जब से Gen Z ने कॉर्पोरेट लाइफ में एंट्री ली है, काम को लेकर उनकी सोच में काफी चेंजेस देखने को मिला है. कई Gen Z workers अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच एक क्लियर बाउंडरी रखना चाहते हैं. सिंपल फंडा है- काम के टाइम काम और पर्सनल टाइम में सिर्फ पर्सनल चीजें. शायद यही रीजन है कि ऑफिस टाइम खत्म होने के बाद भी काम करते रहने का कल्चर उन्हें एक्सेप्टेबल नहीं होता.
सोचिए, अगर कोई व्यक्ति 9 से 10 घंटे की शिफ्ट पूरी करने के बाद भी अपने पर्सनल टाइम में ऑफिस के काम के लिए available रहे, तो यह उसके लिए frustrating हो सकता है. ऐसे में कई यंगस्टर्स जॉब की नीड होने के बावजूद ऐसी जॉब को लेकर सवाल उठाते हैं, जहां उन्हें work-life balance कॉम्प्रोमाइज करना पड़े.
हाल ही में X पर Rhoda नाम की एक यूजर ने Gen Z को लेकर ऐसा ही एक एक्सपीरीयंस शेयर किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया. Rhoda ने बताया कि उन्हें Gen Z पसंद है और वे उनके साथ अच्छी तरह घुल-मिल भी जाती हैं, लेकिन कई बार Gen Z का माइंड सेट उन्हें समझ नहीं आता.
उन्होंने अपनी niece का एग्जाम्पल दिया, जो पिछले 19 महीनों से जॉब सर्च कर रही थी. उसने कई जॉब्स के लिए अप्लाई किया, लेकिन उसे लगातार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. उसके पास कोई दूसरा प्लान भी नहीं था.
आखिरकार उसे एक अच्छी कंपनी में उसकी पसंद की जॉब मिली. अच्छी सैलरी, पसंद का रोल और एक जानी-मानी कंपनी- यानी सबकुछ वैसा था जैसा वो चाहती थी.
लेकिन फिर hiring manager ने एक कंडिशन बताई. कंपनी में इम्पलॉई से एक्सपेक्टेशन्स की जाती थी कि वे वीक में कुछ बार रात 9 बजे के बाद भी Slack पर available रहें, अगर कोई काम आ जाए.
अब उसके सामने सवाल था- क्या पसंद की जॉब के लिए उसे अपने work-life balance कॉम्प्रोमाइज करना चाहिए?
उसने कुछ टाइम सोचा और hiring manager से पूछा, “क्या इस extra काम के लिए पैसे मिलते हैं?”
मैनेजर ने हंसते हुए जवाब दिया, “नहीं, ये हमारी culture का पार्ट है. हम सब ऐसा ही करते हैं.”
इसके बाद Rhoda की niece ने साफ कहा, 'तो फिर मुझे इसे मना करना पड़ेगा.'
कॉल पर कुछ पल के लिए awkward silence रहा. इसके बाद मैनेजर ने उससे पूछा कि वह लगभग दो साल से नौकरी ढूंढ रही है, फिर भी क्या उसे इस ऑफर पर ट्रस्ट नहीं है?
उसका जवाब था कि वो पहले ही लंबे टाइम तक unemployment झेल चुकी है, लेकिन अब वो अगले कुछ साल ऐसी जॉब में नहीं टाइम स्पेंड करना चाहती जो उसे mentally exhaust कर दे.
और इसके बाद उसने जॉब का ऑफर रिजेक्ट कर दिया.
Rhoda के मुताबिक, उसकी niece को एक मुमेंट के लिए भी ये नहीं लगा कि शायद उसे जॉब ले लेनी चाहिए थी. Rhoda ने इस पूरे एक्सपीरीयंस को Gen Z की boundaries से जोड़ते हुए लिखा कि ये generation अपनी personal peace और comfort को लेकर काफी conscious है.
नीड के बावजूद compromise नहीं?
Rhoda की पोस्ट वायरल हुई और और कई हजारों लाइक्स मिले. हालांकि, इस डिजीशन पर लोगों की ओपिनियन अलग-अलग थे.
कुछ लोगों ने जॉब का ऑफर रिजेक्ट करने के डिशिजन को क्रिटिसाइज किया. एक यूजर ने कहा कि वो नौकरी जॉइन कर सकती थी, वहां अपने skills इम्प्रूव कर सकती थी और बाद में इससे बेहतर opportunity तलाश सकती थी.
वहीं, कुछ लोगों ने Rhoda की niece के डिशीजन को सपोर्ट भी किया और कहा कि अपनी boundaries फिक्स करना भी जरूरी है.
इस पूरे conversation ने Gen Z के workplace mindset की एक इंटरेस्टिंग पिक्चर सामने रखी है- जॉब की नीड होने के बावजूद personal boundaries से कितना compromise किया जाए, ये सवाल अब कई young workers के लिए उतना simple नहीं है.
काम जरूरी है, लेकिन उनके लिए ये भी मायने रखता है कि काम उनकी पूरी लाइफ पर हावी न हो.
aajtak.in