बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री दसानी एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई फिल्म या ग्लैमर नहीं, बल्कि उनका अपना शाही परिवार है. गणेश चतुर्थी के मौके पर सांगली के ऐतिहासिक गणपति पंचायतन मंदिर में भाग्यश्री के पहुंचते ही पटवर्धन परिवार में उत्तराधिकार को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया कि मामला मंदिर की आरती से निकलकर सीधे राजघराने की गद्दी तक पहुंच गया.
दरअसल, भाग्यश्री करीब चार साल बाद सांगली लौटी थीं. गणेश उत्सव के दौरान वह परिवार के पारंपरिक गणेशोत्सव में शामिल होने मंदिर पहुंचीं और आरती की. एक्ट्रेस ने बताया कि उनके पिता विजयसिंहराजे पटवर्धन की तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें लगा कि बेटियों में से किसी एक को परिवार की परंपरा आगे बढ़ाने के लिए आगे आना चाहिए. लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहीं से आया.
भाग्यश्री की आरती पर पिता ने उठाए सवाल
टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भाग्यश्री के पिता विजयसिंहराजे ने उनकी इस पहल को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने साफ कहा कि वह पूरी तरह ठीक हैं और उन्हें समझ नहीं आया कि उनकी गैर-मौजूदगी में भाग्यश्री ने मंदिर में यह रस्म क्यों निभाई.
उन्होंने यहां तक सवाल उठा दिया कि इसके पीछे आखिर ‘क्या राजनीति’ है और एक्ट्रेस को कौन सपोर्ट कर रहा है. विजयसिंहराजे ने कहा कि औपचारिक मूर्ति की पूजा का अधिकार सिर्फ उनका और उनकी पत्नी राजलक्ष्मीराजे पटवर्धन का है. उनके मुताबिक, परिवार की परंपराओं को सिर्फ इसलिए नहीं बदला जा सकता क्योंकि कोई बेटी परिवार का हिस्सा है.
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी को भी यह रवैया नहीं अपनाना चाहिए कि ‘मैं बेटी हूं, इसलिए मैं कुछ भी कर सकती हूं.’ साथ ही उन्होंने दोहराया कि आदित्यराजे ही उनके एकमात्र उत्तराधिकारी हैं.
पिता ने बेटी के सामने साफ कर दिया- गद्दी का वारिस कौन?
विजयसिंहराजे ने आदित्यराजे के नाम पर किसी भी तरह की अनिश्चितता से इनकार किया. उन्होंने कहा कि आदित्यराजे को कमजोर करने या उनके खिलाफ किसी तरह की साजिश की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उनके मुताबिक, आदित्यराजे जिस तरह बड़ों का सम्मान करते हैं, वह उनके संस्कारों को दिखाता है और भविष्य में वही परिवार की विरासत को आगे बढ़ाएंगे.
गणपति उत्सव में शुरू हुआ मामला देखते ही देखते ‘बेटी बनाम गोद लिए बेटे’ के उत्तराधिकार विवाद की शक्ल लेता नजर आया.
आखिर कौन हैं आदित्यराजे?
आदित्यराजे कोई बाहरी व्यक्ति नहीं हैं. वह मंदिर ट्रस्ट के मैनेजर और भाग्यश्री के ममेरे भाई जयदीप अभ्यंकर के बेटे हैं. जनवरी 2024 में पटवर्धन परिवार ने उन्हें गोद लिया था और इसके बाद उन्हें सांगली वंश और परिवार की परंपराओं का उत्तराधिकारी घोषित किया गया.
राजलक्ष्मीराजे पटवर्धन ने भी इस फैसले का समर्थन किया. उनका कहना है कि परिवार में कोई बेटा नहीं था, इसलिए आदित्यराजे को गोद लिया गया और उन्हें अपने बेटे की तरह ही पाला जा रहा है. उन्होंने साफ कहा कि परिवार ने आदित्यराजे को संस्थान का आधिकारिक उत्तराधिकारी स्वीकार कर लिया है.
मंदिर के बाहर भी हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
मामला सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहा. खबरों के मुताबिक, मंदिर परिसर के बाहर भाग्यश्री और ट्रस्ट मैनेजर जयदीप अभ्यंकर के बीच आरती में उनके शामिल होने को लेकर बहस भी हुई. बाद में इस कथित बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इसके बाद चर्चा सिर्फ भाग्यश्री और उनके परिवार तक नहीं रही, बल्कि पुराने शाही परिवारों में बेटियों की भूमिका, गोद लिए गए वारिस और सदियों पुरानी उत्तराधिकार परंपराओं तक पहुंच गई.
पटवर्धन परिवार का इतिहास सांगली रियासत से जुड़ा रहा है. परिवार के पूर्वज मराठा पेशवाओं की सेवा करने वाले सेनापति रहे और आजादी के बाद भारतीय संघ में विलय से पहले सांगली रियासत के शासक थे.
ऐसे में गणपति उत्सव के दौरान शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ एक पारिवारिक रस्म का मामला नहीं रह गया है. एक तरफ भाग्यश्री का परिवार की परंपराओं को आगे बढ़ाने का दावा है, तो दूसरी तरफ उनके पिता ने आदित्यराजे को उत्तराधिकारी बनाए जाने के फैसले पर अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है. वहीं भाग्यश्री ने अभी तक कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है.
अब देखना दिलचस्प होगा कि पटवर्धन राजघराने का यह पारिवारिक विवाद आगे क्या नया मोड़ लेता है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क