राजकुमार राव की नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म शाहिद आखिरकार 13 साल बाद OTT पर आ गई है. हंसल मेहता के निर्देशन में बनी यह फिल्म वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आजमी की जिंदगी पर आधारित है, जिनकी 2010 में हत्या कर दी गई थी. फिल्म अब प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है, लेकिन इसकी डिजिटल रिलीज में हुई लंबी देरी ने एक नई बहस छेड़ दी है.
फिल्म के लेखक और एडिटर अपूर्व असरानी ने सवाल उठाया है कि आखिर शाहिद जैसी अहम फिल्म को इतने सालों तक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म क्यों नहीं मिला? उन्होंने अपनी पोस्ट में फिल्म की कहानी, असहमति की आवाज उठाने वालों के माहौल और 2026 में इसकी रिलीज के समय को लेकर कई सवाल किए.
‘शाहिद’ को OTT पर आने में 13 साल क्यों लगे?
अपूर्व असरानी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि शाहिद उन वकील शाहिद आजमी की कहानी है, जिन्होंने आतंकवाद से जुड़े कानूनों के तहत आरोपी बनाए गए लोगों का बचाव किया और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के लिए लड़ाई लड़ी. असरानी के मुताबिक, उस दौर में कई मुसलमानों को दोष साबित होने से पहले ही संदेह की नजर से देखा जाता था. उन्होंने लिखा कि शाहिद आजमी की हत्या उनके इसी साहस के कारण हुई.
असरानी ने फिल्म के इतने लंबे समय तक OTT पर उपलब्ध न होने पर सवाल उठाते हुए लिखा- मैं अक्सर सोचता रहा हूं कि शाहिद इतने लंबे समय तक बिना किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के क्यों रही. यह 2014 से एक साल पहले रिलीज हुई थी. फिर एक ऐसा राजनीतिक माहौल आया, जिसमें असहमति जताने वालों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आरोपियों के अधिकारों का बचाव करने वालों को लगातार संदेह की नजर से देखा जाने लगा.
‘तो अब क्यों? क्या डर की राजनीति के खिलाफ प्रतिरोध बढ़ रहा है?’
अपूर्व ने यह भी सवाल किया कि क्या फिल्मकारों और कलाकारों ने समय के साथ उन विषयों पर काम करना कम कर दिया, जिनमें असहमति, नागरिक अधिकारों और आरोपियों के कानूनी अधिकारों की बात होती है. उन्होंने फिल्म की 2026 में हुई OTT रिलीज के समय पर सवाल उठाते हुए लिखा- तो अब क्यों? 2026 में शाहिद जैसी फिल्म को आखिरकार स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म क्यों मिल रहा है? क्या माहौल बदल गया है? क्या डर की राजनीति के खिलाफ प्रतिरोध बढ़ रहा है?
असरानी ने इन सवालों को अपनी राय और चिंता के तौर पर रखा है. उन्होंने फिल्म की देरी का कोई प्रमाणित कारण नहीं बताया.
‘मुझे इस फिल्म पर गर्व है’
अपूर्व असरानी ने अपनी पोस्ट में फिल्म से जुड़े अपने अनुभव और इसके महत्व का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वजह चाहे जो भी रही हो, उन्हें शाहिद पर गर्व है. उनके मुताबिक, इस फिल्म ने उन्हें सह-लेखक और एडिटर के तौर पर पहचान दिलाई और उन्हें उस तरह के सिनेमा से दोबारा जोड़ा, जिस पर वह विश्वास करते हैं.
उन्होंने दर्शकों से फिल्म देखने की अपील करते हुए प्राइम वीडियो का शुक्रिया भी अदा किया.
2013 में रिलीज हुई थी फिल्म, राजकुमार राव को मिला था नेशनल अवॉर्ड
शाहिद अक्टूबर 2013 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. फिल्म में राजकुमार राव ने शाहिद आजमी का किरदार निभाया था. मोहम्मद जीशान अय्यूब, प्रबलिन संधू और बलजिंदर कौर भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. फिल्म की कहानी शाहिद आजमी के जीवन पर आधारित है, जिनकी 2010 में हत्या कर दी गई थी.
फिल्म का पहला प्रदर्शन 2012 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था. इसके बाद इसे कई फिल्म समारोहों में दिखाया गया. 61वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राजकुमार राव को बेस्ट एक्टर और हंसल मेहता को बेस्ट डायरेक्टर का पुरस्कार मिला था. फिल्म की पटकथा समीर गौतम सिंह और अपूर्व असरानी ने लिखी थी.
13 साल बाद शाहिद के OTT पर आने से दर्शकों को इस चर्चित फिल्म को फिर से देखने का मौका मिला है. वहीं, अपूर्व असरानी के सवालों ने इसकी लंबी डिजिटल अनुपलब्धता और ऐसी कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाने के मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क