'मुस्लिम विरोधी फिल्म है गदर', शबाना आजमी की बात सुन भड़के थे सनी देओल, बोले- वो तो पढ़ी लिखी हैं

‘गदर’ को लेकर कभी सनी देओल और शबाना आजमी के बीच तीखी बहस हुई थी. 25 साल बाद दोनों ‘बटवारा 1947’ में फिर साथ हैं. शबाना आजमी ने ‘गदर’ को भड़काऊ बताया था, जिस पर सनी देओल ने नाराजगी जताई थी.

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शबाना ने ‘गदर’ को बताया था भड़काऊ, सनी देओल ने दिया था करारा जवाब (Photo: Screengrabs) शबाना ने ‘गदर’ को बताया था भड़काऊ, सनी देओल ने दिया था करारा जवाब (Photo: Screengrabs)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

राजकुमार संतोषी की पार्टिशन ड्रामा फिल्म ‘बंटवारा 1947’ ने सनी देओल और दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी को एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ ला दिया है. दोनों की जोड़ी फिल्म में एक इमोशनल रिश्ता दिखाती है, लेकिन इस री-यूनियन ने करीब 25 साल पुराने उस विवाद की याद भी ताजा कर दी है, जब शबाना आजमी ने सनी की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ पर सवाल उठाए थे और सनी ने भी उन्हें करारा जवाब दिया था.

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2001 में ‘गदर’ ने मचाया था तहलका

साल 2001 में अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी ‘गदर: एक प्रेम कथा’ रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर तहलका मच गया. सनी देओल और अमीषा पटेल की इस फिल्म ने जबरदस्त कमाई की और उस दौर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई.

हालांकि, फिल्म सिर्फ कमाई को लेकर ही चर्चा में नहीं रही. पार्टिशन, राष्ट्रवाद और भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को जिस तरह दिखाया गया, उसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी छिड़ गई थी.

उस वक्त शबाना आजमी ने फिल्म के ट्रीटमेंट पर सवाल उठाया था. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने फिल्म को उकसाने वाला बताया था. शबाना का कहना था कि फिल्म राष्ट्रवाद, धर्म और पहचान जैसे मुद्दों को आपस में मिला देती है, लेकिन पार्टिशन के बाद लोगों ने जिस दर्द को झेला, उसकी जटिलता को ठीक से नहीं दिखाती. उन्होंने यह भी कहा था कि फिल्म मुस्लिमों को ‘दूसरे’ यानी अलग और विरोधी पक्ष के तौर पर पेश करती है.

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सनी देओल को आया था गुस्सा

शबाना आजमी की इस आलोचना पर सनी देओल चुप नहीं बैठे. उन्होंने एक इंटरव्यू में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. सनी ने कहा था कि शबाना की बातों से उन्हें काफी निराशा हुई. उनका मानना था कि शबाना पढ़ी-लिखी और समझदार एक्ट्रेस हैं, इसलिए फिल्म के खिलाफ ऐसे बयान उन्हें और ज्यादा खले.

सनी ने यह भी कहा था कि फिल्म की सफलता ने उन लोगों को जवाब दे दिया, जिन्होंने इसकी आलोचना की थी. उनके मुताबिक, दर्शकों ने फिल्म को जिस तरह अपनाया, उससे साफ हो गया कि लोगों को इसमें कुछ गलत नहीं लगा.

‘गदर’ का मकसद किसी की भावनाएं आहत करना नहीं था: सनी

सनी ने उस समय यह भी साफ किया था कि फिल्म का मकसद किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था. उनके मुताबिक, कहानी भले ही पार्टिशन के दौर में सेट थी, लेकिन फिल्म में किसी को भड़काने या धार्मिक तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं थी. उन्होंने फिल्म के दोनों मुख्य किरदारों को मासूम और सच्चा बताया था.

सनी ने तो आलोचकों पर यह तक कह दिया था कि जो लोग फिल्म को धार्मिक भावनाएं भड़काने वाली या देशविरोधी बता रहे थे, उनकी सोच ही विकृत है.

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25 साल बाद कहानी ने लिया दिलचस्प यू-टर्न

अब वक्त बदला है और कहानी भी. ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल और शबाना आजमी फिर एक साथ नजर आए. खास बात यह है कि फिल्म की कहानी भी पार्टिशन के दौर की है- यानी वही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, जिसने कभी दोनों कलाकारों को एक बहस के दो अलग-अलग पक्षों में खड़ा कर दिया था.

फिल्म में सनी सिकंदर नाम के एक मुस्लिम प्रवासी का किरदार निभा रहे हैं, जो लाहौर में एक बुजुर्ग हिंदू महिला की रक्षा और देखभाल करता है. इस बुजुर्ग महिला का रोल शबाना आजमी ने निभाया है. 

जिस ‘गदर’ को लेकर दोनों कलाकारों के विचार कभी आमने-सामने आ गए थे, करीब ढाई दशक बाद उसी पार्टिशन की पृष्ठभूमि में दोनों की कहानी टकराव से निकलकर इंसानियत और रिश्ते की तरफ जाती दिखाई दे रही है. 

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