सारण: बिहार का वो जिला जिसने सूबे को दिए सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री

बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सत्ता के बचाए रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं तो तेजस्वी यादव सत्ता में वापसी के लिए बेताब है. ऐसे में बिहार का सारण जिला जो आरजेडी प्रमुख लालू यादव से लेकर राबड़ी देवी तकर की कर्मभूमि रही है. सूबे का सारण ऐसे जिला है, जहां से पांच मुख्यमंत्री बिहार को मिले हैं. ऐसे में यहां की सियासी कहानी काफी दिलचस्प है.

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लालू प्रसाद यादव लालू प्रसाद यादव

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST
  • सारण से पहले मुख्यमंत्री महामया प्रसाद सिन्हा बने
  • लालू प्रसाद यादव की कर्मभूमि रहा है सारण जिला
  • दरोगा प्रसाद परसा सीट से जीतकर सीएम बने थे

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए और महागठबंधन के बीच सियासी जोर-आजमाइश तेज है. नीतीश कुमार सत्ता को बचाए रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं तो तेजस्वी यादव सत्ता में वापसी के लिए बेताब हैं. बिहार का सारण जिला आरजेडी प्रमुख लालू यादव से लेकर राबड़ी देवी तकर की कर्मभूमि रही है. सूबे का सारण ऐसा जिला है, जहां से पांच मुख्यमंत्री बिहार को मिले हैं. ऐसे में यहां की सियासी कहानी काफी दिलचस्प है. 

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बता दें कि गंगा, गंडक और घाघरा नदियों से घिरा बिहार के सारण जिले को प्राचीन काल में 'हिरण का जंगल' भी कहा जाता था. हालांकि, ब्रिटिस विद्वान जेनरल कनिंघम ने इसे मौर्य सम्राट अशोक के काल में यहा लगाए गए धम्म स्तंभों को 'शरण' से जोड़कर देखा. भोजपुरी भाषा को बिहार की पहचान के तौर पर देखा जाता है. सारण का जिला मुख्यालय छपरा है और यह भोजपुर के इलाके में आता है. बिहार की सियासत में सारण क्षेत्र का खासा दखल रहा है. चाहे देश के आजादी का आंदोलन रहा हो या फिर बिहार की राजनीति. यहां की सियासी भूमि दिग्गजों का पुराना अखाड़ा रही है.

आजादी के करीब दो दशक के बाद भी सारण से जिले से ही जीतकर महामया प्रसाद सिन्हा बिहार के मुख्यमंत्री बने थे. समाजवादी नेता महामया प्रसाद सिन्हा सारण की राजनीति में बड़ा नाम हुआ करते थे. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले वे सारण के पहले नेता थे. 1967 में 1968 तक वे मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद सारण के परसा के कांग्रेसी विधायक दारोगा प्रसाद राय  फरवरी, 1970 में मुख्यमंत्री बने. हालांकि, वो एक साल भी सत्ता पर काबिज नहीं रह सके. 

साल 1977 में सारण के सोनपुर विधानसभा सीट से रामसुंदर दास विधायक चुने गए. यहीं के विधायक रहते ही रामसुंदर 1979 में बिहार के मुख्यमंत्री बने. हालांकि, 1977 में चुनाव नतीजे आने के बाद कर्पूरी ठाकुर सीएम बने थे, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे हुए कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और दलित नेता रामसुंदर दास मुख्यमंत्री बने. वो अप्रैल 1979 में से लेकर फरवरी 1980 तक इस कुर्सी पर रहे. बिहार में एकलौते मुस्लिम मुख्यमंत्री बनने वाले अब्दुल गफूर भी इसी इलाके से आते थे, लेकिन बाद में उनका क्षेत्र गोपालगंज जिले में चला गया. 

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सारण जिले से लालू यादव का गहरा राजनीतिक नाता है. लालू प्रसाद छपरा के सांसद रहते 1990 में पहली बार मुख्यमंत्री बने. लालू 1990 से 1997 तक सूबे के मुख्यमंत्री रहे. पहली बार सीएम बनने के बाद संसद से इस्तीफा देकर वे वैशाली के राघोपुर के विधायक निर्वाचित हुए थे. हालांकि, वो इससे पहले 1980 और 1985 में सारण जिले के सोनपुर के भी विधायक रहे हैं. लालू यादव के जेल जाने के बाद उनकी राजनीतिक विरासत राबड़ी देवी ने संभाली. हालांकि, राबड़ी देवी सारण से विधायक तो नहीं रही, लेकिन राजनीतिक दखल उनका पूरा रहा है. 2010 में उन्होंने सोनपुर से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं सकी थी. 

बता दें कि बिहार में कुल 33 मुख्यमंत्री बने हैं, जिनमें से 20 कांग्रेसी और 13 अन्य दल के नेताओं ने सत्ता की कमान संभाली है. राबड़ी देवी, जगन्नाथ मिश्रा और भोला पासवान तीन बार मुख्यमंत्री रहे, जबकि नीतीश कुमार को चार बार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला है. हालांकि बिहार में सात बार राष्ट्रपति शासन भी लगा है. 
 

 

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