दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU के चुनाव इस बार बेहद खास माने जा रहे हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक चुनाव 18 सितंबर को होंगे और वोटों की गिनती 19 सितंबर को होगी. RSS से जुड़ी ABVP और कांग्रेस से जुड़ी NSUI दोनों ही नए छात्र वोटरों को अपनी तरफ करने में जुट गई हैं. इस बार का मुकाबला सिर्फ कैंपस के मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि शिक्षा नीति और छात्र आंदोलनों जैसे बड़े मुद्दे भी चुनावी बहस का हिस्सा बनेंगे.
पिछले 10 सालों में ABVP ने अध्यक्ष पद पर आठ बार जीत हासिल की है जबकि NSUI को सिर्फ दो बार सफलता मिली है. NSUI इस बार चार साल के स्नातक कार्यक्रम को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है.
NSUI दिल्ली के प्रभारी अखिलेश यादव का कहना है कि पहले बैच के सिर्फ करीब 30 प्रतिशत छात्रों ने ही चौथे साल में पढ़ाई जारी रखी है. उन्होंने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को प्रयोग की तरह इस्तेमाल किया गया. यादव ने यह भी दावा किया कि DU कुछ कक्षाओं को अलग कॉलेजों से हटाकर क्लस्टर व्यवस्था में शामिल करने पर विचार कर रहा है ताकि खर्च कम हो सके. साथ ही उन्होंने कैंपस में स्टाफ भर्ती में गड़बड़ी और विदेशी छात्रों की घटती संख्या का मुद्दा भी उठाया.
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NSUI ने संसद मार्च के दौरान छात्रों के छूटे जूते चप्पल भी इकट्ठा किए हैं ताकि इन्हें अपने प्रचार में इस्तेमाल कर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया जा सके.
वहीं ABVP छात्रों से सीधे संवाद और अपने कैंपस कामों को आगे रखने की रणनीति पर काम कर रही है. संगठन के राज्य सचिव सार्थक शर्मा के मुताबिक महिला सुरक्षा के लिए पिंक बूथ, दाखिले में मदद के लिए हेल्प सेल, खेलों के लिए खेलो डीयू कार्यक्रम, हॉस्टल सुविधाएं और मुफ्त वाई-फाई जैसी पहल उनकी उपलब्धियां हैं. शर्मा ने बताया कि सुरक्षा बढ़ाने के लिए करीब 200 CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं.
अनमोल नाथ