उत्तर प्रदेश में योगी मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब बीजेपी का पूरा फोकस संगठनात्मक फेरबदल पर आ गया है. 2027 के चुनावी गियर में चल रही बीजेपी के अंदर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम को लेकर फाइनल राउंड का मंथन शुरू हो गया है, जिसके चलते लखनऊ से दिल्ली तक सियासी सरगर्मी तेज है. बीजेपी ने प्रदेश में संगठन नया रूप ही नहीं देना चाह रही बल्कि सियासी तेवर और कलेवर को भी बदलने का प्लान है.
यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव है और बीजेपी के सामने सत्ता की हैट्रिक लगाने की चुनौती है. 2024 में बीजेपी के बिगड़े सियासी समीकरण को दुरुस्त करने के लिए पार्टी नेतृत्व ने सूबे में संगठन की कमान पंकज चौधरी को सौंप रखी है. प्रदेश अध्यक्ष बनने के छह महीने के बाद पंकज चौधरी की टीम गठन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है.
दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम के साथ उत्तर प्रदेश बीजेपी नेताओं की दूसरे राउंड की बैठक होने जा रही है. पिछले हफ्ते नितिन नवीन, बीएल संतोष के साथ हुई बैठक में पंकज चौधरी ने प्रदेश कार्यकारिणी के संभावित नामों की सूची सौंपी थी. अब फिर से यूपी बीजेपी नेताओं की टीम नवीन के साथ दिल्ली में बैठक होने जा रही, जिसमें प्रदेश की नई टीम पर फाइनल मुहर लग सकती है?
बीजेपी का यूपी में बड़े बदलाव का प्लान
उत्तर प्रदेश में बीजेपी बड़े सांगठनिक बदलाव की तैयारी में है. यूपी बीजेपी संगठन में बड़े बदलाव की आहट है. पुराने चेहरों की जगह अब नए चेहरे संगठन में लिए जा सकते हैं. दिल्ली में 2 और 3 जून को नितिन नवीन के साथ यूपी बीजेपी नेताओं की बड़ी बैठक है.
यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह दिल्ली में है. इन दोनों नेताओं की कई राउंड की मुलाकात राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े से हो चुकी है. उत्तर प्रदेश के कई मंत्री और दोनों ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक को दिल्ली बुलाया गया है. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के साथ प्रदेश नेताओं की बैठक होगी, जिसमें पंकज चौधरी की नई टीएम पर फाइनल मुहर लगेगी.
टीम पंकज में नए चेहरों को मिलेगा मौका
बीजेपी की नई प्रदेश टीम में करीब 55 से 60 प्रतिशत नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं. बीजेपी अब प्रदेश संगठन में युवा ऊर्जा के साथ कुछ अनुभवी प्रबंधन का मिश्रण तैयार कर रही है. पार्टी नेतृत्व मानता है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2027 करीब हैं, ऐसे में पूरी टीम बदलना जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए एक ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है जिसमें नए कार्यकर्ताओं को मौका भी मिले और चुनावी अनुभव रखने वाले नेताओं की उपयोगिता भी बनी रहे. साथ ही प्रदेश और क्षेत्रीय संगठन को नया रूप देने में भी जुट गई है।
दरअसल, बंगाल, असम और पुडुचेरी में हालिया चुनावी सफलता ने भाजपा का आत्मविश्वास बढ़ाया है. पार्टी अब उसी आक्रामक चुनावी मोड को उत्तर प्रदेश में लागू करना चाहती है. माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सरकार का संदेश देने के बाद अब संगठन के माध्यम से सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम हो रहा है.
UP संगठन से 2027 जीतने का प्लान
बीजेपी के भीतर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, नई टीम केवल औपचारिक बदलाव नहीं होगी, बल्कि यह 2027 के विधानसभा चुनाव की वार रूम टीम मानी जा रही है. प्रदेश संगठन में ऐसे चेहरों को प्राथमिकता मिल सकती है, जिनकी पकड़ बूथ स्तर तक मजबूत हो, सोशल मीडिया और जमीनी अभियान दोनों में सक्रियता हो और जो जातीय समीकरणों में भी पार्टी को लाभ पहुंचा सकें.
पार्टी खास तौर पर पिछड़ा वर्ग, गैर यादव ओबीसी, दलित उपजातियों और युवा मतदाताओं पर फोकस बनाए रखना चाहती है. ऐसे में नई टीम में क्षेत्रीय संतुलन और जातीय प्रतिनिधित्व दोनों को महत्व दिया जाएगा. पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और अवध.. हर क्षेत्र से ऐसे चेहरों को आगे लाने की कोशिश होगी जो अपने इलाके में संगठन को नई ऊर्जा दे सकें.
परफॉर्मेंस को मिलेगी सियासी अहमियत
नई टीम के गठन से पहले भाजपा के भीतर लंबे समय से लॉबिंग और सिफारिशों का दौर ही चला, जिसके चलते पार्टी गलियारों में चर्चा है कि कुछ नेता अपने काम के दम पर दोबारा जगह बना सकते हैं, जबकि कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जो राजनीतिक संपर्कों और सिफारिशी नेटवर्क के जरिए खुद को बचाने की कोशिश में जुटे हैं. बीजेपी के कई मौजूदा पदाधिकारी लगातार दिल्ली और लखनऊ के चक्कर लगाने का काम किए हैं.
यूपी बीजेपी के कोई नेता पार्टी संगठन के बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहा है तो कोई वैचारिक संगठनों और प्रभावशाली नेताओं के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. प्रदेश के मीडिया विभाग, मोर्चा-प्रकोष्ठ और क्षेत्रीय इकाइयों से जुड़े कई चेहरे भी नई टीम में एंट्री के लिए खूब हाथ पैर मारने का काम किया है.
बीजेपी संगठन कुछ ऐसे पदाधिकारी लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में बने हुए हैं जिनका जमीनी काम अपेक्षा के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और नेटवर्किंग उन्हें लगातार बचाती रही है. ऐसे में इस बार काम बनाम संपर्क की लड़ाई है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने जिस तरह प्रदेश की कार्यकारिणी गठन में समय लिया है, उससे साफ है कि परफॉर्मेंस वाले नेताओं को जगह मिलेगी.
यूपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष बदलने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश टीम के साथ-साथ बीजेपी के सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों को भी बदलने की तैयारी में है. इसे बीजेपी का बड़ा संगठनात्मक रीसेट माना जा रहा है. क्षेत्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति में सामाजिक समीकरण सबसे बड़ा फैक्टर हो सकता है. पश्चिम यूपी में जाट-ओबीसी समीकरण पर फोकस रह सकता है तो पूर्वांचल में गैर-यादव पिछड़े और दलित वर्ग, जबकि मध्य यूपी में ब्राह्मण ओबीसी संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है.
बीजेपी मौजूदा क्षेत्रीय अध्यक्ष अपनी कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय हैं तो नए दावेदार संगठन और सत्ता दोनों स्तरों पर अपनी पैठ मजबूत करने में जुटे हैं. बीजेपी नेतृत्व इस बार ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहता है जो केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित न रहकर चुनावी मैनेजमेंट और जनसंपर्क में भी प्रभावी हों. ऐसे में देखना है कि यूपी में टीएम पंकज में कौन-कौन चौधरी बनता है?
कुमार अभिषेक