सटीक रणनीति बनी सपा की जीत की 'चाबी', चला अखिलेश का ट्रिपल दांव

उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव में अखिलेश यादव की दूरगामी रणनीति और 'ट्रिपल फॉर्मूला' का असर दिखा, जहां सपा ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए भाजपा के प्रमुख गढ़ों में सेंध लगाई और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत जमीन तैयार कर ली.

Advertisement
सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Photo-ITG) सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Photo-ITG)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:25 AM IST

उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों के नतीजों ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिहाज से सपा के खेमे में नया उत्साह और ऊर्जा फूंक दी है. इस चुनाव में सपा का प्रदर्शन केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाला नहीं है, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया है कि यदि संगठनात्मक ढांचा मजबूत हो और सटीक रणनीति के साथ समय रहते तैयारी शुरू की जाए, तो किसी भी चुनावी जंग को जीता जा सकता है.

Advertisement

2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी सपा ने एमएलसी चुनाव में अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी की चुनावी कार्यशैली से सीख लेते हुए काफी पहले ही अपने कदम आगे बढ़ा दिए थे. सपा के इस दूरगामी प्लान और सुनियोजित चक्रव्यूह के आगे बीजेपी का चुनावी प्रबंधन पस्त नजर आया.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बेहद रणनीतिक तरीके से एमएलसी चुनाव में उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें क्षेत्रवार जातीय समीकरणों का ख्याल रखते हुए 'विनिंग फॉर्मूले' का दांव चला गया. इसके अलावा अपने कैडर के जरिए बूथ प्रबंधन का दांव चला, जिसके आगे बीजेपी चित हो गई.

ढाई साल पहले प्रत्याशी तय और 'ट्रिपल फॉर्मूला'

अखिलेश यादव ने एमएलसी चुनाव को हल्के में लेने के बजाय इसे 2027 का सेमीफाइनल माना. उन्होंने चुनाव से करीब ढाई साल पहले ही प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया था. इससे उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाताओं से सीधा संपर्क साधने का पर्याप्त समय मिल गया, क्योंकि इस चुनाव का क्षेत्र कई जिलों तक फैला होता है.

Advertisement

सपा ने जमीनी स्तर पर स्नातकों और शिक्षकों को जोड़ने के लिए जिलों में एक विशेष 'ट्रिपल प्लान' लागू किया. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बूथ और ब्लॉक स्तर पर वोटर्स का रजिस्ट्रेशन कराना और प्रचार अभियान को लगातार गति देना था, जिसकी पूरी कमान जिला संगठनों को सौंपी गई थी. चुनाव प्रचार से लेकर वोटिंग के दौरान सपा का यह दांव जमीन पर असरदार दिखा.

दिग्गजों को उतारा, अखिलेश ने खुद संभाली कमान

एमएलसी चुनाव की इस पूरी रणनीति को धरातल पर उतारने के लिए अखिलेश यादव ने अपने सबसे अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया. वर्तमान सांसदों, विधायकों और पूर्व जनप्रतिनिधियों को सीधे जिलों में उतारकर मोर्चा संभालने के निर्देश दिए गए. खुद अखिलेश यादव लगातार संगठनात्मक बैठकों के जरिए एक-एक सीट की तैयारियों का जायजा लेते रहे.

सपा ने किसी भी तरह के पक्षपात से हटकर केवल 'जिताऊ' और प्रबुद्ध वर्ग में अच्छी पकड़ रखने वाले चेहरों पर दांव लगाया. इस सटीक चयन का सीधा फायदा पार्टी को मिला. इस शानदार प्रदर्शन के दम पर सपा न केवल विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी सुरक्षित रखने में कामयाब रही, बल्कि सदन में पार्टी का संख्या बल भी काफी मजबूत हो गया.

प्रशासनिक दबाव से निपटने का 'प्लान-बी' तैयार रहा

Advertisement

सपा की इस गुप्त और जमीनी रणनीति की भनक सत्ताधारी दल को अंत तक नहीं लग सकी. सुनियोजित तैयारी और सटीक क्रियान्वयन की बदौलत सपा प्रत्याशियों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की. सपा ने अपनी पुरानी तीनों सीटों को बरकरार रखते हुए बीजेपी से लखनऊ की स्नातक सीट छीन ली और आगरा की शिक्षक सीट भी अपने नाम कर ली.

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी संगठन ने चुनाव के दौरान आने वाली हर संभावित अड़चन को ध्यान में रखकर पहले ही 'प्लान-बी' तैयार कर लिया था. सपा इस बात को समझ रही थी कि चुनाव में सत्ता का किसी भी तरह का दबाव सफल नहीं होने देना है.

एमएलसी चुनाव में प्रशासनिक दबाव, मतगणना में संभावित विलंब या किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंकाओं से निपटने के लिए कार्यकर्ताओं को पूर्व-नियोजित प्रशिक्षण देकर मतगणना केंद्रों पर तैनात किया गया था. इसी सतर्कता और आक्रामक रणनीति के दम पर सपा ने भाजपा के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में भी परचम फहरा दिया.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »