क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा यूपी में बीजेपी के लिए छुपा वरदान साबित होगा?

पेपर लीक पर छात्रों के उपजे गुस्से को शांत करने के लिए बीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया है. धर्मेंद्र प्रधान कुर्मी समाज से आते हैं, जिसे ओबीसी की प्रभावशाली जातियों में गिना जाता है. ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बीजेपी के लिए यूपी में कहीं सियासी वरदान न बन जाए?

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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सपा के मंसूबों पर फेर न दे पानी (Photo-ITG) धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सपा के मंसूबों पर फेर न दे पानी (Photo-ITG)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्र आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. इसके साथ ही  छात्र आंदोलन खत्म हो गया है, लेकिन सियासत तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान का संसद भवन के मकरद्वार पर बीजेपी नेताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया. यह सिर्फ औपचारिक स्वागत नहीं था,बल्कि इसके जरिए बीजेपी ने अपने राजनीतिक संदेश की शुरुआत भी कर दी. 

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संसद के भीतर और बाहर छिड़ी सियासी जंग के जरिए बीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के जरिए सियासी नैरेटिव को जनता के बीच सेट करने लगी.  बीजेपी के नेता धर्मेंद्र प्रधान कुर्मी समाज से आते हैं, जिसे ओबीसी की प्रभावशाली जातियों में गिना जाता है.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बीजेपी सामाजिक प्रतिनिधित्व के नजरिए से पेश करने की कोशिश कर रही है. यूपी में कुर्मी समुदाय  व्यापक रूप से ओबीसी वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्या यूपी में बीजेपी के लिए छुपा वरदान साबित होगा?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से सेट होगा नैरेटिव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने छात्र और युवा प्रदर्शनकारियों के गुस्से को शांत करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया तो दूसरी तरफ अब इस पूरे घटनाक्रम को अपने पक्ष में मोड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले सामने आई स्वागत की तस्वीरों को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. 

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बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लक्ष्मण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का इस्तीफा क्यों नहीं मांगते? लक्ष्मण ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ओबीसी समाज के मजबूत नेता हैं. उन्होंने सीधे तौर पर तो यह नहीं कहा, लेकिन उनके बयान से यह संदेश देने की कोशिश जरूर दिखी कि राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वे ओबीसी समाज से आते हैं.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी लड़ाई अब केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गई है. बीजेपी इसे ओबीसी सम्मान,विपक्ष के दोहरे मानदंड और पुराने पेपर लीक मामलों से जोड़कर नया सियासी नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है. ओबीसी बिरादरी में यादव के बाद दूसरी ताकतवर कुर्मी जाति है. बीजेपी के दिग्गज नेता धर्मेंद्र प्रधान इसी कुर्मी जाति से आते हैं. 

कुर्मी वोटर को पाले नें लाने का बीजेपी प्लान
उत्तर प्रदेश में 7 से 8 फीसदी कुर्मी वोटर हैं, जो सूबे की सियासत में काफी अहमयित रखते हैं. कुर्मी बिरादरी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का प्रभावी ढंग से साथ दिया था. पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड और अवध से लेकर रुहेलखंड तक कुर्मी बिरादरी सपा के साथ खड़ी हुई थी. इसके चलते समाजवादी पार्टी फर्श से अर्श तक आ गई. 2019 में 5 सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी ने 2024 में 37 सीटों पर जीत कर इतिहास रच दिया था. 

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सपा के इस सियासी चमत्कार के पीछे ओबीसी और दलित वोटरों की बीजेपी से नाराजगी और खासकर कुर्मी वोटरों का सपा के पक्ष में लामबंद होना एक बड़ी वजह माना गया. हालांकि धर्मेंद्र प्रधान मूलरूप से उड़ीसा के रहने वाले हैं उत्तर प्रदेश में कोई अपना जनाआधार नहीं रखते, लेकिन बीजेपी में देश के बड़े ओबीसी चेहरे के तौर पर उनकी पहचान है. अब उनके इसी पहचान को उत्तर प्रदेश की सियासत में भुनाने की कवायद शुरू हो गई.

सपा को कुर्मी विरोधी कठघरे में खड़ा करेगी
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सपा छात्र आंदोलन की उपलब्धि बता रही है. अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार झुकती है, बस झुकाने वाला चाहिए. अब कुर्मी जाति से जुड़े सोशल मीडिया ग्रुप्स पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद यह चर्चा चल निकली की कुर्मी बिरादरी के बड़े मंत्री को विपक्ष और खासकर सपा के सियासी दबाव और आंदोलन के चलते हटाया गया. 

कुर्मी समाज से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान की जगह पर अब एक ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रहलाद जोशी को जगह दी गई. बीजेपी इस विमर्श को आगे बढ़ना शुरू कर दिया डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इसे ओबीसी के स्वाभिमान और सम्मान से जोड़ा तो ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद भी कुर्मी समाज के सम्मान की बात करते हुए मैदान में उतर आए संजय निषाद ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने ओबीसी चेहरे को हटाने में अपनी पूरी ताकत लगाई है. 2027 के चुनाव में यही बिरादरी इसका बदला लेगी

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राजभर ने अखिलेश को कठघरे में खड़ा किया
ओमप्रकाश राजभर ने तो बाकायदा ट्वीट करके लिखा की क्या अगर धर्मेंद्र प्रधान को कुर्मी होने की वजह से अखिलेश यादव ने निशाना बनाया है और धर्मेंद्र प्रधान की जगह कोई यादव शिक्षा मंत्री होता तो क्या अखिलेश यादव उसके इस्तीफा के लिए जोर लगाते!ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से पूछा है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान की जाति कुर्मी की जगह यादव होती तो आप क्या करते? 

उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा है कि धर्मेंद्र प्रधान के यादव होने पर भी वो उनका इस्तीफा मांगते। इससे पहले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ये कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के कुर्मी होने की वजह से सपा और कांग्रेस ने उन्हें निशाना बनाया. कुर्मी समाज इस अपमान का बदला चुनाव में लेगा. अब सीधा योगी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से कुर्मी बनाम यादव करके सवाल उठा दिया है.

इस्तीफा बीजेपी के लिए सियासी संजीवनी बनेगा
धर्मेंद्र प्रधान भले ही उड़ीसा के रहने वाले हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में भी इनका प्रभाव इस मायने में रहा है कि उनकी बिरादरी का बहुत बड़ा तबका 2014 लोकसभा चुनाव से 2022 विधानसभा चुनाव तक प्रभावी तौर पर बीजेपी के साथ खड़ा रहा, धर्मेंद्र प्रधान भी उत्तर प्रदेश भाजपा के चुनाव प्रभारी रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रभारी रहते हुए अपनी बिरादरी पर अच्छा प्रभाव भी रखते हैं.

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जानकार मानते हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी जो कुर्मियों को दोबारा अपने पाले में लाने के लिए जी तोड़ मशक्कत कर रही थी. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने उनकी चुनौती आसान कर दी है. कुर्मी वोटों को लेकर बीजेपी की चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा ने इस बार कुर्मी बिरादरी से ही अपना प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया है, जो केंद्र में मंत्री भी है, ऐसे में अगर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा यूपी में उनकी जाति की संवेदनाओं से जुड़ता है सपा की लड़ाई मुश्किल हो सकती है.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर पेपर लीक से उपजा गुस्सा शांत हो गया तो नया मद्दा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही होगा. अब बीजेपी यूपी में ये विमर्श खड़ा करना शुरू भी कर दिया है, जिसके जरिए बीजेपी से छिटके हुए कुर्मी समुदाय को दोबारा से बीजेपी के पाले में लाने की है, जिसके लिए एनडीए को ओबीसी नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है. 

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