सनी देओल... नाम सुनते ही दिमाग में 'ढाई किलो का हाथ', पाकिस्तान में गूंजते डायलॉग और देशभक्ति से भरे किरदार याद आ जाते हैं. 'गदर', 'बॉर्डर' और 'गदर 2' जैसी फिल्मों से सनी ने बड़े पर्दे पर एक ऐसी इमेज बनाई, जिसे दर्शक आज भी खूब पसंद करते हैं. अब वह एक बार फिर उसी जोश और जज्बे के साथ लौट रहे हैं, लेकिन इस बार अंदाज थोड़ा अलग है.
हाल ही में रिलीज हुए 'बंटवारा 1947' के ट्रेलर ने साफ कर दिया है कि फिल्म सिर्फ भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत, मां की ममता और मजहब से ऊपर उठकर रिश्तों की बात भी करती है. सबसे खास बात ये है कि इस बार सनी देओल हिंदू तारा सिंह नहीं, बल्कि मुस्लिम सिकंदर मिर्जा के किरदार में नजर आएंगे.
तारा सिंह नहीं, सिकंदर मिर्जा... लेकिन तेवर वही पुराने
'गदर' में तारा सिंह पाकिस्तान जाकर अपनी पत्नी सकीना को वापस लेकर आया था. 'गदर 2' में उसने बेटे को दुश्मनों के चंगुल से छुड़ाया. अब 'बंटवारा 1947' में सनी एक ऐसी मां की रक्षा के लिए खड़े होंगे, जो न उनकी मां है और न ही उनके मजहब की. यही ट्रेलर का सबसे बड़ा सरप्राइज भी है.
फिल्म में सनी का किरदार सिकंदर मिर्जा भारत के बंटवारे के बाद मजबूरी में पाकिस्तान चला जाता है. वहां उसे जिस घर में रहने के लिए भेजा जाता है, वह पहले एक हिंदू परिवार का होता है. लेकिन उस घर की बुजुर्ग महिला वहां से जाने से साफ इनकार कर देती है. वह अपने घर को छोड़ने के बजाय उसी में रहने का फैसला करती है.
सिकंदर मिर्जा चाहें तो उन्हें जबरन बाहर निकाल सकता है, लेकिन वह ऐसा नहीं करता. उल्टा वह उनकी हिफाजत की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेता है. यहीं से कहानी इंसानियत और नफरत के बीच की जंग बन जाती है.
पाकिस्तानियों से भिड़ेंगे, लेकिन नफरत के लिए नहीं... इंसानियत के लिए
ट्रेलर में साफ दिखता है कि जब कुछ कट्टरपंथी उस बुजुर्ग महिला को घर से निकालने और बेइज्जत करने की कोशिश करते हैं, तब सिकंदर मिर्जा उनके सामने दीवार बनकर खड़ा हो जाता है. यानी इस बार लड़ाई सिर्फ सरहद की नहीं, बल्कि इंसानियत बचाने की है.
हालांकि ट्रेलर में सनी देओल का वही गुस्सा, वही दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और दुश्मनों को ललकारने वाला अंदाज भी देखने को मिलता है, जिसकी वजह से दर्शक उन्हें पसंद करते हैं.
ट्रेलर के डायलॉग्स बने सबसे बड़े हथियार
'बंटवारा 1947' का ट्रेलर सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि ऐसे डायलॉग्स से भरा है जो सीधे ध्यान खींच लेते हैं. जैसे- "मंदिर तोड़ना इस्लाम नहीं है." "कोई मजहब बुरा नहीं होता... अच्छा या बुरा इंसान होता है." "मां को हिंदू-मुसलमान में मत बांटिए... मां अपने आप में एक मजहब है." "तू मेरे बाप को नहीं जानता... वो न घर देखेंगे, न सरहद... सीधा घुसकर मारेंगे."
इन संवादों से साफ है कि फिल्म धर्म की बहस से ज्यादा इंसानियत का संदेश देने की कोशिश करती नजर आती है. शायद तभी सेंसर से बिना किसी न-नुकुर के पास किया गया है.
क्या तारा सिंह की इमेज से बाहर निकल पाएंगे सनी?
पिछले दो दशकों में सनी देओल की सबसे बड़ी पहचान तारा सिंह बन चुकी है. दर्शक उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ खड़े होने वाले, देशभक्ति से भरे किरदारों में देखना पसंद करते हैं. 'बंटवारा 1947' में किरदार बदल गया है. नाम बदल गया है. मजहब भी बदल गया है.
लेकिन ट्रेलर देखने के बाद एक बात साफ महसूस होती है कि सनी की स्क्रीन पर मौजूदगी, उनका गुस्सा और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाला अंदाज बिल्कुल वैसा ही है, जैसा दर्शकों ने 'गदर' और 'गदर 2' में देखा था. यही वजह है कि कई लोगों को ट्रेलर देखकर तारा सिंह की याद आ रही है.
क्या 'बंटवारा 1947' बनेगी 'गदर 3' की जमीन?
ट्रेलर में कई ऐसे पल हैं जो सनी देओल की देशभक्ति वाली इमेज को और मजबूत करते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार उनका किरदार मुस्लिम है, लेकिन सोच हिंदुस्तान और इंसानियत के साथ खड़ी नजर आती है.
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह फिल्म सनी देओल को उनकी पुरानी इमेज से बाहर निकालेगी या फिर उसी इमेज को और बड़ा बना देगी?
अगर फिल्म दर्शकों के दिलों तक पहुंचने में कामयाब रही, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि 'बंटवारा 1947' सिर्फ एक पीरियड ड्रामा नहीं, बल्कि सनी देओल की देशभक्ति वाली फिल्मों की विरासत को आगे बढ़ाने वाली फिल्म साबित हो सकती है. और शायद यही उनके फैंस के बीच 'गदर 3' जैसे बड़े इंतजार को भी और मजबूत कर दे.
14 अगस्त को होगी अग्निपरीक्षा
राजकुमार संतोषी के डायरेक्शन में बनी 'बंटवारा 1947' में सनी देओल के साथ शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह भी अहम भूमिकाओं में हैं. फिल्म को आमिर खान प्रोडक्शंस ने प्रोड्यूस किया है, संगीत ए.आर. रहमान का है और गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं.
अब देखना दिलचस्प होगा कि 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद यह फिल्म सिर्फ बंटवारे का दर्द दिखाती है या फिर सनी देओल के करियर में एक और यादगार देशभक्ति अध्याय जोड़ देती है.
आरती गुप्ता