नेपाल में आई भयानक आपदा के बाद तबाही का मंजर देखकर बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद मदद के लिए आगे आए हैं. वह खुद नेपाल पहुंचे और हालात का जायजा लिया. मौके पर पहुंचे सोनू सूद ने कहा कि जो कुछ उन्होंने अपनी आंखों से देखा, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस आपदा ने लोगों की जिंदगी पर कितना बड़ा असर डाला है.
सोनू सूद ने आजतक से बातचीत में लोगों से अपील की कि मुश्किल की इस घड़ी में सिर्फ नेपाल के लोग ही नहीं, बल्कि दुनिया के हर कोने से लोगों को आगे आना चाहिए और पीड़ितों के लिए खड़ा होना चाहिए. उनका कहना है कि अभी जितनी मदद की जरूरत है, उसके मुकाबले मदद के लिए सामने आए हाथ कम हैं.
सोनू सूद ने कहा- बिल्कुल, मुझे लगता है कि जब आप पूरा मंजर देखते हैं तो आपको पता चलता है कि किस लेवल का इम्पैक्ट आया होगा. किस तरह लोगों के घर नहीं बचे. आप सोचिए कि लोगों के क्या हाल हुए होंगे. तो मुझे लगता है कि सब लोगों को आगे आना चाहिए. दुनिया भर से जो भी लोग, जहां पर भी हैं, आगे आइए और प्लीज इन लोगों की मदद के लिए खड़ा होना बहुत जरूरी है, ताकि हम नेपाल को वापस अपने पैरों पर खड़ा कर पाएं.
‘अभी भी देख सकते हैं पानी का क्या हाल है’
सोनू सूद ने उस जगह के हालात पर भी बात की, जहां आपदा के एक हफ्ते बाद भी तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि जिस जगह वह खड़े थे, वहां पानी का बहाव और उसकी पहुंच देखकर उस वक्त की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
उन्होंने कहा- बिल्कुल, आप अभी भी देख सकते हैं कि पानी का क्या भाव है. उस समय तो पानी यहां तक था, पीछे तक था. ये पूरा का पूरा डूब गया होगा. वहां ऊपर मलबे तक लोग पहुंच चुके हैं. उनकी बातों से साफ था कि आपदा के कई दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं और लोगों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं.
‘पूरी कोशिश कर रहे हैं, पता लगा रहे हैं कि क्या-क्या कर सकते हैं’
सोनू सूद से जब पूछा गया कि उनकी तरफ से नेपाल के लोगों के लिए किस तरह की मदद की जाएगी, तो उन्होंने कहा कि उनकी टीम और उनके दोस्त लगातार मौके पर पहुंच रहे हैं. सभी मिलकर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस वक्त लोगों को सबसे ज्यादा किस चीज की जरूरत है और किस तरह उनकी मदद की जा सकती है.
उन्होंने कहा- पूरी कोशिश कर रहे हैं. हमारे बहुत सारे दोस्त-मित्र, सब लोग यहां पर पहुंच रहे हैं और पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या-क्या दिक्कतें हैं, क्या-क्या कर सकते हैं. और कोशिश करेंगे मिलकर वापस एक ऐसा मैसेज दें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग यहां पर आकर मदद कर पाएं.
सोनू सूद का फोकस सिर्फ मौके पर पहुंचने तक सीमित नहीं है. वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस राहत अभियान से जुड़ें और नेपाल को इस मुश्किल वक्त से बाहर निकालने में मदद करें.
एक हफ्ते बाद भी जारी है जिंदगी बचाने की जंग
दरअसल, ठीक एक सप्ताह पहले बुधवार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत के इलाके से शुरू हुई इस आपदा के बाद पानी और मलबा तेजी से निचले इलाकों की ओर बढ़ा. नेपाल-चीन सीमा पर बने कस्टम हाउस और इमिग्रेशन क्षेत्र के बाद ढुंचे के पास का इलाका और बाजार इसकी चपेट में आए. इसके बाद बेत्रावती, त्रिशूली और ढूंगे होते हुए पानी और मलबा मैदानी इलाकों की ओर बढ़ता गया और रास्ते में आने वाले घरों, बाजारों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया.
एक सप्ताह बाद मरने वालों का आंकड़ा 1,000 के पार पहुंच चुका है, जबकि करीब 4,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. लापता लोगों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है.
सबसे ज्यादा नुकसान त्रिशूली की पावर परियोजना में बताया जा रहा है, जहां कई लोग फंसे हुए हैं और उन्हें सुरंगों से बाहर निकालने के लिए अभियान जारी है. भारत, चीन, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल की सेना समेत दुनिया भर के विशेषज्ञ और बचाव दल इस अभियान में जुटे हैं. यहां लड़ाई सिर्फ मलबे से नहीं, बल्कि समय से भी है, क्योंकि हर गुजरते घंटे के साथ फंसे लोगों को बचाने की उम्मीद और चुनौती दोनों बढ़ रही हैं.
आशुतोष मिश्रा