सलमान खान की हीरोइन को भा गया बिहार, पहनी सूती साड़ी-लगाई बिंदी, महादलित टोले में जानवरों संग खेली!

सलमान खान की हीरोइन स्नेहा उलाल गया में फिल्म अर्धनायक की शूटिंग कर रही हैं. गांव की महिलाओं और जानवरों संग वक्त बिताकर बोलीं- बिहार के लोग बहुत नरम दिल हैं.

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स्नेहा उलाल बोलीं- बिहार के लोग बहुत प्यारे हैं स्नेहा उलाल बोलीं- बिहार के लोग बहुत प्यारे हैं

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:00 PM IST

बिहार में एक ओर जमुई में महिला से छेड़छाड़ की घटना को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस स्नेहा उलाल ने गया पहुंचकर वहां के लोगों की तारीफ की है. सलमान खान के साथ फिल्म लकी: नो टाइम फॉर लव से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली स्नेहा इन दिनों गया में अपनी फिल्म अर्धनायक की शूटिंग कर रही हैं. यहां गांव की महिलाओं के साथ उनका ऐसा अपनापन देखने को मिला कि वह उनके साथ जमीन पर बैठकर बातें करने लगीं.

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स्नेहा ने बिहार के लोगों को नरम दिल और प्यारा बताया. उन्होंने एक मजेदार किस्सा भी सुनाया कि गांव में बकरी के बच्चे का नाम रखने की बात पर सभी लोग हंसने लगे.

‘बहुत प्यारे लोग हैं, बहुत नरम दिल हैं’

ईटीवी को दिए बयान में स्नेहा उलाल ने गया के लोगों के साथ अपने अनुभव के बारे में बताया. उन्होंने कहा, “बहुत प्यारे लोग हैं. उनके साथ ही बैठी थी मैं और बता रही थी कि उनको बकरी के बच्चे का नाम रखना चाहिए, तो सब लोग हंस रहे थे. बिहार में आकर मुझे अच्छा लग रहा है, बहुत नरम दिल लोग हैं. मैं यह सब नहीं जानती थी पहले लेकिन इनसे मिलना जुलना हो गया और पता चला कितने अच्छे लोग हैं.”

स्नेहा ने बताया कि वह पहले पटना आ चुकी हैं, लेकिन गया में फिल्म की शूटिंग का यह उनका पहला अनुभव है. यहां के लोगों का व्यवहार और अपनापन उन्हें अच्छा लगा.

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उन्होंने कहा, “मैं पहले भी पटना आ चुकी हैं, लेकिन गया में फिल्म की शूटिंग का यह पहला अनुभव है. यहां के लोगों के व्यवहार और अपनापन अच्छा लगा. जब मेरी पहली फिल्म थी तो समय मैं काफी छोटी थी और अभिनय की दुनिया में नई थी. उस दौर में निर्देशक और कलाकार जैसा बताते थे, उसी तरह अभिनय करने की कोशिश करती थी.''

गांव की महिलाओं के बीच जमीन पर बैठकर करती हैं बातें

स्नेहा इन दिनों बोधगया की डुंगेश्वरी पहाड़ी से कुछ दूरी पर स्थित एक महादलित टोले में शूटिंग कर रही हैं. फिल्म की शूटिंग के बीच वह गांव की महिलाओं के साथ वक्त बिताती हैं और उनके रहन-सहन, परंपराओं और रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में जानती हैं. स्नेहा ने बताया कि उन्हें जानवर काफी पसंद हैं और शूटिंग के दौरान वह गांव में बकरी और गाय के बच्चों के साथ भी समय बिताती हैं.

‘अर्धनायक’ में निभा रही हैं लालमुनिया देवी का किरदार

स्नेहा फिल्म अर्धनायक में लालमुनिया देवी नाम की ग्रामीण महिला का किरदार निभा रही हैं. फिल्म की कहानी साहित्यकार शैवाल ने लिखी है और इसका निर्देशन अंजनी कुमार कर रहे हैं. फिल्म की कहानी ग्रामीण जीवन, लोक कलाओं के धीरे-धीरे खत्म होने और गांवों की चुनौतियों से जुड़ी है. पानी का संकट भी कहानी का अहम हिस्सा है.

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फिल्म की कहानी 1950 के दशक के ग्रामीण समाज की पृष्ठभूमि से भी जुड़ती है. स्नेहा के लिए गांव की महिलाओं से मिलना और उनके जीवन को करीब से समझना इस किरदार की तैयारी का अहम हिस्सा बन गया है.

मिट्टी के घर में शूटिंग, ग्रामीण महिलाओं को भी मिला काम

डुंगेश्वरी के महादलित टोले में करीब 40 वर्षीय मंजू देवी का मिट्टी का घर फिल्म की शूटिंग का अहम हिस्सा बना हुआ है. घर के आसपास सफाई कराई गई है और कैमरे व लाइटें लगाई गई हैं. ग्रामीण महिलाएं भी फिल्म के दृश्यों में शामिल हो रही हैं.

मंजू देवी की गोतनी दौलती देवी भी पिछले पांच-छह दिनों से शूटिंग में हिस्सा ले रही हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी फिल्म नहीं देखी, लेकिन कलाकारों के साथ शूटिंग करना उनके लिए नया अनुभव है. शूटिंग में शामिल ग्रामीणों को छोटे-छोटे काम और दृश्यों में हिस्सा लेने का मौका मिल रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुरुषों को करीब पांच से छह घंटे की शूटिंग के लिए 400 रुपये और महिलाओं को 300 रुपये तक मेहनताना दिया जा रहा है.

गांव की 21 वर्षीय सुनैना कुमारी ने फिल्म के एक दृश्य में कुएं के पास पानी भरने वाली महिलाओं के साथ हिस्सा लिया. उन्हें कुछ डायलॉग बोलने का मौका भी मिला. उनके लिए कैमरे के सामने अभिनय करना पहली बार का खास अनुभव रहा.

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गया में शूटिंग करना स्नेहा के लिए खास अनुभव

अर्धनायक की करीब 50 प्रतिशत शूटिंग गया जिले में हो रही है. शूटिंग के कारण गांव में कैमरे, लाइटें, फिल्मी कलाकार और प्रोडक्शन टीम के लोगों की आवाजाही बढ़ गई है. शाम तक चलने वाली शूटिंग के बाद कलाकार बोधगया लौट जाते हैं.

स्नेहा ने गया में फिल्म की शूटिंग को खास अनुभव बताते हुए कहा कि भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली के करीब काम करना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने महाबोधि मंदिर और बराबर पहाड़ जाने की इच्छा भी जताई.

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