'स्पाइडर मैन का नाम असलम होता...', बंटवारा में सनी के मुस्लिम होने पर बोले राजकुमार संतोषी

जब 'बंटवारा 1947' सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो कई लोगों को यह फिल्म बहुत पसंद आई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसने उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. अब डायरेक्टर ने इस पर चु्प्पी तोड़ी है.

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 'बंटवारा 1947' पर बोले राजकुमार संतोषी (Credit: AFP) 'बंटवारा 1947' पर बोले राजकुमार संतोषी (Credit: AFP)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:21 PM IST

राजकुमार संतोषी की डायरेक्ट की हुई फिल्म 'बंटवारा 1947', जिसमें सनी देओल पहली बार एक मुस्लिम किरदार में नजर आए हैं, उसे देखने वाले दर्शकों से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा है. हालांकि, डायरेक्टर राजकुमार संतोषी हैरान हैं कि इस तारीफ का असर बॉक्स ऑफिस के अच्छे आंकड़ों में नहीं दिख रहा है. फिल्ममेकर ने अब दर्शकों से अपील की है कि वे थिएटर आएं, फिल्म देखें और फिर अपनी राय बनाएं.

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Zoom को दिए इंटरव्यू में बात करते हुए संतोषी ने कहा, 'यह जरूरी है कि लोग बाहर निकलें और फिल्म देखें.' उन्होंने उन लोगों के रिस्पॉन्स का जिक्र किया, जिन्होंने बंटवारे पर बनी यह ड्रामा फिल्म पहले ही देख ली है

डायरेक्टर ने क्या कहा?
फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी ने थिएटर से बाहर निकलने वाले दर्शकों के इमोशनल रिस्पॉन्स के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा, 'लोग फोन करके तारीफ कर रहे हैं और जब थिएटर से बाहर निकलने वाले लोगों से पूछा जाता है कि फिल्म कैसी है, तो उनकी आंखों में आंसू होते हैं.'

संतोषी ने यह भी बताया कि कुछ दर्शकों ने 'बंटवारा 1947' की तुलना सनी देओल की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गदर' से की है, जो एक्टर की सबसे बड़ी कमर्शियल सफलताओं में से एक है. उन्होंने कहा, 'हर कोई कह रहा है कि 'यह गदर से बड़ी फिल्म है. यह गदर से बेहतर फिल्म है.'

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मुस्लिम किरदार बना असफलता की वजह?
डायरेक्टर का मानना ​​है कि सनी देओल का मुस्लिम किरदार शायद एक वजह हो सकती है जिसकी वजह से कुछ दर्शक फिल्म से दूर रह रहे हैं. डायरेक्टर ने कहा, 'मैं सोचता हूं कि वे क्यों नहीं आ रहे हैं? या तो उन्होंने सुना है कि सनी एक मुस्लिम किरदार निभा रहे हैं. सनी ने फिल्म में पहली बार एक मुस्लिम का किरदार निभाया है. तो वे फिल्म क्यों नहीं देख रहे हैं?'

संतोषी ने जोर देकर कहा, 'मैं चाहता हूं कि लोग आएं और फिल्म देखें. देखने के बाद, उन्हें अपनी राय रखने का पूरा हक है. वे मेरी आलोचना कर सकते हैं. मुझे कभी बुरा नहीं लगेगा. लेकिन उन्हें आकर फिल्म देखनी चाहिए. आखिर बात क्या है? क्या वे सोचते हैं – 'सनी एक मुस्लिम किरदार निभा रहे हैं. इसलिए हम फिल्म नहीं देखेंगे?'

स्पाइडर-मैन का दिया उदाहरण
इसके बाद फिल्ममेकर ने दुनिया भर में मशहूर सुपरहीरो स्पाइडर-मैन का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि क्या किसी किरदार का नाम या कहानी की जगह दर्शकों की सोच पर असर डालनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'अगर कल हमें पता चले कि स्पाइडर-मैन का नाम असलम शेख है और कहानी पाकिस्तान में सेट है, तो क्या वे स्पाइडर-मैन को नकार देंगे?' उन्होंने आगे कहा, 'यह भारत में इतनी बड़ी हिट रही. सिर्फ नाम और इलाके की वजह से. क्या स्पाइडर-मैन अपनी सारी खूबियां खो देगा? क्या उस स्थिति में उसका कोई अस्तित्व नहीं रहेगा? यह क्या बात हुई?'

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