प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में कई बदलावों की तैयारी चल रही है. माना जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. कैबिनेट विस्तार में कई नए मंत्रियों का नाम जुड़ सकते हैं तो कुछ पुराने मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है.
मोदी कैबिनेट के विस्तार का रोडमैप तैयार किया जा रहा है. मंत्रिमंडल विस्तार का फोकस उन राज्यों पर रहेगा, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके चलते माना जा रहा है कि मोदी मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब, उत्तराखंड जैसे राज्यों से प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की तारीख से लेकर मंत्रिमंडल के चेहरों तक पर कयास लगाए किए जा रहे हैं. 11 जुलाई तक पीएम मोदी का कई कार्यक्रम और दौरे लगे हुए हैं. संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरु हो सकता है. ऐसे में मॉनसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है?
मोदी कैबिनेट विस्तार से समीकरण साधने का दांव
देश की सियासत में सबसे ज्यादा चर्चा मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर हो रही है. बीजेपी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाए. साथ ही क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं.
मोदी कैबिनेट में शामिल मंत्रियों में पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा दिल्ली के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं. ऐसे में प्रबल संभावना है कि बीजेपी 'एक व्यक्ति, एक पद' के अपने नियम का पालन करते हुए दोनों ही मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है. इसके अलावा जॉर्ज कुरियन केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं तो केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया है.
रवनीत बिट्टू भी देर-सबेर मंत्री पद छोड़ सकते हैं. इन चार जगह पर नए मंत्री बनाए जा सकते हैं तो 9 मंत्री पद पहले से ही खाली हैं. मोदी के अगुवाई सरकार में फिलहाल 72 मंत्री हैं, जिसमें 31 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री. केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री बन सकते हैं. इस लिहाज से 13 मंत्री पद की साफ जगह बन रही है. इसके अलावा कुछ मंत्रियों को कैबिनेट से हटाया भी जा सकता है तो कुछ नए मंत्रियों को एंट्री मिल सकती है.
मंत्रिमंडल विस्तार में चुनावी राज्यों पर होगा फोकस
मोदी कैबिनेट विस्तार में बीजेपी का मुख्य फोकस उन राज्यों पर रह सकता है, जहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं. उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड और पंजाब सहित सात राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में साल के शुरू में ही चुनाव हैं तो हिमाचल प्रदेश और गुजरात में साल के आखिर में चुनाव होने हैं.
विधानसभा चुनाव को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में चुनावी राज्यों सेप्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है ताकि सियासी समीकरणों को चुनाव के लिहाज से साधा जा सके. इसलिए इन राज्यों के कुछ नेताओं को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. उत्तराखंड की बात करें तो अजय टम्टा मोदी कैबिनेट में परिवहन राज्य मंत्री हैं. टम्टा मोदी कैबिनेट में दूसरी बार राज्यमंत्री हैं और वे बीजेपी के दलित चेहरे हैं. ऐसे में नई टीम में उनका कद बढ़ाया जा सकता है या फिर एक और चेहरे को शामिल किया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक का दिखेगा दबदबा
यूपी से फिलहाल केंद्र सरकार में 10 मंत्री हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं. अब यूपी चुनाव 2027 का रण साधने और राजनीतिक समीकरणों को जमीन पर उतारने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के जरिए बदलाव किया सकता है. 2024 में भले ही भाजपा का प्रदर्शन सूबे में खराब रहा हो, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी की भूमिका कम नहीं हुई. विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य की भूमिका को बढ़ाया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए पश्चिमी यूपी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़ा स्थान मिल सकता है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक पश्चिमी यूपी पर फोकस करते दिखे हैं. इसके अलावा सूबे के जातीय समीकरण को साधने के लिए ओबीसी व दलित समुदाय से कुछ नए मंत्री बनाए जा सकते हैं.
पंजाब में विधानसभा चुनाव है, जिसे देखते हुए मोदी मंत्रिमंडल में पंजाब का प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है. मोदी कैबिनेट में रवनीत सिंह बिट्टू एकलौते मंत्री हैं, जो पंजाब से हैं. रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते हैं. लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले वे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे,लुधियाना सीट से लोकसभा का चुनाव हार गए थे, लेकिन फिर भी पीएम मोदी ने उन्हें अपने कैबिनेट में जगह दी थी.
सिख समाज से आने वाले केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी यूपी कोटे से मंत्री हैं, लेकिन उन्हें पंजाब में सिख वोटों को साधे रखने के लिए कैबिनेट में जगह दे रखी है. माना जा रहा है कि पंजाब से दो से तीन मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसमें आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आने वाले राज्यसभा सदस्यों में से किसी चेहरे को मौका मिल सकता है. बीजेपी का पूराव फोकस पंजाब में सरकार बनाने की है, जिसके लिए अभी से भी पार्टी जुट गई है.
क्या बागी सांसदों को भी कैबिनेट में मिलेगी जगह?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की मिली भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है. तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी से अलग होकर एनसीपीआई में विलय किया है और मोदी सरकार को समर्थन करने का ऐलान किया है. ऐसे में सभी की निगाहें लगी हुई हैं कि टीएमसी के किसी बागी सांसद को मोदी सरकार में क्या मंत्री बनाए जा सकता है?
महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) को 9 में से 6 लोकसभा सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ आ गए हैं. इस तरह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में सांसदों की संख्या महाराष्ट्र के एनडीए में सबसे ज्यादा हो गई है. इसके चलते माना जा रहा है कि शिंदे कोटे से कैबिनेट में एक-दो चेहरे बढ़ सकते हैं. अभी शिवसेना से सिर्फ एक ही मंत्री केंद्र में है.
मोदी कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल में बिहार से मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है. बिहार की राजनीति में हुए बड़े घटनाक्रमों ने इस संभावना को और मजबूत कर दिया है. बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है. नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सम्राट चौधरी सीएम बने हैं. ऐसे में नीतीश कुमार के राज्यसभा चुने जाने के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या उन्हें कैबिनेट में एंट्री मिलेगी.
कुबूल अहमद