उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री पवन पांडेय ने पंचायत आजतक अयोध्या के 'अखिलेश के पवन' सेशन में बीजेपी पर जमकर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि बीजेपी धर्म और मंदिर के नाम पर राजनीति करती है, जबकि आम जनता के मुद्दों से उसका कोई सरोकार नहीं है. राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, अयोध्या में किसानों की जमीनों का अधिग्रहण और व्यापारियों को मिले मुआवजे का मुद्दा उठाते हुए पवन पांडेय ने कहा कि अयोध्या की जनता ने बीजेपी को उसके कामों का जवाब 2024 के लोकसभा चुनाव में दे दिया है.
बीजेपी की पिच पर समाजवादी पार्टी के खेलने के सवाल पर पवन पांडेय ने कहा कि भगवान और देवी-देवताओं का अस्तित्व बीजेपी के जन्म से पहले भी था. उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति उनकी और अखिलेश यादव की आस्था निजी विषय है. इसके लिए समाजवादी पार्टी को बीजेपी से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है.
पवन पांडेय ने कहा, "हमारे लिए भगवान आस्था का विषय हैं. अखिलेश यादव जी के घर में भी मंदिर है. वह केदारेश्वर महादेव मंदिर बनवा रहे हैं. तो क्या यह बीजेपी की देन है? हमें बीजेपी या संघ से यह सर्टिफिकेट नहीं चाहिए कि हम प्रभु श्रीराम, बजरंगबली और भोलेनाथ के पुजारी हैं. उन्होंने कहा कि वह हर मंगलवार हनुमानगढ़ी जाते हैं और उनके परिवार की भी भगवान हनुमान में गहरी आस्था है. समाजवादी पार्टी धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगती, बल्कि धर्म को आस्था का विषय मानती है.
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12 दिसंबर को अयोध्या आएंगे अखिलेश यादव
पवन पांडेय ने कार्यक्रम के दौरान बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 12 दिसंबर को सपरिवार अयोध्या आएंगे. इस दौरान वह हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन करेंगे और संत-महंतों से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लेंगे. पवन पांडेय ने कहा कि अखिलेश यादव भगवान राम और हनुमान जी से प्रदेश को भ्रष्टाचार और लूट से मुक्त कराने की प्रार्थना करेंगे, उन्होंने बीजेपी पर राम मंदिर के चढ़ावे में कथित भ्रष्टाचार, किसानों की जमीन के मुआवजे में गड़बड़ी और विकास परियोजनाओं में कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए.
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी पर उठाए सवाल
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर पवन पांडेय ने कहा कि बीजेपी और संघ के लोग सनातन धर्म की बात करते हैं, लेकिन जब मंदिर में चढ़ावे से जुड़ा मामला सामने आया तो वे जवाब देने से बचते हैं, उन्होंने सवाल उठाया कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी किसकी थी? जिन लोगों पर ट्रस्ट की जिम्मेदारी थी और जिन पर चोरी को संरक्षण देने के आरोप हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? उन्होंने कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितना पैसा गायब हुआ और उसकी जिम्मेदारी किसकी थी.
पवन पांडेय ने कहा कि मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा देता है. किसी की श्रद्धा 10 रुपये चढ़ाने की होती है तो कोई लाखों रुपये देता है. ऐसे में लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए.
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राम मंदिर में चढ़ावे के मामले में कार्रवाई को लेकर पूछे गए सवाल पर पवन पांडेय ने कहा कि सिर्फ कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पूरे मामले का जवाब नहीं मिल जाता, उन्होंने सवाल किया कि चंपत राय को पद से क्यों हटाया गया और अनिल मिश्रा को लेकर क्या कार्रवाई हुई? उन्होंने कहा कि अगर जांच में केवल कुछ कर्मचारियों को दोषी पाया गया है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी. पवन पांडेय ने दावा किया कि इस मामले में अभी कई सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं.
अयोध्या में कुछ संतों और धार्मिक व्यक्तियों की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए पवन पांडेय ने कहा कि भगवा वस्त्र पहनने से कोई संत नहीं बन जाता, व्यक्ति की पहचान उसके कर्म और व्यवहार से होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भगवा पहनकर प्रॉपर्टी डीलिंग, बालू का कारोबार और जमीनों पर कब्जे जैसे काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "आदमी कर्म से संत होता है, आप पूजा-पाठ, योग और ध्यान करते हैं या भगवा पहनकर प्रॉपर्टी डीलिंग और बालू बेचने का काम करते हैं, इन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है."
उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में कुछ लोग सत्ता के करीब रहने के लिए अखिलेश यादव के खिलाफ बयानबाजी करते हैं. उनके मुताबिक, ऐसे लोगों का मकसद धार्मिक सेवा से ज्यादा राजनीतिक संरक्षण हासिल करना है.
योगी आदित्यनाथ के अयोध्या से चुनाव लड़ने पर क्या बोले?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या से चुनाव लड़ने की संभावना और उनकी जीत को लेकर पूछे गए सवाल पर पवन पांडेय ने कहा कि जनता चुनाव में अपना फैसला सुनाएगी, उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि अयोध्या में बीजेपी ने बड़े स्तर पर प्रचार किया था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अयोध्या आए थे, मंदिर में कार्यक्रम हुए और रोड शो किया गया, लेकिन इसके बावजूद फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा.
उन्होंने कहा कि अयोध्या की जनता ने बीजेपी को उसके कामकाज का जवाब दिया और समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद को चुनकर संसद भेजा.
मिल्कीपुर और एमएलसी चुनाव में प्रशासन पर लगाए आरोप
मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव का जिक्र करते हुए पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि वहां निष्पक्ष चुनाव नहीं हुआ. उन्होंने दावा किया कि चुनाव में जनता की बजाय प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका ज्यादा प्रभावी रही. गोरखपुर के एमएलसी चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को हराने के लिए अधिकारियों ने भूमिका निभाई. उन्होंने बनारस और गोरखपुर के चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठने चाहिए.
अयोध्या में किसानों की जमीनों को लेकर बीजेपी पर हमला
फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी की हार की वजह बताते हुए पवन पांडेय ने अयोध्या में जमीन अधिग्रहण और प्रॉपर्टी डीलरों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों और स्थानीय लोगों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि आवास विकास और विकास प्राधिकरण की ओर से जमीन अधिग्रहण के नोटिस दिए जाने के बाद कुछ बड़े प्रॉपर्टी डीलरों ने किसानों से कम कीमत पर जमीन खरीद ली. पवन पांडेय के मुताबिक, किसानों को बताया गया कि उनकी जमीन सरकार अधिग्रहित कर सकती है, इसलिए वे कम कीमत पर जमीन बेचने को तैयार हो गए.
एयरपोर्ट और रामपथ के निर्माण में मुआवजे पर उठाए सवाल
पवन पांडेय ने अयोध्या एयरपोर्ट और रामपथ के निर्माण के दौरान जमीन अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को दिए गए मुआवजे पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट के लिए गंजा कुटिया और धर्मपुर समेत तीन गांवों के किसानों की जमीन ली गई. उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन के बदले किसानों को बहुत कम मुआवजा दिया गया. रामपथ के निर्माण के दौरान दुकानदारों और मकान मालिकों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि कई व्यापारियों के तीन-चार मंजिला पुराने मकान और दुकानें थीं. उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजे की प्रक्रिया में भी अधिकारियों ने गड़बड़ी की और कई परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.
पवन पांडेय ने कहा कि अयोध्या में विकास के नाम पर जिन लोगों के घर और दुकानें प्रभावित हुईं, उनकी परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक, यही नाराजगी 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ जनादेश के रूप में सामने आई.
कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर बीजेपी पर निशाना
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला, उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसान और नौजवान परेशान हैं. वकील, शिक्षक और पुलिसकर्मी तक सुरक्षित नहीं हैं. अयोध्या में बच्चियों के साथ हुई आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया कि ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई हुई? पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि प्रदेश में न्याय भी सत्ता देखकर मिलता है और सरकार का बुलडोजर भी चुनिंदा मामलों में ही चलता है.
एक्सप्रेसवे और मेट्रो के काम पर भी उठाए सवाल
पवन पांडेय ने लखनऊ मेट्रो और कई विकास परियोजनाओं का श्रेय अखिलेश यादव की सरकार को देते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने पिछले वर्षों में ऐसा कोई बड़ा काम नहीं किया, जिसे उदाहरण के तौर पर पेश किया जा सके, उन्होंने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्माण में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण सड़कें जल्दी खराब हो रही हैं. उन्होंने आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली भर्तियों को लेकर भी सरकार को घेरा.
उनका दावा है कि पढ़े-लिखे युवाओं को स्थायी नौकरी देने के बजाय ठेके पर काम कराया जा रहा है और नौकरी पाने और उसे जारी रखने के लिए उन्हें परेशान होना पड़ता है. पवन पांडेय ने कहा कि बीजेपी सरकार के भ्रष्टाचार, गुंडाराज और बेरोजगारी से जनता परेशान है और इसी वजह से प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने की संभावना है.
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