Delivery Partner Rules: ना कोई अधिकार, गलती पर कटेंगे पैसे! डिलीवरी पार्टनर बनने के ये नुकसान

डिलीवरी पार्टनर या गिग वर्कर की जॉब इतनी आसान भी नहीं हैं. भले ही ऐसी कहानियां मिलती हैं कि कोई व्यक्ति सिर्फ ये काम करके हज़ारों कमा रहा है, लेकिन कंपनी की नियम और शर्तों को ध्यान से पड़ने पर कई तरह की चीज़ें सामने आती हैं.

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डिलीवरी पार्टनर के लिए नियमों का जानना जरूरी है. डिलीवरी पार्टनर के लिए नियमों का जानना जरूरी है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

क्विक सर्विस, होम क्लीनिंग और डिलीवरी ऐप्स जैसे जेप्टो, रैपिडो, स्नैबिट और प्रोंटो से जुड़कर काम करना और कमाई करना जितना आसान दिखता है, उसके पीछे कानूनी और वित्तीय जोखिम भी छिपे होते हैं. क्यूंकि आपको ये भी जानना जरूरी है कि इस तरह के प्लेटफॉर्म के साथ जुड़कर किस तरह के फायदे हैं और साथ ही नुकसान भी हैं, या आपको किस तरह की सुविधाएं मिल रही है. 

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इनकी वेबसाइट्स पर मौजूद जानकारी को ध्यान से देखेंगे, तो मालूम चलता है कि एग्रीमेंट की टर्म्स एंड कंडीशंस में वर्कर को एम्प्लॉई की जगह इंडीपेंडेंट सर्विस प्रोवाइडर का दर्जा दिया जाता है. इसी वजह से कई तरह की देनदारियां सीधे वर्कर पर आ जाती हैं. अगर आप इन ऐप्स के जरिए काम करने की सोच रहे हैं, तो इन 5 मुख्य नुकसानों और कानूनी जोखिमों को समझना जरूरी है.

1. कोई कर्मचारी अधिकार नहीं और कानूनी इंडेम्निटी का बोझ: कंपनी और वर्कर के बीच का संबंध केवल प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल का होता है. इसका मतलब है कि आप कंपनी के स्थायी कर्मचारी नहीं हैं. एग्रीमेंट के तहत इंडेम्निटी क्लॉज लागू होता है. सेवा देते समय कोई दुर्घटना, नुकसान या किसी थर्ड पार्टी का दावा होता है, तो उसकी पूरी कानूनी और वित्तीय भरपाई वर्कर को अपनी जेब से करनी होगी. कंपनी किसी भी कानूनी या अदालती खर्च के लिए जिम्मेदार नहीं होती.

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2. नुकसान, चोरी और कमी पर पेमेंट से कटौतियां: काम खत्म होने या एग्रीमेंट खत्म होने पर कंपनियों को कटौतियां करने का पूरा अधिकार होता है. ग्राहकों से इकट्ठा की गई नकदी जमा न करने पर पूरी रकम काट ली जाती है. कंपनी की ब्रांडेड टी शर्ट, बैग या उपकरण न लौटाने पर उनकी लागत काट ली जाती है. ट्रेनिंग या बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की लागत भी आपकी कमाई से काटी जा सकती है. किसी ऑर्डर में गड़बड़ी, सामान के नुकसान या चोरी होने पर उस ऑर्डर के मूल्य के बराबर राशि वर्कर से वसूल की जाती है.

3. आपराधिक मामलों में असीमित देनदारी: सामान्य परिस्थितियों में नुकसान की सीमा ग्राहक द्वारा दिए गए ऑर्डर मूल्य तक सीमित हो सकती है. लेकिन अगर वर्कर पर धोखाधड़ी, चोरी, सिस्टम से छेड़छाड़ या किसी गंभीर आपराधिक कृत्य का आरोप लगता है, तो यह सीमा पूरी तरह समाप्त हो जाती है. ऐसे मामलों में वर्कर पर असीमित वित्तीय और कानूनी देनदारी लागू होती है और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.

4. बिना नोटिस अकाउंट निलंबन: कंपनी के पास ये अधिकार होता है कि वह बिना किसी पूर्व नोटिस या 7 दिनों के लिखित नोटिस पर वर्कर का अकाउंट तुरंत बंद या सस्पेंड कर सकती है. अगर वर्कर गाइडलाइंस का उल्लंघन करता है, ग्राहकों से शिकायत आती है, या ऐप के जीपीएस या सिस्टम के साथ छेड़छाड़ का प्रयास करता है, तो बिना किसी मुआवजा दिए काम से निकाला जा सकता है.

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5. पर्सनल इंश्योरेंस और मेडिकल का अपना खर्च: वाहन के बीमा के अलावा, कई एग्रीमेंट्स में साफ लिखा होता है कि वर्कर को अपने खर्च पर पर्सनल एक्सीडेंटल डेथ कवरेज और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदनी होगी. काम करते समय बीमारी या चोट लगने की स्थिति में कंपनी प्रत्यक्ष रूप से मेडिकल खर्चों के लिए बाध्य नहीं होती.

प्लेटफॉर्म वर्कर के रूप में काम शुरू करने से पहले केवल संभावित कमाई को न देखें, बल्कि एग्रीमेंट की शर्तों, सुरक्षा नियमों और नुकसान की देनदारियों को अच्छी तरह समझ लें. यही 5 बड़े कानूनी और वित्तीय जोखिम इस तरह के काम की कड़वी सच्चाई सामने रखते हैं.
 

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