मालदह (जिसे मालदा या मालदह भी कहा जाता है), पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है. यह विधानसभा क्षेत्र ओल्ड मालदा नगर पालिका, ओल्ड मालदा, इंग्लिशबाजार ब्लॉक के नरहट्टा ग्राम पंचायत और हबीबपुर ब्लॉक के ऐहो, ऋषीपुर और श्रीरामपुर ग्राम पंचायतों को मिलाकर बना है. यह मालदह उत्तर (लोकसभा) सीट के
अंतर्गत आता है.
यह इलाका भारत के प्रसिद्ध राजनेता ए.बी.ए. गनी खान चौधरी, जिन्हें प्यार से 'बरकतदा' कहा जाता है, से जुड़ा है. इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में रेलवे मंत्री रहते हुए उन्होंने कोलकाता मेट्रो और सर्कुलर रेलवे की शुरुआत की और मालदा को एक बड़ा रेलवे जंक्शन बनने में मदद की. इसके अलावा, यह क्षेत्र अपने स्वादिष्ट फजली आमों के लिए भी प्रसिद्ध है, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान है.
मालदह विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1951 में हुई थी और तब से यहां अब तक 18 बार चुनाव हो चुके है. 1972 में एक उपचुनाव भी हुआ, जब उस समय के विधायक ने मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे के लिए सीट खाली कर दी थी.
यहां कांग्रेस पार्टी कुल 11 बार जीतकर सबसे ज्यादा बार विजयी रही है, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 6 बार जीत हासिल की. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों दलों का प्रभाव घटा है. CPI ने आखिरी बार 2011 में और कांग्रेस ने 2016 में चुनाव जीता था.
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के गोपाल चंद्र साहा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उज्ज्वल कुमार चौधरी को 15,456 वोटों से हराया. कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही और CPI ने चुनाव नहीं लड़ा, क्योंकि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी.
भाजपा का असर लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिला. खगेन मुर्मू ने भाजपा के टिकट पर मालदह उत्तर लोकसभा सीट 2019 और 2024 दोनों में जीती. 2019 में भाजपा ने मालदह विधानसभा क्षेत्र में 54,345 वोटों से बढ़त बनाई, जो 2024 में बढ़कर 63,429 हो गई.
2021 विधानसभा चुनाव में मालदह में 2,32,531 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें लगभग 24.90% (57,900) मुस्लिम मतदाता, 29% (67,434) अनुसूचित जाति के मतदाता और 9.49% (22,067) अनुसूचित जनजाति के मतदाता थे. क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण है, जहां 63.86% लोग गांवों में और 36.14% लोग शहरी क्षेत्रों में रहते हैं. मतदान का प्रतिशत हमेशा 80% से अधिक रहा है. 2024 तक यह संख्या बढ़कर 2,45,962 हो गई.
मालदह की जमीन समतल और उपजाऊ है, जो महानंदा और कालिंदी नदियों के मैदान में फैली हुई है. गंगा नदी मणिकचक के पास बंगाल में प्रवेश करती है, जिससे क्षेत्र में हर साल बाढ़ का खतरा रहता है. यहां की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है. क्षेत्र की मुख्य फसलें धान, जूट, दालें और तिलहन हैं. मालदा देश में उच्च गुणवत्ता वाले जूट का सबसे बड़ा उत्पादक है. यहां के आम बागान और शहतूत की खेती आम व्यापार और रेशम उद्योग को बढ़ावा देते हैं.
मालदह की सांस्कृतिक विरासत भी समृद्ध है. यहां की लोक संस्कृति में ‘गंभीरा’ एक प्रमुख परंपरा है, जिसमें आम जीवन की खुशियों और दुखों को प्रस्तुत किया जाता है. अंग्रेजों ने 17वीं शताब्दी में महानंदा नदी के किनारे उद्योग लगाए थे और इस क्षेत्र को 'अंग्रेजबाजार' या 'English Bazar' नाम दिया गया था. यहां पास में ही प्राचीन राजधानी गौर और पांडुआ के खंडहर भी स्थित हैं.
मालदह रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. मालदा टाउन रेलवे स्टेशन उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों का मुख्य जंक्शन है. जिला मुख्यालय इंग्लिशबाजार, ओल्ड मालदा से सिर्फ 5 किमी दूर है. आस-पास के अन्य शहरों में मणिकचक (35 किमी), कालियाचक (30 किमी), और गाजोल (25 किमी) शामिल हैं. राज्य की राजधानी कोलकाता यहां से लगभग 347 किमी दूर है.
लगातार तीन बड़ी जीत, दो बार लोकसभा और एक बार विधानसभा में के बाद भाजपा 2026 विधानसभा चुनाव में पूरे आत्मविश्वास और जोश के साथ उतरेगी. लेकिन पार्टी की रणनीति यही होगी कि वाममोर्चा और कांग्रेस का गठबंधन टीएमसी के वोट काटे, जिससे भाजपा अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सके.
(अजय झा)