रिलर में मिस्र के मशहूर एक्टर करीम अब्देल अजीज और अहमद एज लीड रोल में हैं. कहानी घूमती है इंटरपोल एजेंट खालिद (अहमद एज) और एक पूर्व अपराधी घाली (करीम) के इर्द-गिर्द. ये दोनों मजबूरी में एक साथ आते हैं ताकि '7 Dogs' नाम के एक खूंखार क्राइम सिंडिकेट का सफाया कर सकें. यह सिंडिकेट पूरी दुनिया में 'पिंक लेडी' नाम की एक खतरनाक सिंथेटिक ड्रग का काला कारोबार फैला रहा है, और इसी नेटवर्क को तोड़ने के लिए इन दोनों को अलग-अलग देशों के खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है.
संजय दत्त का कैमियो समझ नहीं आया?
जाहिर सी बात है, जब बात दुनिया भर में फैले ड्रग सिंडिकेट की हो रही है तो उसका कनेक्शन भारत से जुड़ना ही था. फिल्म में भारत के इस काले कारोबार की कमान संजय दत्त के हाथ में दी गई है, जिसका नाम 'रंजीत' हैं. लेकिन यहाँ डायरेक्टर्स ने जो काम किया है, उसे देखकर सिर पकड़ लेंगे. जिस संजय दत्त ने 'अग्निपथ', 'केजीएफ 2', 'लियो' और 'धुरंधर' जैसी फिल्मों में खौफ का दूसरा नाम बनकर दिखाया है, उनकी दमदार आवाज, लुक और अंदाज इस फिल्म से पूरी तरह गायब है. '7 Dogs' में रंजीत का किरदार देखकर लगता ही नहीं कि वो कोई खतरनाक माफिया है, बल्कि वो तो बस पूरे टाइम व्लॉगिंग करता नजर आता है. जिसे चॉकलेट खाना भी बहुत पसंद है. अब सोचिए, जरा जो बंदा पूरे देश में ड्रग्स का धंधा चला रहा है, उसे 'धमाल' के इंस्पेक्टर कबीर नायक जैसा बना दिया है.
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यहां देखिए फिल्म का ट्रेलर
सलमान खान ये तूने क्या किया?
अब बात करते हैं बॉलीवुड के 'भाईजान' यानी सलमान खान की, जिनके चेहरे पर भारत में इस फिल्म का पूरा प्रचार-प्रसार टिका हुआ था. सच कहूं तो अगर सलमान के फैंस सिर्फ उनके नाम पर यह फिल्म देखने जा रहे हैं, तो वो खुद को ठगा हुआ ही महसूस करेंगे. फिल्म में वो 'जौहर' नाम के एक छोटे-मोटे मुखबिर के रोल में एक बेहद मामूली सी तंग बस्ती में नाई की दुकान पर नजर आते हैं. उनका किरदार इतने ढीले-ढाले तरीके से लिखा गया है कि यकीन ही नहीं होता. करियर में पहली बार सलमान खान की ऐसी एंट्री देखने को मिली है जो बिल्कुल असरहीन लगती है. एक सीन में डायरेक्टर उन्हें सूट-बूट में दिखाता है और अगले ही पल वो ऑटो ड्राइवर बने घूम रहे होते हैं, जो समझ से परे है.
लचर डायरेक्शन ने बिगाड़ा खेल
डायरेक्टर्स आदिल और बिलाल ने सलमान और संजय दत्त को फिल्म में रखने की कोशिश तो पूरी की, लेकिन वो उनके स्टारडम और पर्सनैलिटी के साथ रत्ती भर भी न्याय नहीं कर पाए. दोनों ही बड़े सितारे स्क्रीन पर बेहद लचर और लाचार दिखे. फिल्म में दिखाए गए मुंबई के सीन्स देखकर साफ पता चलता है कि ये सब सिर्फ क्रोमा स्क्रीन पर शूट किया गया है. न तो लोकेशंस में असली मुंबई वाली बात लगती है और न ही बैकग्राउंड में दिखने वाले लोग असली मुंबईकर लगते हैं.
म्यूजिक भी नहीं बचा सका फिल्म की नैय्या
फिल्म में थोड़ा देसीपन और बॉलीवुड टच देने के लिए मेकर्स ने बैकग्राउंड स्कोर में डिवाइन का हिट ट्रैक 'काम 25' और मशहूर रैप 'रन इट अप' इस्तेमाल किया है. लेकिन जब कहानी और किरदारों की नींव ही इतनी खोखली हो, तो बैकग्राउंड म्यूजिक भी डूबती कश्ती को नहीं बचा पाता. कुल मिलाकर, '7 Dogs' एक बेहद औसत दर्जे की फिल्म है, जहां सलमान खान और संजय दत्त जैसे बड़े नाम भी कुछ कमाल नहीं दिखा पाते.
शिखर नेगी