‘शक्ल देखी है अपनी?’ माता-पिता के लाड को तरसे नाना पाटेकर, दोस्त भी देते थे ताना, खुद किया था रिवील

जिस नाना पाटेकर को कभी कहा गया था ‘तुम्हें कौन देखेगा’, उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग से करोड़ों दिल जीत लिए. उनके निधन के बाद उनका ये किस्सा फिर भावुक कर रहा है.

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परिवार के प्यार को तरसे नाना पाटेकर (Photo: ITGD) परिवार के प्यार को तरसे नाना पाटेकर (Photo: ITGD)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

‘शक्ल देखी है अपनी? तुम्हें कौन देखना चाहेगा?’ कभी नाना पाटेकर को उनके ही एक दोस्त ने यह बात कहकर चिढ़ाया था. तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि जिस चेहरे को लेकर नाना को ताने सुनने पड़े, वही चेहरा आगे चलकर भारतीय सिनेमा की सबसे दमदार पहचान बन जाएगी. नाना पाटेकर आज हमारे बीच नहीं हैं. 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर ने उनके चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है. ऐसे में उनकी जिंदगी से जुड़ा यह किस्सा बताता है कि नाना ने सिर्फ फिल्मी दुनिया में जगह नहीं बनाई, बल्कि अपनी कमियों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया था.

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जब नाना को लगता था- ‘मुझे कोई क्यों देखेगा?’

नाना पाटेकर ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उनके दौर में ज्यादातर हीरो बेहद हैंडसम और ‘चॉकलेट बॉय’ इमेज वाले हुआ करते थे. ऐसे में उन्हें अपना चेहरा देखकर अक्सर लगता था कि आखिर कोई उन्हें पर्दे पर क्यों देखना चाहेगा.

उन्होंने यह भी बताया था कि बचपन में उन्हें लगता था कि उनके माता-पिता उनके भाइयों की तुलना में उन्हें कम पसंद करते हैं, क्योंकि वह उतने अच्छे दिखने वाले नहीं थे. लेकिन फिर जिंदगी में थिएटर आया और नाना को अपनी पहचान बनाने का रास्ता मिल गया.

एक नाटक में जब उनके पिता उन्हें देखने मुंबई से आए, तो नाना को लगा कि एक्टिंग शायद वह जरिया है, जिससे वह अपने माता-पिता का ध्यान अपनी ओर खींच सकते हैं. यहीं से उनका थिएटर का सफर शुरू हुआ.

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दोस्त ने कहा- ‘शक्ल देखी है अपनी?’

थिएटर के शुरुआती दिनों में नाना के एक दोस्त ने उन्हें एक्टिंग छोड़कर कोई नौकरी करने की सलाह दी थी. वजह थी उनका लुक. नाना ने उस किस्से को याद करते हुए बताया था कि दोस्त ने उनके चेहरे का मजाक उड़ाते हुए कहा था- ‘आईने में अपनी शक्ल देखी है? तुम्हें कौन देखना चाहेगा?’

वह दोस्त खुद काफी हैंडसम था. लेकिन नाना ने उस ताने को अपनी जिंदगी की दीवार नहीं बनने दिया. इसके उलट थिएटर में जब नाना ने देखा कि अच्छे दिखने वाले लोग भी उन्हें देखने आ रहे हैं और दूर बैठकर उनका अभिनय देख रहे हैं, तो उनका आत्मविश्वास लौट आया. उनका कॉम्प्लेक्स धीरे-धीरे खत्म हो गया.

नाना की सोच बेहद सीधी थी- चेहरा किसी को ज्यादा से ज्यादा दो मिनट तक प्रभावित कर सकता है, उसके बाद आपकी कला ही काम आती है.

‘मेरे जैसे चेहरे के साथ 50 साल टिक गया…’

समय बीतता गया और वही नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल हो गए. आमिर खान के साथ बातचीत में तो उन्होंने अपने लुक को लेकर मजाक करते हुए कहा था कि आमिर उनसे ज्यादा अच्छे दिखते हैं और फिर हंसते हुए बोले कि ‘मेरे जैसे चेहरे के साथ मैं इंडस्ट्री में 50 साल टिक गया.’ यह बात सिर्फ मजाक नहीं थी. यह नाना के सफर की पूरी कहानी थी.

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जिस चेहरे को कभी किसी ने पर्दे के लायक नहीं समझा था, उसी चेहरे पर गुस्सा, दर्द, जुनून, बेबसी और इंसानियत के इतने रंग दिखाई दिए कि दर्शक उनके किरदारों को भूल ही नहीं पाए. उन्होंने साबित किया कि स्टार बनने के लिए सिर्फ खूबसूरत चेहरा नहीं, बल्कि आंखों में आग, आवाज में दम और किरदार में जान डालने का हुनर चाहिए.

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