TMC का किला भेदने के लिए BJP ने चला ये 'ब्रह्मास्त्र', बंगाल में 207 सीटों पर कब्जा

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बीजेपी की जीत के पीछे मजबूत रणनीति, आक्रामक संगठन और मुद्दा आधारित प्रचार अहम रहे. पार्टी ने सुशासन, भ्रष्टाचार, घुसपैठ और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाया. अमित शाह की माइक्रोमैनेजमेंट रणनीति और बूथ स्तर तक सक्रियता ने बड़ा असर डाला. मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी बीजेपी ने बढ़त बनाई. 207 सीटों के साथ पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत पार किया.

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TMC के गढ़ में BJP ने 74 सीटें जीतीं. Photo ITG TMC के गढ़ में BJP ने 74 सीटें जीतीं. Photo ITG

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:28 PM IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के पीछे पार्टी की बहुस्तरीय रणनीति, आक्रामक संगठनात्मक विस्तार और मुद्दा आधारित प्रचार को मुख्य वजह माना जा रहा है. पार्टी सूत्रों का दावा है कि बीजेपी ने 'पांच ब्रह्मास्त्र' के जरिए न केवल तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने मजबूत गढ़ को तोड़ा, बल्कि राज्य की राजनीति की दिशा भी बदल दी.

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ये मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान सुशासन, कथित सिंडिकेट राज, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठाया. इसके साथ ही पार्टी ने सांस्कृतिक पहचान और खान-पान को लेकर बनाए गए 'नैरेटिव' का जवाब देने पर भी विशेष ध्यान दिया. महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा भी अभियान के केंद्र में रहा, जिसने खासकर शहरी और महिला मतदाताओं को प्रभावित किया.

गृह मंत्री अमित शाह की 'माइक्रोमैनेजमेंट' रणनीति
पार्टी के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की 'माइक्रोमैनेजमेंट' रणनीति इस जीत की सबसे अहम कड़ी रही. बूथ स्तर तक की योजना, हर मतदाता तक पहुंचने की रणनीति और 80 हजार से अधिक बूथों पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप दिया. बताया गया कि शाह ने करीब 15 दिनों तक राज्य में डेरा डालकर चुनावी अभियान की कमान संभाली, जिससे संगठन को नई ऊर्जा मिली.

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मुस्लिम आबादी वाले एरिया में बीजेपी ने 56 सीटें जीती
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने उन सीटों पर भी जीत दर्ज की, जिन्हें लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता था. खास बात यह रही कि उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में, जहां मुस्लिम आबादी 26 से 66 प्रतिशत के बीच है, वहां भी बीजेपी ने 118 में से 56 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. 2021 में इन इलाकों में पार्टी को केवल 14 सीटें मिली थीं.

BJP के खाते में 207 सीटें
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत से भी आगे निकलते हुए सरकार बनाने का रास्ता साफ किया. पार्टी का वोट शेयर भी 7 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 46 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे उसे 130 अतिरिक्त सीटों का फायदा मिला.

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव के पहले चरण में ही बीजेपी ने स्पष्ट बढ़त बना ली थी. 152 सीटों में से 117 सीटें जीतकर पार्टी ने अपनी जीत की दिशा तय कर दी थी. दूसरे चरण में भी पार्टी ने बड़ी छलांग लगाते हुए 90 सीटें हासिल कीं, जो 2021 के मुकाबले कई गुना अधिक है.

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TMC के गढ़ में BJP ने 74 सीटें अपने नाम की 
इसके अलावा, बीजेपी ने 119 ऐसी सीटों में से 74 सीटें जीत लीं, जहां टीएमसी पिछले 15 वर्षों से लगातार जीत दर्ज कर रही थी. वहीं 10 साल से टीएमसी के कब्जे वाली 162 सीटों में से 102 पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया. यह बदलाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि मतदाताओं के रुझान में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.

पार्टी ने उत्तर बंगाल में भी शानदार प्रदर्शन किया, जहां कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और कालिम्पोंग जैसे जिलों में उसे भारी सफलता मिली. दक्षिण बंगाल में भी पूर्व मेदिनीपुर, पुरुलिया और झाड़ग्राम जैसे क्षेत्रों में पार्टी ने मजबूत पकड़ बनाई.

बीजेपी सूत्रों का मानना है कि इस जीत के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व, अमित शाह की चुनावी रणनीति और जनता की बदलाव की इच्छा प्रमुख कारक रहे. पार्टी का कहना है कि यह जनादेश सिर्फ एकतरफा नहीं, बल्कि राज्य में वैचारिक और संगठनात्मक बदलाव का प्रतीक है.

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के इस चुनावी परिणाम ने न केवल राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि राज्य में मतदाता अब नए विकल्पों को लेकर अधिक खुलकर सोच रहे हैं.

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