पंजाब का विधानसभा चुनाव अब सिर्फ कुछ ही महीने दूर हैं. राज्य में कुल 23 जिले हैं, इन्हीं में से एक है मालवा क्षेत्र में स्थित फतेहगढ़ साहिब जिला. जो कि सिख इतिहास, वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. यह जिला पंजाब के प्रशासनिक, राजनीतिक और शिक्षा के क्षेत्र में भी अहम स्थान रखता है. सिर्फ ऐतिहासिक रूप से ही नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी ये काफी ज़रूरी इलाका है.
सिख इतिहास से जुड़े गुरुद्वारों और स्मारकों के साथ यहां मुगलकालीन इमारतें, पुरातत्व स्थल, उपजाऊ कृषि भूमि और मंडी गोबिंदगढ़ का स्टील उद्योग भी है. जिले में फतेहगढ़ साहिब, बस्सी पठाणा और अमलोह की तीन विधानसभा सीटें हैं.
इतिहास और नामकरण
फतेहगढ़ साहिब जिले का नाम सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सबसे छोटे साहिबजादों, साहिबजादा फतेह सिंह जी और साहिबजादा जोरावर सिंह जी के नाम पर रखा गया है. साहिबजादा फतेह सिंह जी की आयु 6 वर्ष और साहिबजादा जोरावर सिंह जी की आयु 9 वर्ष थी.
1704 ई. में मुगल शासन के दौरान सरहिंद के नवाब वजीर खान ने दोनों छोटे साहिबजादों को इस्लाम स्वीकार नहीं करने पर जिंदा दीवार में चिनवा दिया था. उनके बलिदान की याद में इस स्थान का नाम फतेहगढ़ रखा गया, जिसका अर्थ विजय का किला है. 1710 ई. में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने चप्पड़चिड़ी के युद्ध में वजीर खान को हराकर सरहिंद पर कब्जा किया और सिख राज्य की नींव रखी.
आजादी के बाद यह क्षेत्र पटियाला जिले का हिस्सा था. 13 अप्रैल 1992 को वैसाखी के पर्व पर पटियाला और रोपड़, यानी रूपनगर, जिलों के कुछ हिस्सों को अलग करके इसे पंजाब के 17वें जिले के रूप में स्वतंत्र दर्जा दिया गया.
भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक ढांचा
फतेहगढ़ साहिब जिला पंजाब के मध्य-पूर्वी हिस्से में मौजूद है. इसके उत्तर में रूपनगर, यानी रोपड़, पूर्व में एस.ए.एस. नगर, यानी मोहाली, दक्षिण में पटियाला और पश्चिम में लुधियाना व मलोट/मलेरकोटला जिले की सीमाएं लगती हैं.
जिले का मुख्यालय फतेहगढ़ साहिब, यानी सरहिंद, में है. जिले में 4 तहसीलें फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, खमानों और बस्सी पठाणा हैं. मंडी गोबिंदगढ़ इसकी 1 उप-तहसील है. जिले में 6 विकास खंड फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, खमानों, बस्सी पठाणा, सरहिंद और खेड़ा हैं.
कृषि की सिंचाई के लिए जिले से सरहिंद नहर, भाखड़ा नहर, हरवाना ट्रेंच और सतलुज-यमुना लिंक नहर जैसी प्रमुख नहर प्रणालियां गुजरती हैं.
2011 की जनगणना के आंकड़े
फतेहगढ़ साहिब क्षेत्रफल और जनसंख्या, दोनों के हिसाब से पंजाब का दूसरा सबसे छोटा जिला माना जाता है. 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले की कुल जनसंख्या 5,99,814 (599,814) थी. इनमें पुरुषों की संख्या लगभग 3,19,000 और महिलाओं की संख्या लगभग 2,80,000 थी.
जिले का जनसंख्या घनत्व 508 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है. यहां प्रति 1,000 पुरुषों पर 871 महिलाएं हैं. साक्षरता दर 80.3% है, जो पंजाब के औसत से बेहतर है.
जिले में सिख समुदाय की आबादी लगभग 78%-80% है. इसके बाद हिंदू और मुस्लिम समुदाय की मौजूदगी है. पंजाबी जिले की आधिकारिक और मुख्य बोलचाल की भाषा है.
राजनीतिक स्थिति और लोकसभा क्षेत्र
फतेहगढ़ साहिब पंजाब की लोकसभा और विधानसभा राजनीति में संवेदनशील और रणनीतिक रूप से अहम जिला है. फतेहगढ़ साहिब अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित संसदीय क्षेत्र है. इसके तहत जिले की तीनों विधानसभा सीटों के अलावा लुधियाना और मलेरकोटला जिलों के कुछ विधानसभा क्षेत्र भी आते हैं.
फतेहगढ़ साहिब विधानसभा सीट का निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 55 है और यह सामान्य सीट है. यह जिले का मुख्य राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र है. 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लखबीर सिंह राय ने यहां जीत दर्ज की. इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कुलजीत सिंह नागरा यहां से विधायक रह चुके हैं. इस सीट के प्रमुख मुद्दों में शहर का सौंदर्यीकरण, धरोहर संरक्षण, उच्च शिक्षा का विस्तार और बेहतर नागरिक सुविधाएं शामिल हैं.
बस्सी पठाणा विधानसभा सीट का निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 54 है और यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के रूपिंदर सिंह हैप्पी ने यहां से जीत हासिल की. ऐतिहासिक रूप से इस सीट पर अकाली दल और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहता था, लेकिन हाल के वर्षों में आम आदमी पार्टी का प्रभाव बढ़ा है. यहां ग्रामीण बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सेवाएं और कृषि आधारित रोजगार प्रमुख मुद्दे हैं.
अमलोह विधानसभा सीट का निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 56 है और यह सामान्य सीट है. इसके तहत मंडी गोबिंदगढ़ जैसा औद्योगिक केंद्र आता है. 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के गुरिंदर सिंह, जिन्हें गैरी बिरिंग के नाम से भी जाना जाता है, विजयी हुए. यहां स्टील और लोहा उद्योगों की समस्याएं, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण और स्थानीय व्यापारिक नीतियां प्रमुख मुद्दे हैं.
धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल
फतेहगढ़ साहिब अपने ऐतिहासिक किलों, गुरुद्वारों और प्राचीन स्मारकों के लिए देशभर में जाना जाता है. गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब सिख धर्म के प्रमुख और पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है. यह उसी स्थान पर बना है, जहां साहिबजादा फतेह सिंह और साहिबजादा जोरावर सिंह को दीवार में चिनवाया गया था. गुरुद्वारे के तहखाने में स्थित भौरा साहिब वह वास्तविक स्थान है, जहां यह घटना हुई थी.
गुरुद्वारा जोती स्वरूप उस स्थान पर स्थित है, जहां साहिबजादों और माता गुजरी जी का अंतिम संस्कार किया गया था. सेठ टोडर मल जी ने उस समय सोने की मोहरें बिछाकर यह जमीन खरीदी थी.
जहाज हवेली को दीवान टोडर मल की हवेली भी कहा जाता है. इसकी बनावट जहाज जैसी दिखाई देती है. यह हवेली सिख इतिहास के त्याग और समर्पण का प्रतीक है.
सरहिंद का आम खास बाग मुगल सम्राट अकबर ने बनवाया था और बाद में शाहजहां ने इसका पुनर्निर्माण कराया. यह ऐतिहासिक मुगल बाग और सराय परिसर है. यहां का शीश महल, सर्द खाना और शाही हम्माम मुगल वास्तुकला के नमूने हैं. सर्द खाना प्राचीन एयर-कंडीशनिंग व्यवस्था के रूप में बताया गया है.
रौजा शरीफ सूफी संत हजरत मुजद्दिद अल्फ सानी, यानी शेख अहमद सरहिंदी, का मकबरा है. इसे दूसरा मक्का भी माना जाता है. यहां हर साल देश-विदेश से हजारों उर्स यात्री आते हैं.
जिले में स्थित संघोल, यानी उच्छा पिंड, एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है. यहां हड़प्पा सभ्यता और कुषाण काल के अवशेष मिले हैं. संघोल पुरातत्व संग्रहालय में बौद्ध स्तूपों और प्राचीन मूर्तियों का दुर्लभ संग्रह मौजूद है.
कृषि, उद्योग और शिक्षा
जिले की भूमि उपजाऊ है और सिंचाई के पुख्ता इंतजाम हैं. यहां गेहूं, धान, यानी चावल, और गन्ना मुख्य फसलें हैं. अमलोह तहसील में स्थित मंडी गोबिंदगढ़ को पंजाब का स्टील टाउन या लोहा मंडी कहा जाता है. यहां सैकड़ों स्टील री-रोलिंग मिलें, भट्ठियां और औद्योगिक इकाइयां हैं. ये इकाइयां बड़े पैमाने पर रोजगार और राजस्व पैदा करती हैं.
बाबा बंदा सिंह बहादुर इंजीनियरिंग कॉलेज और माता गुजरी कॉलेज जैसे उच्च शिक्षण संस्थान जिले को शिक्षा के क्षेत्र में पहचान देते हैं. जिले में श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी भी है, जो उच्च तकनीकी और कई विषयों की शिक्षा देती है.
आम खास बाग पर उपलब्ध वीडियो फतेहगढ़ साहिब के इस मुगलकालीन परिसर की वास्तुकला, इतिहास और परिसर को करीब से समझने में मदद करता है.
इस तरह फतेहगढ़ साहिब का इतिहास छोटे साहिबजादों के बलिदान, बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीत और मुगलकालीन विरासत से जुड़ा है. जिले की पहचान धार्मिक स्थलों, कृषि, मंडी गोबिंदगढ़ के स्टील उद्योग, शिक्षण संस्थानों और तीन विधानसभा सीटों से भी बनती है.
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