करीब 98 फिल्मों का निर्देशन करने के बावजूद प्रियदर्शन खुद को पूरी तरह परफेक्ट नहीं मानते हैं. उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में चार दशक से ज्यादा का समय बिताया है. उनका कहना है कि आज भी जब उनकी कोई फिल्म सफल होती है, तो उन्हें यह भरोसा नहीं होता कि अगली फिल्म में भी वह वही सफलता हासिल कर पाएंगे या नहीं. उन्होंने अपनी फिल्म 'हैवान' के बारे में बात करते हुए इन बातों का खुलासा किया है.
प्रियदर्शन ने कहा कि उनकी यही सोच उन्हें फिल्मों में लगातार बदलाव लाने में मदद करती है. यही वजह है कि उनकी हर फिल्म एक जैसी नहीं होती और वह अलग-अलग तरह की फिल्में बनाने की कोशिश करते हैं.
40 साल में बदल गया दर्शक
प्रियदर्शन ने कहा, "मेरी जिंदगी में एक बहुत बड़ा स्ट्रगल चल रहा है. जब समय बदलता है, तो दर्शक भी बदल जाते हैं. 40 साल पहले जब मैंने फिल्म बनाना शुरू किया था, तब जो लोग फिल्में देखते थे, वे दर्शक आज फिल्में नहीं देख रहे हैं. इसलिए आपको खुद को बदलना पड़ता है."
उन्होंने आगे कहा, "जब मैंने 40 साल पहले शुरुआत की थी, तब फिल्में देखने वाला दर्शक आज के दर्शक से बिल्कुल अलग है. आपको समय के साथ खुद को बदलना भी पड़ता है."
पुरानी फिल्मों को नए अंदाज में पेश करने को लेकर प्रियदर्शन का अपना अलग तरीका है. उनका कहना है कि रीमेक बनाते समय वह ओरिजिनल फिल्म को बिल्कुल उसी तरह दोहराने के बजाय उसकी कहानी को नए तरीके से पेश करने की कोशिश करते हैं. यही उनकी फिल्मों की खासियत भी है.
प्रियदर्शन का मानना है कि समय के साथ फिल्म में बदलाव जरूरी है. उन्होंने कहा, "मेरे साथ काम कर चुके बहुत से अच्छे फिल्ममेकर हैं, जो आज घर पर बिना काम के बैठे हैं, क्योंकि वे समय के साथ नहीं बदले. इसलिए यह जानना जरूरी है कि आज लोग क्या सोचते हैं."
रीमेक में सिर्फ कहानी रखते हैं प्रियदर्शन
फिल्मों के रीमेक को लेकर भी प्रियदर्शन ने अपने तरीके के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा, "जब भी मैं रीमेक बनाता हूं, मैं सिर्फ कहानी को अपनाता हूं. बाकी चीजों में मैं देखता हूं कि क्या बदला जा सकता है. जब मैंने 'विरासत' और 'गर्दिश' बनाई, तब दोनों फिल्मों में ओरिजिनल कहानी से काफी बदलाव किए थे."
प्रियदर्शन का मानना है कि साउथ इंडियन फिल्मों को हिंदी दर्शकों के लिए बनाते समय सिर्फ भाषा बदल देना पर्याप्त नहीं है. कहानी और उसके ट्रीटमेंट में भी काफी बदलाव करना पड़ता है. उनका कहना है कि कई हिंदी रीमेक इसलिए दर्शकों से कनेक्ट नहीं कर पाते, क्योंकि रीमेक बनने के बाद भी उनमें साउथ इंडियन फिल्म की झलक बनी रहती है.
उन्होंने कहा, "मैं अपनी फिल्मों में ऐसा नहीं करता हूं. मैं चीजों को बदलता हूं और यही चीजें मेरी फिल्मों में काम कर जाती हैं."
समय के साथ बदलाव है जरूरी
प्रियदर्शन ने यह भी बताया कि टेक्नोलॉजी में हुए बदलावों के कारण पुरानी कहानियों को उसी रूप में दोबारा बनाना आसान नहीं है. उन्होंने कहा, "मेरी बहुत सी पुरानी फिल्में हैं, जिन्हें अगर मैं फिर से बनाऊंगा, तो मुझे उनमें बहुत से बदलाव करने होंगे, क्योंकि उस समय मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे. इसलिए आज के समय के अनुसार हमें फिल्म बनानी होगी, बस कहानी वही रहेगी."
प्रियदर्शन ने इस बारे में भी बात की कि वह एक ही तरह की फिल्में क्यों नहीं बनाते हैं. उन्होंने कहा, "आप एक ही कहानी बता सकते हैं, लेकिन उसी तरीके से नहीं. आपको उसे अलग तरीके से बताना होगा. मैं इस तरीके को अपनाने में कामयाब रहा और इसी वजह से मैं आज आपके सामने बैठा हूं."
प्रियदर्शन का कहना है कि कहानी भले ही वही रहे, लेकिन उसे सुनाने का तरीका समय के साथ बदलना चाहिए. यही बदलाव उन्हें लगातार अलग तरह की फिल्में बनाने के लिए प्रेरित करता है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क