हिट है Delhi Crime का दूसरा सीजन, लेकिन इन कमियों को नोटिस किया क्या?

दिल्ली क्राइम का दूसरा सीजन आ चुका है. सीरीज की काफी तारीफ हो रही है. इसका मतलब यही है कि शेफाली शाह स्टारर सीरीज हिट है. पर असल में दिल्ली क्राइम 2 में कुछ कमियां हैं. जिन लोगों ने इसका पहला सीजन देखा है, उन्हें दिल्ली क्राइम 2 निराश करने वाला है. इसलिये इससे ज्यादा उम्मीदें ना लगाएं.

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शेफाली शाह शेफाली शाह

आकांक्षा तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 9:43 AM IST

Delhi Crime Season 2: दिल्ली क्राइम बेस्ट हिंदी सीरीज में से एक है. सीरीज का दूसरा सीजन आ चुका है. 'दिल्ली क्राइम 2' का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. शेफाली शाह (Shefali Shah) स्टारर सीरीज को अच्छे रिव्यू मिल रहे हैं. इन रिव्यू को पढ़ कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीरीज हिट है. पर क्या वाकई में ऐसा है? या फिर पहले सीजन की तुलना में दूसरा सीजन कम बेहतर है? सीरीज को लेकर हर किसी का अलग नजारिया हो सकता है. पर ईमानदारी से कहें, तो दिल्ली क्राइम 2 में पहले सीजन जैसी बात नहीं है. आइये नजर डालते हैं उन पॉइंट पर जिनके बारे में शायद ही किसी ने सोचा होगा. 

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क्या है कहानी? 
सीरीज की कमियों पर बात करने से पहले चंद लाइनों में इसकी कहानी को समझ लेते हैं. ताकि आगे की बात समझने में थोड़ा आसानी हो. दिल्ली क्राइम 2 की कहानी 'कच्छा-बनियान' के बारे में है. दिल्ली का ये गिरोह बुजुर्गों को निशाना बनाता है. 'कच्छा-बनियान' गिरोह 90 के दशक में डकैती और हत्याओं को अंजाम देता था. कई साल बाद एक बार फिर ये गैंग एक्टिव हो चुका है और बुजुर्गों को अपना निशाना बना रहा है. बस इसी गंभीर मामले को सुलझाने का जिम्मा डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी (शेफाली शाह) को दिया गया है. वर्तिका चतुर्वेदी अपनी टीम इंस्पेक्टर भूपिंदर (राजेश तैलंग), आइपीएस नीति सिंह (रसिका दुग्गल), और सब इंस्पेक्टर जयराज (अनुराग अरोरा) के साथ मिल कर केस को सॉल्व करने में लग जाती हैं. कहानी का अंत जानने के लिये आपको सीरीज देखनी होगी. पर उससे पहले हम कुछ जरूरी बातें बता देना चाहते हैं. 

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-दिल को नहीं छूती कहानी 
दिल्ली क्राइम का पहला सीजन 16 दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड पर आधारित था. निर्भया कांड एक सेंसिटव मुद्दा था, जिसे दिल्ली क्राइम के जरिये बखूबी दर्शकों के सामने रखा गया था. दिल्ली क्राइम का पहला सीजन हर किसी के दिल को छू गया था. जिन्होंने पहला सीजन देखा है. वो समझ सकते हैं कि इसके सीक्वल को देख कर आप खुद को इमोशनली कनेक्ट नहीं कर पाते. किसी भी एपिसोड का एक भी सीन ऐसा नहीं होता, जिसे देख कर आप इमोशनल हो जायें. इसलिये बतौर दर्शक मैं सीरीज को देखते हुए इमोशनली कनेक्ट नहीं हो पाई.

-कहानी देख कर नहीं लगता डर
कहने को दिल्ली क्राइम 2 'कच्छा-बनियान' गैंग पर बेस्ड है. सीरीज का नाम भी दिल्ली क्राइम है, लेकिन फिर भी सीरीज देखते हुए आपको डर नहीं लगता है. ना ही सीरीज के विलेन्स को इस तरह दिखाया गया है कि उन्हें देख कर मन में खौफ पैदा हो. क्राइम पर बनी सीरीज देखते हुए उम्मीद होती है कि कोई सीन आपको हैरान करेगा, डराएगा, हार्ट बीट बढ़ेगी, लेकिन अफसोस दिल्ली क्राइम 2 इस मामले भी निराश करती है. 

-विलेन्स को नहीं मिला स्क्रीन टाइम 
अगर बात नियम और कानून की करें, तो फिर दिल्ली क्राइम 2 में 'कच्छा-बनियान' गैंग के विलेन ज्यादा दिखना चाहिये थे. पर यहां भी निराशा ही हाथ लगती है. सीरीज के मेन विलेन्स को स्क्रीन पर दिखने का काफी कम मौका दिया गया है. साढ़े तीन घंटे की सीरीज में करीब 30 मिनट तक 'कच्छा-बनियान' गैंग को दिखाया गया है. एक तरह से 'कच्छा-बनियान' गैंग और गैंग के अंदर चलने वाली पॉलिटिक्स को बिल्कुल अच्छी तरह से एक्सपोलर नहीं किया गया. 

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-लास्ट एपिसोड में हुई निराशा 
दिल्ली क्राइम 2 का आखिरी एपिसोड एक अच्छे मोड पर शुरू होता है. एपिसोड की शुरुआत देख कर लगता है कि वाह इसमें कुछ मजा आयेगा. अब कुछ दिलचस्प होने वाला है. पर वो बाद में बोरिंग होने लगता है. स्क्रीन प्ले काफी कमजोर लगा. क्योंकि पहले से ही कहानी का बैकग्राउंड नहीं बनाया गया था. इसलिये अंतिम एपिसोड बिल्कुल सरप्राइजिंग नहीं लगता है. 

-एक ही टोन पर थी कहानी 
इन सारे मुद्दों के अलावा दिल्ली क्राइम 2 में ज्यादा ट्विस्ट एंड टर्न नहीं देखने को मिलते. थ्रिलिंग मूमेंट भी काफी कम थे. पूरी सीरीज लगभग एक ही टोन पर दौड़ती दिखी. वहीं अगर बात की जाए शेफाली शाह की एक्टिंग की, तो इसमें कोई दोराय नहीं कि वो बेहतरीन एक्ट्रेस हैं. पर शेफाली शाह अब हर मूवी और सीरीज में एक सा ही एक्सप्रेशन देती दिखती हैं. शेफाली शाह की एक्टिंग में कोई वैरायटी नजर नहीं आती. बस वो अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से खेलना जान चुकी हैं.

सबसे जरूरी बात अगर आपने सीरीज नहीं देखी है, तो देखने का प्रेशर ना लें. दिल्ली क्राइम का दूसरा सीजन वन टाइम वॉच है. ऐसा भी नहीं है कि अगर आपने इसका दूसरा सीजन मिस कर दिया, तो बहुत अच्छी सीरीज मिस हो गई. दिल्ली क्राइम का पहला सीजन देखने वालों को दूसरा सीजन निराश करने वाला ही है. पर हां देखने के लिये कुछ नहीं है, तो टाइम बिताने के लिये आप इसे देख सकते हैं. इतना सब जानने के बाद सीरीज देखने की चॉइस आपकी अपनी है. 

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